जिला ब्यूरो: असलेखा चौरिया
छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के गुरैया गांव में आयोजित होने वाला मेघनाथ मेला अपनी अनोखी परंपराओं, आस्था और सांस्कृतिक विविधता के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। यह मेला गोंड सहित अन्य आदिवासी समुदायों की गहरी आस्था से जुड़ा हुआ है और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को आज भी जीवित रखे हुए है।
मेघनाथ मेले में लोक संस्कृति, रीति-रिवाज और पारंपरिक मान्यताओं का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यहां श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का माहौल पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक रंग में रंग देता है। आदिवासी समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा में भाग लेकर अपनी सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन करते हैं।
यह मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आदिवासी जीवन शैली, उनकी मान्यताओं और सांस्कृतिक पहचान का जीवंत प्रतीक है। मेले में शामिल होने वाले लोगों के लिए यह एक उत्सव के साथ-साथ अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर भी बनता है।
मेघनाथ मेला आज भी अपनी प्राचीन परंपराओं को संजोए हुए है और आने वाली पीढ़ियों को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर से परिचित करा रहा है। यही कारण है कि इसे आदिवासी संस्कृति की अमूल्य विरासत के रूप में देखा जाता है।




