Wednesday, April 8, 2026

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जरहा बना नशामुक्ति की मिसाल: सरपंच के फैसले से गांव में पूर्ण शराबबंदी लागू

ब्यूरो चीफ: उमेश पाठक

रीवा। जिले के गुढ़ विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत जनपद पंचायत रायपुर कर्चुलियान की ग्राम पंचायत जरहा अब एक नई पहचान बना चुकी है। सरपंच शिवेंद्र सिंह की पहल पर यहां 1 अप्रैल 2026 से पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी गई है, जिससे यह रीवा जिले की पहली ‘शराब मुक्त’ ग्राम पंचायत बन गई है।

गौरतलब है कि इससे पहले यह पंचायत शराब, गांजा और कोरेक्स जैसे नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री के लिए बदनाम रही है। लेकिन अब सरपंच के दृढ़ संकल्प और ग्रामवासियों के सहयोग से स्थिति पूरी तरह बदलती नजर आ रही है। शराबबंदी लागू होने के बाद अवैध कारोबार करने वालों में हड़कंप मच गया है और वे दोबारा पैकारी शुरू कराने के प्रयास में जुटे हैं, हालांकि प्रशासनिक सख्ती और जनसमर्थन के चलते उनके मंसूबे फिलहाल नाकाम साबित हो रहे हैं।

सरपंच शिवेंद्र सिंह ने बताया कि गांव में ठेकेदारों द्वारा पैकारी के माध्यम से शराब और अन्य मादक पदार्थों की बिक्री करवाई जाती थी, जिससे युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में जा रही थी। इस गंभीर समस्या को देखते हुए ग्रामसभा में व्यापक चर्चा और सहमति के बाद पूर्ण शराबबंदी का निर्णय लिया गया, जिसे ग्रामीणों का भरपूर समर्थन मिला।

शराबबंदी को प्रभावी बनाने के लिए सरपंच द्वारा पुलिस अधीक्षक रीवा, एसडीएम गुढ़, थाना प्रभारी मनगवां एवं मनिकवार चौकी प्रभारी को पत्र भी भेजा गया है, ताकि गांव में किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

सरपंच ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि शराबबंदी के बाद भी यदि कोई व्यक्ति शराब या अन्य मादक पदार्थों की बिक्री में लिप्त पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उसे शासन की योजनाओं एवं खाद्यान्न जैसी सुविधाओं से वंचित करने का प्रस्ताव भेजा जाएगा।

उन्होंने कहा कि नशे का कारोबार समाज को बदनाम करता है और आने वाली पीढ़ी को अंधकार की ओर धकेलता है। ऐसे में समाज के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह इस मुहिम में सहयोग करे और गांव को नशामुक्त बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाए।

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जरहा बना नशामुक्ति की मिसाल: सरपंच के फैसले से गांव में पूर्ण शराबबंदी लागू

ब्यूरो चीफ: उमेश पाठक

रीवा। जिले के गुढ़ विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत जनपद पंचायत रायपुर कर्चुलियान की ग्राम पंचायत जरहा अब एक नई पहचान बना चुकी है। सरपंच शिवेंद्र सिंह की पहल पर यहां 1 अप्रैल 2026 से पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी गई है, जिससे यह रीवा जिले की पहली ‘शराब मुक्त’ ग्राम पंचायत बन गई है।

गौरतलब है कि इससे पहले यह पंचायत शराब, गांजा और कोरेक्स जैसे नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री के लिए बदनाम रही है। लेकिन अब सरपंच के दृढ़ संकल्प और ग्रामवासियों के सहयोग से स्थिति पूरी तरह बदलती नजर आ रही है। शराबबंदी लागू होने के बाद अवैध कारोबार करने वालों में हड़कंप मच गया है और वे दोबारा पैकारी शुरू कराने के प्रयास में जुटे हैं, हालांकि प्रशासनिक सख्ती और जनसमर्थन के चलते उनके मंसूबे फिलहाल नाकाम साबित हो रहे हैं।

सरपंच शिवेंद्र सिंह ने बताया कि गांव में ठेकेदारों द्वारा पैकारी के माध्यम से शराब और अन्य मादक पदार्थों की बिक्री करवाई जाती थी, जिससे युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में जा रही थी। इस गंभीर समस्या को देखते हुए ग्रामसभा में व्यापक चर्चा और सहमति के बाद पूर्ण शराबबंदी का निर्णय लिया गया, जिसे ग्रामीणों का भरपूर समर्थन मिला।

शराबबंदी को प्रभावी बनाने के लिए सरपंच द्वारा पुलिस अधीक्षक रीवा, एसडीएम गुढ़, थाना प्रभारी मनगवां एवं मनिकवार चौकी प्रभारी को पत्र भी भेजा गया है, ताकि गांव में किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

सरपंच ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि शराबबंदी के बाद भी यदि कोई व्यक्ति शराब या अन्य मादक पदार्थों की बिक्री में लिप्त पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उसे शासन की योजनाओं एवं खाद्यान्न जैसी सुविधाओं से वंचित करने का प्रस्ताव भेजा जाएगा।

उन्होंने कहा कि नशे का कारोबार समाज को बदनाम करता है और आने वाली पीढ़ी को अंधकार की ओर धकेलता है। ऐसे में समाज के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह इस मुहिम में सहयोग करे और गांव को नशामुक्त बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाए।

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