Saturday, April 4, 2026

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डिजिटल खेती की नई क्रांति: गडचिरोली के किसानों को मिल रहा आधुनिक तकनीक का साथ

ब्यूरो रिपोर्ट: महेश पांडुरंग शेंडे

गढ़चिरोली। महाराष्ट्र के गढ़चिरोली जिले से खेती और तकनीक के संगम की एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है। जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी श्रीमती प्रीति हिरलकर के मार्गदर्शन में “डिजिटल खेतीशाला” के माध्यम से किसानों को आधुनिक एवं जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों की जानकारी दी जा रही है।

यह पहल “नानाजी देशमुख कृषि संजीवनी परियोजना (POCRA 2.0)” के अंतर्गत संचालित की जा रही है, जिसमें जिले के 453 गांवों को शामिल किया गया है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य बदलते मौसम के प्रभाव से किसानों को सुरक्षित रखना और खेती को अधिक लाभदायक बनाना है। साथ ही भूमिहीन परिवारों को भी कृषि आधारित रोजगार के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।

डिजिटल खेतीशाला के माध्यम से किसानों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर विशेषज्ञों द्वारा वैज्ञानिक एवं फसल विशेष जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। ये सत्र Zoom और YouTube के जरिए आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे अधिक से अधिक किसान इस पहल से जुड़ सकें।

1 अप्रैल 2026 से शुरू हुए इस अभियान के पहले सत्र में बुवाई से पूर्व की तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया गया। इसमें खेत की तैयारी, बीज की सही बुवाई, अंतर फसल पद्धति, बीज की गुणवत्ता जांच और बीज उपचार जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे।

जिले के कृषि अधिकारी और समूह सहायकों द्वारा गांव-गांव जाकर किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक कंपनियों के सदस्यों को इस कार्यक्रम से जोड़ा जा रहा है। कार्यक्रम में किसानों ने अपनी समस्याएं भी साझा कीं, जिनका समाधान विशेषज्ञों द्वारा मौके पर ही किया गया।

उम्मीद जताई जा रही है कि आगामी खरीफ सीजन में इस डिजिटल पहल का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा और किसानों की पैदावार में वृद्धि होगी। यह पहल इस बात का उदाहरण है कि सही मार्गदर्शन और तकनीक के उपयोग से खेती को अधिक सशक्त और लाभकारी बनाया जा सकता है।

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डिजिटल खेती की नई क्रांति: गडचिरोली के किसानों को मिल रहा आधुनिक तकनीक का साथ

ब्यूरो रिपोर्ट: महेश पांडुरंग शेंडे

गढ़चिरोली। महाराष्ट्र के गढ़चिरोली जिले से खेती और तकनीक के संगम की एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है। जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी श्रीमती प्रीति हिरलकर के मार्गदर्शन में “डिजिटल खेतीशाला” के माध्यम से किसानों को आधुनिक एवं जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों की जानकारी दी जा रही है।

यह पहल “नानाजी देशमुख कृषि संजीवनी परियोजना (POCRA 2.0)” के अंतर्गत संचालित की जा रही है, जिसमें जिले के 453 गांवों को शामिल किया गया है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य बदलते मौसम के प्रभाव से किसानों को सुरक्षित रखना और खेती को अधिक लाभदायक बनाना है। साथ ही भूमिहीन परिवारों को भी कृषि आधारित रोजगार के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।

डिजिटल खेतीशाला के माध्यम से किसानों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर विशेषज्ञों द्वारा वैज्ञानिक एवं फसल विशेष जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। ये सत्र Zoom और YouTube के जरिए आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे अधिक से अधिक किसान इस पहल से जुड़ सकें।

1 अप्रैल 2026 से शुरू हुए इस अभियान के पहले सत्र में बुवाई से पूर्व की तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया गया। इसमें खेत की तैयारी, बीज की सही बुवाई, अंतर फसल पद्धति, बीज की गुणवत्ता जांच और बीज उपचार जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे।

जिले के कृषि अधिकारी और समूह सहायकों द्वारा गांव-गांव जाकर किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक कंपनियों के सदस्यों को इस कार्यक्रम से जोड़ा जा रहा है। कार्यक्रम में किसानों ने अपनी समस्याएं भी साझा कीं, जिनका समाधान विशेषज्ञों द्वारा मौके पर ही किया गया।

उम्मीद जताई जा रही है कि आगामी खरीफ सीजन में इस डिजिटल पहल का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा और किसानों की पैदावार में वृद्धि होगी। यह पहल इस बात का उदाहरण है कि सही मार्गदर्शन और तकनीक के उपयोग से खेती को अधिक सशक्त और लाभकारी बनाया जा सकता है।

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