Tuesday, April 14, 2026

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अवैध खैर तस्करी का भंडाफोड़—छापे में 4 पिकअप लकड़ी जब्त, दो आरोपी गिरफ्तार

ब्यूरो रिपोर्ट: विजय द्विवेदी, धार (मध्य प्रदेश)

धार जिले के सरदारपुर वन परिक्षेत्र में वन विभाग ने अवैध खैर लकड़ी के कारोबार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई वनमंडल अधिकारी विजया नन्थम टी.आर. के कुशल मार्गदर्शन में की गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 7 अप्रैल 2026 को मुखबिर से सूचना मिली थी कि लाबरिया-चिराखान के पास लाल्याखाल क्षेत्र में एक खेत में बने मकान के भीतर अवैध रूप से खैर लकड़ी का संग्रहण कर उसकी छाल निकालने का कार्य किया जा रहा है। सूचना मिलते ही वन विभाग द्वारा तत्काल टीम गठित कर मौके पर रवाना किया गया।

वन विभाग की टीम ने शाम के समय उक्त मकान पर दबिश दी, जहां से दो व्यक्तियों को मौके पर ही पकड़ लिया गया। मौके से बड़ी मात्रा में खैर लकड़ी बरामद हुई, जिसे अन्य राज्यों में भेजने की तैयारी की जा रही थी।

पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा

गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे छतरपुर जिले के निवासी हैं और उन्हें शाहरूख एवं बादशाह नामक व्यक्तियों द्वारा पैसों का लालच देकर यहां लाया गया था। दोनों आरोपी पिछले 15 दिनों से स्थानीय ढाबे में रहकर खैर लकड़ी की छिलाई का कार्य कर रहे थे। उन्हें प्रति क्विंटल 200 से 300 रुपये मजदूरी दी जाती थी।

आरोपियों ने यह भी खुलासा किया कि इससे पहले उन्हें मुकेश नामक व्यक्ति द्वारा रतलाम और झाबुआ जिले के लाबरिया डेम क्षेत्र में भी इसी प्रकार के काम के लिए ले जाया गया था। मजदूरी का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से स्थानीय व्यापारी को किया जाता था, जो बाद में आरोपियों को नगद राशि देता था।

मुख्य आरोपी फरार, तलाश जारी

वन विभाग की टीम द्वारा शाहरूख और बादशाह की तलाश की जा रही है, जो फिलहाल फरार हैं। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि झाबुआ वन मंडल में शाहरूख के खिलाफ पहले से वन अपराध का मामला दर्ज है।

लाखों की लकड़ी जप्त

उप वनमंडल अधिकारी सुनील सुलिया ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में धार और झाबुआ के राजस्व क्षेत्रों तथा माही नदी के आसपास खैर के पेड़ों की अवैध कटाई कर उन्हें दूसरे राज्यों में भेजने की घटनाएं बढ़ी हैं, जिस पर वन विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है।

फॉरेस्ट रेंजर डॉ. शैलेन्द्र सोलंकी के अनुसार, यह कार्रवाई देर रात करीब 4 बजे तक चली, जिसमें लगभग 4 पिकअप वाहनों में भरी 50 से 60 क्विंटल खैर लकड़ी जप्त की गई। जप्त लकड़ी की अनुमानित बाजार कीमत 2 से 2.5 लाख रुपये बताई जा रही है। सभी जप्त सामग्री को वन परिक्षेत्र कार्यालय सरदारपुर लाया गया है।

आगे की कार्रवाई जारी

वन विभाग ने दोनों आरोपियों के खिलाफ वन अपराध प्रकरण दर्ज कर लिया है और उनसे पूछताछ जारी है। उनकी निशानदेही पर मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों को जल्द ही न्यायालय में पेश किया जाएगा।

टीम का सराहनीय योगदान

इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व डिप्टी रेंजर विक्रम नीनामा ने किया। कार्रवाई में अनिल हरोड़, पतल भारती, नीरज सोनी, मनीष पाल, अर्जुन राठौर, सुरेन्द्र सोलंकी, रमेश मेहड़ा एवं जुबैर खान सहित वन विभाग के अन्य कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि अवैध कटाई और तस्करी के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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अवैध खैर तस्करी का भंडाफोड़—छापे में 4 पिकअप लकड़ी जब्त, दो आरोपी गिरफ्तार

