Friday, April 3, 2026

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बेमौसम बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है— देथा गाँव के लोगों खेतों में हवन किया और मदद की माँग की

संवादाता: जोरा सोलंकी

धनेरा तालुका के देथा गाँव में बेमौसम बारिश के कारण किसानों की हालत बेहद खराब हो गई है। बारिश, बाढ़ और तूफ़ान के चलते इस साल तीसरी बार किसान प्रकृति के आगे बेबस हो गए हैं। खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान के कारण उनके मुँह में बचा हुआ खाना भी छिन गया है।गाँव के किसानों का कहना है कि खेत में बोई गई मूंगफली का एक भी दाना अच्छा नहीं हुआ है। देथा गाँव की लगभग 2000 विधा ज़मीन सिंचित थी, जिसमें से 1800 विधा ज़मीन बेमौसम बारिश से बर्बाद हो गई है। खेतों के दृश्य बता रहे हैं कि नुकसान कितना बड़ा है।

तीन दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इसलिए आज देथा गाँव के किसानों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर खेत में हवन किया और सरकार से “उन्हें सद्बुद्धि” देने की प्रार्थना की। किसानों की माँग है कि तुरंत सर्वेक्षण कराया जाए और नुकसान की भरपाई के लिए सहायता राशि दी जाए।किसानों का कहना है कि वे ज़मीन इकट्ठा करके खेती कर रहे थे, लेकिन कुदरत की मार से उन्हें लाखों का नुकसान हुआ है। धानेरा और डीसा समेत कई तालुकाओं में इस समय फसलों को भारी नुकसान हुआ है। कुदरत रूठ गई है, अब सरकार मदद करे तो ही किसान फिर से खड़े हो पाएँगे, वरना किसानों की किस्मत ही रोने को मजबूर हो जाएगी।

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बेमौसम बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है— देथा गाँव के लोगों खेतों में हवन किया और मदद की माँग की

संवादाता: जोरा सोलंकी

धनेरा तालुका के देथा गाँव में बेमौसम बारिश के कारण किसानों की हालत बेहद खराब हो गई है। बारिश, बाढ़ और तूफ़ान के चलते इस साल तीसरी बार किसान प्रकृति के आगे बेबस हो गए हैं। खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान के कारण उनके मुँह में बचा हुआ खाना भी छिन गया है।गाँव के किसानों का कहना है कि खेत में बोई गई मूंगफली का एक भी दाना अच्छा नहीं हुआ है। देथा गाँव की लगभग 2000 विधा ज़मीन सिंचित थी, जिसमें से 1800 विधा ज़मीन बेमौसम बारिश से बर्बाद हो गई है। खेतों के दृश्य बता रहे हैं कि नुकसान कितना बड़ा है।

तीन दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इसलिए आज देथा गाँव के किसानों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर खेत में हवन किया और सरकार से “उन्हें सद्बुद्धि” देने की प्रार्थना की। किसानों की माँग है कि तुरंत सर्वेक्षण कराया जाए और नुकसान की भरपाई के लिए सहायता राशि दी जाए।किसानों का कहना है कि वे ज़मीन इकट्ठा करके खेती कर रहे थे, लेकिन कुदरत की मार से उन्हें लाखों का नुकसान हुआ है। धानेरा और डीसा समेत कई तालुकाओं में इस समय फसलों को भारी नुकसान हुआ है। कुदरत रूठ गई है, अब सरकार मदद करे तो ही किसान फिर से खड़े हो पाएँगे, वरना किसानों की किस्मत ही रोने को मजबूर हो जाएगी।

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