Sunday, March 22, 2026

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खण्डार: गणगौर पर्व पर शहरभर में पूजा अर्चना, परंपरा और आस्था का संगम

ब्यूरो चीफ: बृजेश त्रिवेदी

सवाई माधोपुर। सवाई माधोपुर जिले के खण्डार कस्बे में गणगौर का पर्व इस वर्ष भी बड़े ही हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जा रहा है। पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल बना हुआ है और विशेष रूप से महिलाओं एवं युवतियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है।

गणगौर के अवसर पर महिलाएं और युवतियां सोलह श्रृंगार कर नए-नए परिधानों में सजी-धजी नजर आईं। वे समूहों में एकत्रित होकर पारंपरिक गीत गाते हुए गणगौर का पूजन कर रही हैं। कस्बे के विभिन्न मोहल्लों में गणगौर की स्थापना की गई है, जहां महिलाएं झुंडों में पहुंचकर श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना कर रही हैं।

गौरतलब है कि गणगौर राजस्थान का एक प्रमुख लोक पर्व है, जो होली के दूसरे दिन चैत्र कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होकर 18 दिनों तक चलता है और चैत्र शुक्ल तृतीया को विशेष उत्सव के साथ संपन्न होता है।

धार्मिक एवं पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गणगौर को भगवान शिव और माता पार्वती का प्रतीक माना जाता है। ‘गण’ का अर्थ शिव और ‘गौर’ का अर्थ गौरा (पार्वती) होता है। इस दौरान कुंवारी युवतियां अच्छे वर की कामना से तथा विवाहित महिलाएं अपने सुहाग की लंबी आयु के लिए विधि-विधान से पूजन करती हैं।

हमारे संवाददाता ने खारी बावड़ी परिसर में स्थापित गणगौर स्थल पर पहुंचकर पूजन कर रही महिलाओं से बातचीत की। महिलाओं ने बताया कि यह पर्व उनकी आस्था और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे वे हर वर्ष पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाती हैं।

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खण्डार: गणगौर पर्व पर शहरभर में पूजा अर्चना, परंपरा और आस्था का संगम

ब्यूरो चीफ: बृजेश त्रिवेदी

सवाई माधोपुर। सवाई माधोपुर जिले के खण्डार कस्बे में गणगौर का पर्व इस वर्ष भी बड़े ही हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जा रहा है। पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल बना हुआ है और विशेष रूप से महिलाओं एवं युवतियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है।

गणगौर के अवसर पर महिलाएं और युवतियां सोलह श्रृंगार कर नए-नए परिधानों में सजी-धजी नजर आईं। वे समूहों में एकत्रित होकर पारंपरिक गीत गाते हुए गणगौर का पूजन कर रही हैं। कस्बे के विभिन्न मोहल्लों में गणगौर की स्थापना की गई है, जहां महिलाएं झुंडों में पहुंचकर श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना कर रही हैं।

गौरतलब है कि गणगौर राजस्थान का एक प्रमुख लोक पर्व है, जो होली के दूसरे दिन चैत्र कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होकर 18 दिनों तक चलता है और चैत्र शुक्ल तृतीया को विशेष उत्सव के साथ संपन्न होता है।

धार्मिक एवं पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गणगौर को भगवान शिव और माता पार्वती का प्रतीक माना जाता है। ‘गण’ का अर्थ शिव और ‘गौर’ का अर्थ गौरा (पार्वती) होता है। इस दौरान कुंवारी युवतियां अच्छे वर की कामना से तथा विवाहित महिलाएं अपने सुहाग की लंबी आयु के लिए विधि-विधान से पूजन करती हैं।

हमारे संवाददाता ने खारी बावड़ी परिसर में स्थापित गणगौर स्थल पर पहुंचकर पूजन कर रही महिलाओं से बातचीत की। महिलाओं ने बताया कि यह पर्व उनकी आस्था और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे वे हर वर्ष पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाती हैं।

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