विशेष रिपोर्ट: महेश कुमार, प्रतापगढ़ राजस्थान
राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के छोटी सादड़ी क्षेत्र से पुलिस व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करने वाली दो गंभीर घटनाएं सामने आई हैं। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने एक किसान को फर्जी तरीके से नशीले पदार्थ के केस में फंसाकर लाखों रुपये की मांग की, वहीं दूसरी घटना में पुलिस की दबिश के दौरान एक दिव्यांग बुजुर्ग की मौत हो गई।
फर्जी केस में फंसाने का आरोप
पहले मामले में किसान रामलाल पाटीदार ने आरोप लगाया है कि पुलिसकर्मी खुद अवैध डोडा चूरा लेकर उसके घर पहुंचे और बाहर रखकर उसे फंसाने की साजिश रची। इसके बाद किसान से मामला रफा-दफा करने के लिए करीब 50 लाख रुपये की मांग की गई। रकम नहीं देने पर उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जेल भेज दिया गया।
शादी के घर में दबिश, बुजुर्ग की मौत
दूसरा मामला गोमाना गांव का है, जहां शादी समारोह के दौरान पुलिस बिना अनुमति घर में घुस गई। परिजनों का कहना है कि मामले में पहले से ही हाईकोर्ट का स्टे ऑर्डर मौजूद था, बावजूद इसके पुलिस ने कार्रवाई की। आरोप है कि इस दौरान दिव्यांग बुजुर्ग अमृत लाल के साथ मारपीट और अभद्र व्यवहार किया गया, जिससे उन्हें गहरा सदमा लगा और उनकी मौत हो गई।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुई एफआईआर
दोनों मामलों में पीड़ित पक्ष को न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद ही पुलिस के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। मामले में सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी सामने आए हैं, जो पुलिस के दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, आरोपित पुलिसकर्मी लंबे समय से एक ही थाने में पदस्थ हैं और कार्रवाई के बावजूद प्रभाव के चलते वापस वहीं लौट आते हैं। हाल ही में रिश्वत मांगने के एक मामले में भी एक पुलिसकर्मी को लाइन हाजिर किया गया था, लेकिन इसे केवल औपचारिक कार्रवाई माना जा रहा है।
इन घटनाओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली, जवाबदेही और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि जांच निष्पक्ष होती है या मामला अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
अगर कानून के रखवाले ही कानून तोड़ने लगें, तो आम नागरिक को न्याय कौन दिलाएगा




