ब्यूरो रिपोर्ट: राजेन्द्र खटीक, शाहपुरा
शक्करगढ़। क्षेत्र के आमल्दा गांव में एक भावनात्मक और चर्चा का विषय बना मामला सामने आया है, जहां एक पिता ने अपनी जीवित पुत्री को ‘मृत’ मानते हुए उसका शोक संदेश तक प्रकाशित करवा दिया। इस घटना ने पूरे इलाके में सामाजिक, पारिवारिक और भावनात्मक पहलुओं को लेकर बहस छेड़ दी है।
जानकारी के अनुसार, आमल्दा निवासी देवेंद्र सिंह कानावत ने अपनी 27 वर्षीय पुत्री आकांक्षा को उच्च शिक्षा के लिए जयपुर भेजा था। पिता की इच्छा थी कि बेटी पढ़-लिखकर परिवार और समाज का नाम रोशन करे, लेकिन आकांक्षा ने परिवार की इच्छा के विरुद्ध अन्य समाज के युवक के साथ संबंध स्थापित कर लिया।
बताया जा रहा है कि पुलिस द्वारा दस्तयाब किए जाने के बाद थाने में पिता ने बेटी को समझाने और घर लौटने के लिए काफी प्रयास किए। उन्होंने भावुक होकर उससे परिवार की मर्यादा और सम्मान का हवाला देते हुए घर आने की अपील की, लेकिन युवती ने अपने निर्णय पर अडिग रहते हुए युवक के साथ जाने का फैसला किया।
इस घटना से आहत पिता ने अपनी पुत्री से संबंध समाप्त करने का कठोर निर्णय लेते हुए उसका शोक संदेश छपवा दिया। प्रकाशित शोक पत्र में आकांक्षा का ‘स्वर्गवास’ 20 मार्च 2026 दर्शाया गया है, साथ ही 22 मार्च को तीये की बैठक और 31 मार्च को ब्रह्मभोज का कार्यक्रम भी घोषित किया गया है। शोक संदेश में पिता देवेंद्र सिंह सहित पूरे परिवार का नाम अंकित है।
इस संबंध में थाना अधिकारी पूरणमल मीणा ने बताया कि युवती बालिग है और उसे कानूनन अपनी इच्छा से जीवन जीने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि थाने में परिजनों और युवती के बीच बातचीत कराई गई थी, लेकिन युवती अपने निर्णय पर कायम रही। दोनों ने पुलिस से सुरक्षा की मांग भी की है।
पुलिस अधिकारी ने स्पष्ट किया कि परिजनों द्वारा शोक संदेश प्रकाशित कराना उनका निजी और भावनात्मक निर्णय है। वहीं, इस घटना को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं और इसे सामाजिक मूल्यों तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच टकराव के रूप में देखा जा रहा है।




