Wednesday, March 4, 2026

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बड़वाह के अंकित परिहार बने सफल फूड प्रोसेसिंग उद्यमी, ‘आईजी गुलकंद’ की देशभर में पहचान

ब्यूरो चीफ: आशाराम कुंडले, खरगोन म. प्र.

बड़वाह के अंकित परिहार बने सफल फूड प्रोसेसिंग उद्यमी आईजी गुलकंद की देश भर में पहचान। खरगोन जिले के बड़वाह विकास खंड के ग्राम नांदिया के युवा अंकित परिहार ने खेती और खाद्य प्रसंस्करण को जोड़कर सफलता की नई कहानी लिखी है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के तहत मिली सहायता से उन्होंने परिहार फूड इंडस्ट्रीज की स्थापना की और आईजी गुलकंद ब्रांड को बाजार में पहचान दिलाई।

अंकित परिहार को HDFC बैंक के माध्यम से ₹4,46,000 का ऋण और ₹1,73,000 की सब्सिडी प्राप्त हुई। इस सहयोग से उन्होंने अपनी गुलकंद उत्पादन इकाई को सशक्त बनाया। वे स्वयं सुगंधित अजमेरी गुलाब की खेती करते हैं और आसपास के किसानों से भी गुलाब खरीदकर उन्हें उचित मूल्य उपलब्ध कराते हैं।

वर्तमान में उनकी इकाई में प्रतिमाह लगभग 12 टन गुलकंद का उत्पादन हो रहा है जिसका बाजार मूल्य करीब ₹7,2000 है। सभी खर्चों के बाद उन्हें लगभग ₹80,000 प्रतिमाह का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है। इस उद्योग से 12 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार भी मिला है। निमाड़ क्षेत्र से शुरू हुआ आईजी गुलकंद अब राजस्थान और महाराष्ट्र तक पहुंच चुका है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। राज्यबजट 2026 से 27 में इस योजना के लिए ₹200 करोड़ का प्रावधान किया गया है। जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 18% अधिक है। योजना के तहत ₹1 लाख तक की इकाई पर 35%अनुदान और 3% ब्याज माफी का प्रावधान है। अंकित परिहार की सफलता यह साबित करती है कि यदि किसान खेती के साथ प्रसंस्करण और ब्रांडिंग अपनाएं तो आय बढ़ाने के साथ रोजगार के नए अवसर भी सजित किए जा सकतेहैं।

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बड़वाह के अंकित परिहार बने सफल फूड प्रोसेसिंग उद्यमी, ‘आईजी गुलकंद’ की देशभर में पहचान

ब्यूरो चीफ: आशाराम कुंडले, खरगोन म. प्र.

बड़वाह के अंकित परिहार बने सफल फूड प्रोसेसिंग उद्यमी आईजी गुलकंद की देश भर में पहचान। खरगोन जिले के बड़वाह विकास खंड के ग्राम नांदिया के युवा अंकित परिहार ने खेती और खाद्य प्रसंस्करण को जोड़कर सफलता की नई कहानी लिखी है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के तहत मिली सहायता से उन्होंने परिहार फूड इंडस्ट्रीज की स्थापना की और आईजी गुलकंद ब्रांड को बाजार में पहचान दिलाई।

अंकित परिहार को HDFC बैंक के माध्यम से ₹4,46,000 का ऋण और ₹1,73,000 की सब्सिडी प्राप्त हुई। इस सहयोग से उन्होंने अपनी गुलकंद उत्पादन इकाई को सशक्त बनाया। वे स्वयं सुगंधित अजमेरी गुलाब की खेती करते हैं और आसपास के किसानों से भी गुलाब खरीदकर उन्हें उचित मूल्य उपलब्ध कराते हैं।

वर्तमान में उनकी इकाई में प्रतिमाह लगभग 12 टन गुलकंद का उत्पादन हो रहा है जिसका बाजार मूल्य करीब ₹7,2000 है। सभी खर्चों के बाद उन्हें लगभग ₹80,000 प्रतिमाह का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है। इस उद्योग से 12 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार भी मिला है। निमाड़ क्षेत्र से शुरू हुआ आईजी गुलकंद अब राजस्थान और महाराष्ट्र तक पहुंच चुका है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। राज्यबजट 2026 से 27 में इस योजना के लिए ₹200 करोड़ का प्रावधान किया गया है। जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 18% अधिक है। योजना के तहत ₹1 लाख तक की इकाई पर 35%अनुदान और 3% ब्याज माफी का प्रावधान है। अंकित परिहार की सफलता यह साबित करती है कि यदि किसान खेती के साथ प्रसंस्करण और ब्रांडिंग अपनाएं तो आय बढ़ाने के साथ रोजगार के नए अवसर भी सजित किए जा सकतेहैं।

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