चित्रांश शर्मा
शाहपुरा पंचायत समिति क्षेत्र के अरवड़ गांव में आज पत्रकारिता पर कायराना हमला कर लोकतंत्र की आवाज दबाने की नाकाम कोशिश की गई। राजस्थान पत्रिका के संवाददाता सत्यनारायण टेलर पर सरपंच प्रतिनिधि व उसके साथियों ने योजनाबद्ध तरीके से जानलेवा हमला कर दिया। यह हमला न सिर्फ एक पत्रकार पर, बल्कि सच, पारदर्शिता और जनहित की आवाज पर सीधा प्रहार है।
पूरा मामला 17 दिसंबर 2025 का है, जब ग्राम अरवड़ में अधिकारियों की मौजूदगी में रात्रि चैपाल का आयोजन हुआ था। ग्रामीणों ने चैपाल में अपनी समस्याएं खुलकर रखीं, जिन्हें पत्रकार सत्यनारायण टेलर ने अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए समाचार के रूप में प्रकाशित किया। सच का आईना दिखाना सरपंच प्रतिनिधि रामलाल पुत्र माधुलाल गुर्जर को इतना नागवार गुजरा कि उसने पहले फोन पर पत्रकार को धमकाया और फिर खुलेआम गुंडागर्दी पर उतर आया।
घटना के दिन अरवड़ बस स्टैंड पर सरपंच प्रतिनिधि रामलाल गुर्जर अपने सहयोगियों ईश्वर गुर्जर, गोपाल रेगर, रामप्रसाद रेगर व महावीर खारोल के साथ मिलकर पत्रकार सत्यनारायण टेलर को रास्ते में रोक लेता है। इसके बाद अभद्र भाषा, धमकियां और फिर बेरहमी से मारपीट की गई। हमलावरों ने एलानिया तौर पर कहा कि “हमारे खिलाफ खबरें छापी तो पत्रकारिता करना भूल जाओगे।” यही नहीं, मारपीट के दौरान पत्रकार के हाथ पर दांत से काट लिया गया और लात-घूंसे बरसाए गए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल पत्रकार को फुलियाकलां के चिकित्सालय में उपचार कराना पड़ा।
घटना के बाद फुलियाकलां उपखंड क्षेत्र के पत्रकारों में भारी आक्रोश फैल गया। सभी पत्रकार एकजुट होकर उपखंड अधिकारी के समक्ष पहुंचे और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा। साथ ही फुलियाकलां थाने में नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई गई, जिस पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पत्रकारों ने साफ शब्दों में कहा कि यदि अब भी दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह संदेश जाएगा कि गुंडागर्दी के आगे कानून और पत्रकारिता दोनों कमजोर हैं। इसी कड़ी में शाहपुरा और भीलवाड़ा के पत्रकारों ने भी जिला पुलिस अधिकारियों से वार्ता कर इस हमले को लोकतंत्र पर हमला बताते हुए आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और पत्रकार सुरक्षा कानून को प्रभावी रूप से लागू करने की मांग की है।
यह घटना एक चेतावनी है यदि आज सच लिखने वाला पत्रकार सुरक्षित नहीं है, तो कल आम नागरिक की आवाज भी कुचली जाएगी। अब सवाल यह है कि प्रशासन गुंडों के साथ खड़ा होगा या लोकतंत्र के चैथे स्तंभ के साथ।




