Sunday, March 22, 2026

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झुंझुनूं : इन्द्रदेव की फुहारों में सजी गणगौर यात्रा, लोक कला और आस्था का अद्भुत संगम

ब्यूरो चीफ: सुरेश सैनी

झुंझुनूं, 21 मार्च।
गणगौर के पावन अवसर पर झुंझुनूं में इस वर्ष शाही सवारी ऐतिहासिक वैभव और उल्लास के साथ संपन्न हुई। शेखावाटी की लोक आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम इस आयोजन में देखने को मिला। विशेष बात यह रही कि हल्की बारिश की फुहारों ने उत्सव के माहौल को और भी मनोहारी बना दिया।

विधि-विधान से हुआ शुभारंभ

शाही सवारी का शुभारंभ श्री गोपाल गौशाला से हुआ, जहाँ जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग ने पंडित दीनदयाल शुक्ला के सान्निध्य में गणगौर माता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इसके बाद सवारी शहर के प्रमुख मार्गों की ओर रवाना हुई।

लोक संस्कृति का भव्य प्रदर्शन

सवारी में जयपुर से आई ‘हरजी राणा एंड पार्टी’ के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। घूमर, कालबेलिया और कच्छी घोड़ी जैसे पारंपरिक नृत्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सजे-धजे ऊंट-घोड़े, पारंपरिक बैंड-बाजे, डीजे और राजस्थानी वेशभूषा में सजे कलाकारों ने राजसी वैभव का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया।

जगह-जगह हुआ भव्य स्वागत

शहर के विभिन्न स्थानों पर सवारी का पुष्पवर्षा से स्वागत किया गया।

  • छावनी बाजार में गल्ला व्यापार संघ द्वारा आरती एवं शीतल पेय की व्यवस्था की गई।
  • चूना चौक में विकास समिति ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।
  • कपड़ा बाजार में भी श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर भक्ति भाव प्रकट किया।

निर्धारित मार्ग से निकली सवारी

सवारी झुंझुनूं एकेडमी, लावरेश्वर महादेव मंदिर और श्याम मंदिर से होते हुए विभिन्न बाजारों से गुजरी। शाम को छावनी बाजार में विशेष महाआरती का आयोजन हुआ। इसके पश्चात समस तालाब पर विसर्जन के साथ 16 दिवसीय गणगौर महोत्सव का समापन हुआ।

जनसहयोग से सफल आयोजन

कार्यक्रम की सफलता में गौशाला अध्यक्ष प्रमोद खंडेलिया, मंत्री प्रदीप पाटोदिया, संयोजक नारायण प्रसाद जालान सहित अनेक गणमान्य नागरिकों और शहरवासियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद रहा।

गणगौर की इस शाही सवारी ने एक बार फिर झुंझुनूं की सांस्कृतिक समृद्धि और लोक परंपराओं की जीवंतता को भव्य रूप में प्रस्तुत किया।

International

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झुंझुनूं : इन्द्रदेव की फुहारों में सजी गणगौर यात्रा, लोक कला और आस्था का अद्भुत संगम

ब्यूरो चीफ: सुरेश सैनी

झुंझुनूं, 21 मार्च।
गणगौर के पावन अवसर पर झुंझुनूं में इस वर्ष शाही सवारी ऐतिहासिक वैभव और उल्लास के साथ संपन्न हुई। शेखावाटी की लोक आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम इस आयोजन में देखने को मिला। विशेष बात यह रही कि हल्की बारिश की फुहारों ने उत्सव के माहौल को और भी मनोहारी बना दिया।

विधि-विधान से हुआ शुभारंभ

शाही सवारी का शुभारंभ श्री गोपाल गौशाला से हुआ, जहाँ जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग ने पंडित दीनदयाल शुक्ला के सान्निध्य में गणगौर माता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इसके बाद सवारी शहर के प्रमुख मार्गों की ओर रवाना हुई।

लोक संस्कृति का भव्य प्रदर्शन

सवारी में जयपुर से आई ‘हरजी राणा एंड पार्टी’ के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। घूमर, कालबेलिया और कच्छी घोड़ी जैसे पारंपरिक नृत्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सजे-धजे ऊंट-घोड़े, पारंपरिक बैंड-बाजे, डीजे और राजस्थानी वेशभूषा में सजे कलाकारों ने राजसी वैभव का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया।

जगह-जगह हुआ भव्य स्वागत

शहर के विभिन्न स्थानों पर सवारी का पुष्पवर्षा से स्वागत किया गया।

  • छावनी बाजार में गल्ला व्यापार संघ द्वारा आरती एवं शीतल पेय की व्यवस्था की गई।
  • चूना चौक में विकास समिति ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।
  • कपड़ा बाजार में भी श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर भक्ति भाव प्रकट किया।

निर्धारित मार्ग से निकली सवारी

सवारी झुंझुनूं एकेडमी, लावरेश्वर महादेव मंदिर और श्याम मंदिर से होते हुए विभिन्न बाजारों से गुजरी। शाम को छावनी बाजार में विशेष महाआरती का आयोजन हुआ। इसके पश्चात समस तालाब पर विसर्जन के साथ 16 दिवसीय गणगौर महोत्सव का समापन हुआ।

जनसहयोग से सफल आयोजन

कार्यक्रम की सफलता में गौशाला अध्यक्ष प्रमोद खंडेलिया, मंत्री प्रदीप पाटोदिया, संयोजक नारायण प्रसाद जालान सहित अनेक गणमान्य नागरिकों और शहरवासियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद रहा।

गणगौर की इस शाही सवारी ने एक बार फिर झुंझुनूं की सांस्कृतिक समृद्धि और लोक परंपराओं की जीवंतता को भव्य रूप में प्रस्तुत किया।

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