Thursday, April 9, 2026

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बठिंडा में छोटी बीमारी, बड़ा रेफर! मौड़ मंडी अस्पताल की हालत पर सवाल।  

जिला ब्यूरों: समदीप सिंह वड़ैच

बठिंडा जिले के मौड़ मंडी क्षेत्र में स्थित सरकारी अस्पताल की हालत इन दिनों बेहद चिंताजनक बनी हुई है। स्थानीय लोगों और मरीजों के अनुसार अस्पताल में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी है, जिसके कारण मरीजों को छोटी-छोटी बीमारियों में भी दूसरे अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी सबसे बड़ी समस्या बनकर सामने आ रही है। मरीजों का आरोप है कि कान (ईएनटी) जैसे सामान्य इलाज के लिए भी डॉक्टर मरीजों को तुरंत बड़े अस्पतालों में भेज देते हैं। इतना ही नहीं, कई बार मरीजों की परची (पंजीकरण) काटने के बाद भी उन्हें उचित इलाज नहीं मिलता।

जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में पहले भी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को लेकर सवाल उठते रहे हैं। एक रिपोर्ट में बताया गया था कि मौड़ मंडी के सरकारी अस्पताल में सीमित स्टाफ और संसाधनों के कारण गंभीर मरीजों को संभालना मुश्किल हो जाता है और उन्हें अन्य शहरों में भेजना पड़ता है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि अस्पताल में न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं और न ही जरूरी उपकरण। ऐसे में गरीब मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जिससे उनका आर्थिक बोझ बढ़ जाता है।

लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि अस्पताल में डॉक्टरों की नियुक्ति बढ़ाई जाए, आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं और मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर इलाज दिया जाए।

मुख्य समस्याएं:

  • डॉक्टरों और स्टाफ की कमी
  • मामूली बीमारियों में भी मरीजों को रेफर करना
  • इलाज से पहले ही परची काटकर औपचारिकता पूरी करना
  • उपकरण और सुविधाओं का अभाव

जनता की मांग:

  • विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती
  • अस्पताल में आधुनिक सुविधाएं
  • रेफर सिस्टम पर निगरानी
  • स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं

यदि जल्द सुधार नहीं हुआ, तो क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूसरे शहरों पर निर्भर रहना पड़ेगा, जिससे समय और धन दोनों की हानि होगी।

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बठिंडा में छोटी बीमारी, बड़ा रेफर! मौड़ मंडी अस्पताल की हालत पर सवाल।  

जिला ब्यूरों: समदीप सिंह वड़ैच

बठिंडा जिले के मौड़ मंडी क्षेत्र में स्थित सरकारी अस्पताल की हालत इन दिनों बेहद चिंताजनक बनी हुई है। स्थानीय लोगों और मरीजों के अनुसार अस्पताल में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी है, जिसके कारण मरीजों को छोटी-छोटी बीमारियों में भी दूसरे अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी सबसे बड़ी समस्या बनकर सामने आ रही है। मरीजों का आरोप है कि कान (ईएनटी) जैसे सामान्य इलाज के लिए भी डॉक्टर मरीजों को तुरंत बड़े अस्पतालों में भेज देते हैं। इतना ही नहीं, कई बार मरीजों की परची (पंजीकरण) काटने के बाद भी उन्हें उचित इलाज नहीं मिलता।

जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में पहले भी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को लेकर सवाल उठते रहे हैं। एक रिपोर्ट में बताया गया था कि मौड़ मंडी के सरकारी अस्पताल में सीमित स्टाफ और संसाधनों के कारण गंभीर मरीजों को संभालना मुश्किल हो जाता है और उन्हें अन्य शहरों में भेजना पड़ता है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि अस्पताल में न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं और न ही जरूरी उपकरण। ऐसे में गरीब मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जिससे उनका आर्थिक बोझ बढ़ जाता है।

लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि अस्पताल में डॉक्टरों की नियुक्ति बढ़ाई जाए, आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं और मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर इलाज दिया जाए।

मुख्य समस्याएं:

  • डॉक्टरों और स्टाफ की कमी
  • मामूली बीमारियों में भी मरीजों को रेफर करना
  • इलाज से पहले ही परची काटकर औपचारिकता पूरी करना
  • उपकरण और सुविधाओं का अभाव

जनता की मांग:

  • विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती
  • अस्पताल में आधुनिक सुविधाएं
  • रेफर सिस्टम पर निगरानी
  • स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं

यदि जल्द सुधार नहीं हुआ, तो क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूसरे शहरों पर निर्भर रहना पड़ेगा, जिससे समय और धन दोनों की हानि होगी।

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