ब्यूरो चीफ: सुरेश सैनी
झुंझुनूं, 7 अप्रैल। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) झुंझुनूं द्वारा मंगलवार को “ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे” अभियान का भव्य शुभारंभ किया गया। इस अभिनव पहल के तहत जिलेभर के सरकारी एवं निजी विद्यालयों में न्यायिक अधिकारियों ने पहुंचकर छात्र-छात्राओं को उनके कानूनी अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक किया।
जिला एवं सेशन न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री सुनील पांचोली के नेतृत्व में प्रारंभ हुए इस फ्लैगशिप कार्यक्रम के पहले चरण में जिले के 25 विद्यालयों में लगभग 3000 विद्यार्थियों को सीधे तौर पर लाभ मिला। जिला मुख्यालय से लेकर तालुका स्तर तक नियुक्त न्यायिक अधिकारियों एवं प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारियों ने स्कूलों में पहुंचकर बच्चों के साथ संवाद स्थापित किया।
इस अभियान की विशेषता यह रही कि न्यायिक अधिकारी अदालती समय से पूर्व ही विद्यालयों में पहुंचे, जिससे न्यायिक कार्य प्रभावित नहीं हुआ। प्रत्येक स्कूल में 30 से 60 मिनट के सत्र आयोजित किए गए, जिनमें तकनीकी और जटिल कानूनी भाषा के बजाय सरल हिंदी एवं स्थानीय बोलियों का उपयोग किया गया, ताकि विद्यार्थी कानून की बारीकियों को आसानी से समझ सकें।
कार्यक्रम के दौरान एक अनूठी पहल ‘कोर्ट वाली दीदी’ के नाम से शिकायत पेटी स्थापित की गई। इस पेटी का उद्देश्य बच्चों को एक सुरक्षित और भरोसेमंद मंच उपलब्ध कराना है, जहां वे बिना किसी डर या संकोच के अपनी समस्याएं, शिकायतें या उनके साथ होने वाले किसी भी प्रकार के अन्याय की जानकारी सीधे न्यायिक तंत्र तक पहुंचा सकें। यह पहल बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
अभियान के प्रथम चरण में विद्यार्थियों को साइबर अपराधों के प्रति विशेष रूप से जागरूक किया गया। “क्लिक करने से पहले सोचो” संदेश के माध्यम से बच्चों को साइबर बुलिंग, डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन फ्रॉड तथा सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश डॉ. महेन्द्र के. सिंह सोलंकी ने बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किशोरों को साइबर सुरक्षा, पॉक्सो एक्ट एवं किशोर न्याय अधिनियम जैसे महत्वपूर्ण विषयों के प्रति संवेदनशील बनाना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में बच्चों को कानूनी जानकारी देना समय की आवश्यकता है।
इसके साथ ही डॉ. सोलंकी द्वारा जिला परिवहन विभाग एवं पुलिस यातायात विभाग के सहयोग से झुंझुनूं मुख्यालय पर संचालित बाल वाहिनियों का निरीक्षण भी किया गया। निरीक्षण के दौरान कई वाहनों में कमियां पाई गईं, जिन पर संबंधित विभाग द्वारा चालान एवं जुर्माना लगाया गया। कुछ वाहनों में प्राथमिक उपचार किट नहीं मिलने पर चेतावनी देकर छोड़ा गया।
सचिव ने बताया कि बाल वाहिनियों का नियमित निरीक्षण आवश्यक है, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और उनका भविष्य सुरक्षित रह सके।
यह अभियान न केवल बच्चों को कानूनी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक प्रभावी पहल है, बल्कि उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक और आत्मविश्वासी बनाने का भी सशक्त माध्यम बन रहा है।