ब्यूरो रिपोर्ट: विजय द्विवेदी, धार (मध्य प्रदेश)

धार जिले के सरदारपुर वन परिक्षेत्र में वन विभाग ने अवैध खैर लकड़ी के कारोबार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई वनमंडल अधिकारी विजया नन्थम टी.आर. के कुशल मार्गदर्शन में की गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 7 अप्रैल 2026 को मुखबिर से सूचना मिली थी कि लाबरिया-चिराखान के पास लाल्याखाल क्षेत्र में एक खेत में बने मकान के भीतर अवैध रूप से खैर लकड़ी का संग्रहण कर उसकी छाल निकालने का कार्य किया जा रहा है। सूचना मिलते ही वन विभाग द्वारा तत्काल टीम गठित कर मौके पर रवाना किया गया।

वन विभाग की टीम ने शाम के समय उक्त मकान पर दबिश दी, जहां से दो व्यक्तियों को मौके पर ही पकड़ लिया गया। मौके से बड़ी मात्रा में खैर लकड़ी बरामद हुई, जिसे अन्य राज्यों में भेजने की तैयारी की जा रही थी।

पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा

गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे छतरपुर जिले के निवासी हैं और उन्हें शाहरूख एवं बादशाह नामक व्यक्तियों द्वारा पैसों का लालच देकर यहां लाया गया था। दोनों आरोपी पिछले 15 दिनों से स्थानीय ढाबे में रहकर खैर लकड़ी की छिलाई का कार्य कर रहे थे। उन्हें प्रति क्विंटल 200 से 300 रुपये मजदूरी दी जाती थी।

आरोपियों ने यह भी खुलासा किया कि इससे पहले उन्हें मुकेश नामक व्यक्ति द्वारा रतलाम और झाबुआ जिले के लाबरिया डेम क्षेत्र में भी इसी प्रकार के काम के लिए ले जाया गया था। मजदूरी का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से स्थानीय व्यापारी को किया जाता था, जो बाद में आरोपियों को नगद राशि देता था।

मुख्य आरोपी फरार, तलाश जारी

वन विभाग की टीम द्वारा शाहरूख और बादशाह की तलाश की जा रही है, जो फिलहाल फरार हैं। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि झाबुआ वन मंडल में शाहरूख के खिलाफ पहले से वन अपराध का मामला दर्ज है।

लाखों की लकड़ी जप्त

उप वनमंडल अधिकारी सुनील सुलिया ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में धार और झाबुआ के राजस्व क्षेत्रों तथा माही नदी के आसपास खैर के पेड़ों की अवैध कटाई कर उन्हें दूसरे राज्यों में भेजने की घटनाएं बढ़ी हैं, जिस पर वन विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है।

फॉरेस्ट रेंजर डॉ. शैलेन्द्र सोलंकी के अनुसार, यह कार्रवाई देर रात करीब 4 बजे तक चली, जिसमें लगभग 4 पिकअप वाहनों में भरी 50 से 60 क्विंटल खैर लकड़ी जप्त की गई। जप्त लकड़ी की अनुमानित बाजार कीमत 2 से 2.5 लाख रुपये बताई जा रही है। सभी जप्त सामग्री को वन परिक्षेत्र कार्यालय सरदारपुर लाया गया है।

आगे की कार्रवाई जारी

वन विभाग ने दोनों आरोपियों के खिलाफ वन अपराध प्रकरण दर्ज कर लिया है और उनसे पूछताछ जारी है। उनकी निशानदेही पर मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों को जल्द ही न्यायालय में पेश किया जाएगा।

टीम का सराहनीय योगदान

इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व डिप्टी रेंजर विक्रम नीनामा ने किया। कार्रवाई में अनिल हरोड़, पतल भारती, नीरज सोनी, मनीष पाल, अर्जुन राठौर, सुरेन्द्र सोलंकी, रमेश मेहड़ा एवं जुबैर खान सहित वन विभाग के अन्य कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि अवैध कटाई और तस्करी के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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