Wednesday, April 1, 2026

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संविधान निर्माता डॉक्टर अंबेडकर जयंती पर शाहपुरा नगर पालिका की बेरुखी आवश्यक व्यवस्थाओं से किया इनकार

शाहपुरा-राजेन्द्र खटीक।

शाहपुरा पूरे देश में आगामी 14 अप्रैल को भारतीय संविधान निर्माता एवं दलित पिछड़ा के मसीहा भारत रत्न बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी की 135 वीं जयंती आगामी 14 अप्रैल 2026 को पूरे देश में समारोह पूरक मानने को लेकर तैयारियां प्रारंभ हो गई है|

इसी क्रम में शाहपुरा अंबेडकर विचार मंच के जिला अध्यक्ष सुरेश चंद्र घूसर ने आज शाहपुरा नगर पालिका आयुक्त को लिखित में संस्थान की ओर से अनुरोध किया कि प्रतिवर्ष की तरह आवश्यक व्यवस्थाएं की जावे जिस पर नगर पालिका आयुक्त ने स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया जबकि शहर के सार्वजनिक कार्यक्रम शहीदों महापुरुषों की जायंटियों स्वतंत्रता दिवस गणतंत्र दिवस पर प्रतिवर्ष नगर पालिका ही व्यवस्था करती आई है |

शाहपुरा नगर पालिका विगत 25 वर्षों से अंबेडकर जयंती समारोह में टेंट माइक एवं रोशनी की व्यवस्था करती आई है लेकिन इस वर्ष मना करना देश के संविधान निर्माता के साथ ही सरकारी एजेंसी द्वारा स्पष्ट रूप से भेदभाव नजर आ रहा है उक्त घटनाक्रम को लेकर अंबेडकर विचार मंच के सभी सदस्यों में गहरा आक्रोश है अंबेडकर विचार मंच के सदस्यों के साथ ही शाहपुर नगर के अन्य समाज के लोग जो की देश के महापुरुषों में आस्था रखते हैं उन्होंने भी रोष व्यक्त किया है पूरे देश में अंबेडकर जयंती की व्यवस्थाएं सरकारी एजेंसियां कर रही है तो शाहपुरा में क्यों नहीं उक्त मामले को लेकर कल 4:00 बजे अंबेडकर स्मारक पर आवश्यक बैठक रखी गई है जिसमें नगर पालिका की महापुरुषों के साथ भेदभाव की नीति के विरुद्ध राज्य सरकार को ज्ञापन दिया जाएगा |

अंबेडकर विचार मंच के जिला अध्यक्ष सुरेश चंद्र घूसर, महादेव रेगर, घनश्याम बेरवा, रमन बेरवा, देवराज बेरवा, हंसराज उचैनिया, राजू लाल रेगरल, लादु राम जाडोटिया, फौजी भेरूलाल खटीक, पार्षद देवीलाल रेगर, रामस्वरूप चावला, शिवराम खटीक ने सभी साथियों से अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील की है और साथ ही कल शाहपुरा में आगामी 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती समारोह को भव्य रूप से मनाने को लेकर भी अंतिम रूप दिया जाएगा और भेदभावपूर्ण नीति के विरुद्ध नगर पालिका के अधिकारियों के विरुद्ध राज्य सरकार को ज्ञापन भी दिया जाएगा की शाहपुरा में संविधान निर्माता के साथ भेदभाव बढ़ता जा रहा है महापुरुषों महापुरुष में फर्क किया जा रहा है।

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संविधान निर्माता डॉक्टर अंबेडकर जयंती पर शाहपुरा नगर पालिका की बेरुखी आवश्यक व्यवस्थाओं से किया इनकार

शाहपुरा-राजेन्द्र खटीक।

शाहपुरा पूरे देश में आगामी 14 अप्रैल को भारतीय संविधान निर्माता एवं दलित पिछड़ा के मसीहा भारत रत्न बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी की 135 वीं जयंती आगामी 14 अप्रैल 2026 को पूरे देश में समारोह पूरक मानने को लेकर तैयारियां प्रारंभ हो गई है|

इसी क्रम में शाहपुरा अंबेडकर विचार मंच के जिला अध्यक्ष सुरेश चंद्र घूसर ने आज शाहपुरा नगर पालिका आयुक्त को लिखित में संस्थान की ओर से अनुरोध किया कि प्रतिवर्ष की तरह आवश्यक व्यवस्थाएं की जावे जिस पर नगर पालिका आयुक्त ने स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया जबकि शहर के सार्वजनिक कार्यक्रम शहीदों महापुरुषों की जायंटियों स्वतंत्रता दिवस गणतंत्र दिवस पर प्रतिवर्ष नगर पालिका ही व्यवस्था करती आई है |

शाहपुरा नगर पालिका विगत 25 वर्षों से अंबेडकर जयंती समारोह में टेंट माइक एवं रोशनी की व्यवस्था करती आई है लेकिन इस वर्ष मना करना देश के संविधान निर्माता के साथ ही सरकारी एजेंसी द्वारा स्पष्ट रूप से भेदभाव नजर आ रहा है उक्त घटनाक्रम को लेकर अंबेडकर विचार मंच के सभी सदस्यों में गहरा आक्रोश है अंबेडकर विचार मंच के सदस्यों के साथ ही शाहपुर नगर के अन्य समाज के लोग जो की देश के महापुरुषों में आस्था रखते हैं उन्होंने भी रोष व्यक्त किया है पूरे देश में अंबेडकर जयंती की व्यवस्थाएं सरकारी एजेंसियां कर रही है तो शाहपुरा में क्यों नहीं उक्त मामले को लेकर कल 4:00 बजे अंबेडकर स्मारक पर आवश्यक बैठक रखी गई है जिसमें नगर पालिका की महापुरुषों के साथ भेदभाव की नीति के विरुद्ध राज्य सरकार को ज्ञापन दिया जाएगा |

अंबेडकर विचार मंच के जिला अध्यक्ष सुरेश चंद्र घूसर, महादेव रेगर, घनश्याम बेरवा, रमन बेरवा, देवराज बेरवा, हंसराज उचैनिया, राजू लाल रेगरल, लादु राम जाडोटिया, फौजी भेरूलाल खटीक, पार्षद देवीलाल रेगर, रामस्वरूप चावला, शिवराम खटीक ने सभी साथियों से अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील की है और साथ ही कल शाहपुरा में आगामी 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती समारोह को भव्य रूप से मनाने को लेकर भी अंतिम रूप दिया जाएगा और भेदभावपूर्ण नीति के विरुद्ध नगर पालिका के अधिकारियों के विरुद्ध राज्य सरकार को ज्ञापन भी दिया जाएगा की शाहपुरा में संविधान निर्माता के साथ भेदभाव बढ़ता जा रहा है महापुरुषों महापुरुष में फर्क किया जा रहा है।

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