Monday, March 9, 2026

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कौवापुर गैस एजेंसी पर हंगामा, सिलेंडर की कमी से भड़के उपभोक्ता

ब्यूरो रिपोर्ट: रामजनम तिवारी, बलरामपुर (उत्तर प्रदेश)

तुलसीपुर (बलरामपुर)।
जनपद बलरामपुर की तहसील तुलसीपुर के अंतर्गत कौवापुर बाजार स्थित गैस एजेंसी पर रविवार को बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं की भीड़ उमड़ पड़ी। गैस सिलेंडर न मिलने से नाराज उपभोक्ताओं ने एजेंसी संचालक पर कालाबाजारी का गंभीर आरोप लगाया है।

उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें गैस सिलेंडर के लिए एक सप्ताह से अधिक समय से इंतजार करना पड़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। लोगों का आरोप है कि जब एजेंसी पर सिलेंडर आता भी है तो उसे आम उपभोक्ताओं को देने के बजाय ब्लैक में बेच दिया जाता है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि गैस की किल्लत के कारण घरेलू कामकाज प्रभावित हो रहा है। कई परिवारों को खाना बनाने में भी दिक्कतें हो रही हैं। उपभोक्ताओं ने प्रशासन से मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है।

लोगों का कहना है कि अगर इसी तरह जनता को परेशान होना पड़ा तो उत्तर प्रदेश को “उत्तम प्रदेश” बनाने का सपना अधूरा ही रह जाएगा।

अब देखने वाली बात यह होगी कि जिले के संबंधित अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और एजेंसी संचालक के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

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कौवापुर गैस एजेंसी पर हंगामा, सिलेंडर की कमी से भड़के उपभोक्ता

ब्यूरो रिपोर्ट: रामजनम तिवारी, बलरामपुर (उत्तर प्रदेश)

तुलसीपुर (बलरामपुर)।
जनपद बलरामपुर की तहसील तुलसीपुर के अंतर्गत कौवापुर बाजार स्थित गैस एजेंसी पर रविवार को बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं की भीड़ उमड़ पड़ी। गैस सिलेंडर न मिलने से नाराज उपभोक्ताओं ने एजेंसी संचालक पर कालाबाजारी का गंभीर आरोप लगाया है।

उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें गैस सिलेंडर के लिए एक सप्ताह से अधिक समय से इंतजार करना पड़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। लोगों का आरोप है कि जब एजेंसी पर सिलेंडर आता भी है तो उसे आम उपभोक्ताओं को देने के बजाय ब्लैक में बेच दिया जाता है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि गैस की किल्लत के कारण घरेलू कामकाज प्रभावित हो रहा है। कई परिवारों को खाना बनाने में भी दिक्कतें हो रही हैं। उपभोक्ताओं ने प्रशासन से मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है।

लोगों का कहना है कि अगर इसी तरह जनता को परेशान होना पड़ा तो उत्तर प्रदेश को “उत्तम प्रदेश” बनाने का सपना अधूरा ही रह जाएगा।

अब देखने वाली बात यह होगी कि जिले के संबंधित अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और एजेंसी संचालक के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

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