ब्यूरो रिपोर्ट: विजय द्विवेदी, धार (मध्य प्रदेश)
बदनावर में नव निर्मित सिविल अस्पताल भवन का लोकार्पण 5 अप्रैल को माननीय राज्यपाल के कर कमलों से प्रस्तावित है, लेकिन इससे पहले ही यह मामला विवादों में घिर गया है। बदनावर विधायक भंवरसिंह शेखावत ने अधूरी सुविधाओं के साथ भवन के लोकार्पण का सैद्धांतिक विरोध जताया है।
विधायक शेखावत ने आरोप लगाया कि लगभग 8 करोड़ 65 लाख रुपये की लागत से निर्मित अस्पताल भवन अभी पूरी तरह तैयार नहीं है। भवन में न तो पीने के पानी की समुचित व्यवस्था है, न ही ड्रेनेज लाइन सही स्थिति में है। उपयोग से पहले ही भवन में दरारें दिखाई देने लगी हैं और दरवाजे-खिड़कियां टूट-फूट की स्थिति में हैं।
उन्होंने कहा कि अस्पताल में एक्स-रे एवं ड्रेसिंग जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा लिफ्ट, बाउंड्रीवाल, फर्नीचर, पंखे और नर्सिंग स्टेशन जैसी आवश्यक व्यवस्थाओं का भी अभाव है। ड्रेनेज चेंबर के ढक्कन टूटे हुए हैं और कई जगह जालियां भी नहीं लगाई गई हैं, जिससे भविष्य में गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
विधायक के अनुसार, निर्माण कार्य के दौरान ही भवन जर्जर स्थिति में दिखाई दे रहा है, ऐसे में जल्दबाजी में लोकार्पण कर जनता को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई बार ठेकेदार को निर्देश देने के बावजूद सुधार नहीं किया गया।
शेखावत ने कोद और कानवन में बने अस्पताल भवनों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां लोकार्पण के लंबे समय बाद भी भवनों पर ताले लगे हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग न तो डॉक्टर उपलब्ध करा पाया और न ही पर्याप्त संसाधन, जिससे करोड़ों रुपये की लागत से बने भवन बेकार पड़े हैं।
विधायक मीडिया प्रभारी महेश पाटीदार ने बताया कि विधायक का स्पष्ट मत है कि पहले अस्पताल में सभी आवश्यक सुविधाएं, विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति और पर्याप्त नर्सिंग स्टाफ की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके बाद ही भवन का लोकार्पण और संचालन शुरू किया जाना चाहिए।
अधूरी तैयारियों के बीच अस्पताल भवन के लोकार्पण को लेकर उठे सवालों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि विभाग इन कमियों को दूर कर जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में क्या कदम उठाता है।




