जिला ब्यूरो : नागेश प्रजापत छोटी सादड़ी, राजस्थान |
छोटीसादड़ी। सरकार भले ही स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे करती हो, लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। छोटीसादड़ी के जयचंद मोहिल राजकीय उपजिला चिकित्सालय में मंगलवार को स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खुलती नजर आई। अस्पताल में करीब एक घंटे तक डॉक्टर के मौजूद नहीं रहने से मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इलाज के इंतजार में मरीजों की लंबी कतार लग गई, वहीं कई मरीज और उनके परिजन अस्पताल के फर्श पर बैठकर डॉक्टर के आने का इंतजार करते रहे। मरीजों के अनुसार सुबह ओपीडी के समय बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंचे, लेकिन डॉक्टर के नहीं मिलने से उपचार की प्रक्रिया ठप हो गई। करीब एक घंटे तक चिकित्सक अस्पताल से गायब रहे, जिससे मरीजों में नाराजगी बढ़ती गई। मरीजों के परिजनों का कहना है कि अस्पताल में अव्यवस्थाएं लंबे समय से बनी हुई हैं। समय पर डॉक्टर नहीं मिलते, जिससे मरीजों को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई बार मजबूरी में मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि अस्पताल में डॉक्टरों की अनुपस्थिति और व्यवस्थाओं की कमी के कारण मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में बैठने की पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं है, जिसके कारण कई मरीजों को फर्श पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। मरीजों और परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग से अस्पताल की व्यवस्थाएं सुधारने और डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।
नई सोनोग्राफी मशीन आने के बावजूद शुरू नहीं हुई सुविधा, गर्भवती महिलाओं को जाना पड़ रहा दूसरे शहर
छोटीसादड़ी के राजकीय उपजिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति यह है कि अस्पताल में नई सोनोग्राफी मशीन तो लगा दी गई है, लेकिन अभी तक उसे शुरू नहीं किया गया है। इसके कारण मरीजों को इस सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। सोनोग्राफी की सुविधा शुरू नहीं होने से खासतौर पर गर्भवती महिलाओं को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। जांच करवाने के लिए उन्हें नीमच, निंबाहेड़ा, प्रतापगढ़ सहित अन्य जिलों में जाना पड़ रहा है। इसके चलते मरीजों को आर्थिक खर्च के साथ-साथ बार-बार भागदौड़ भी करनी पड़ती है।
गर्भवती महिलाओं का कहना है कि अस्पताल में मशीन आने के बाद भी उसका उपयोग शुरू नहीं होना स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को दर्शाता है। यदि अस्पताल में ही सोनोग्राफी की सुविधा शुरू हो जाए तो क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं और अन्य मरीजों को बड़ी राहत मिल सकती है। लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से जल्द से जल्द सोनोग्राफी मशीन शुरू करवाने की मांग की है, ताकि मरीजों को अन्य शहरों में जाकर जांच करवाने की मजबूरी से राहत मिल सके।
एक चेंबर में बैठते हैं कई डॉक्टर, मरीजों को करना पड़ता इंतजार

छोटीसादड़ी के जयचंद मोहिल राजकीय उप जिला चिकित्सालय में व्यवस्थाओं को लेकर एक और समस्या सामने आती है। अस्पताल में अक्सर यह देखा जाता है कि कई बार अलग-अलग चेंबर में बैठकर मरीजों को देखने के बजाय सभी डॉक्टर एक ही चिकित्सक के चेंबर में बैठे रहते हैं। इसके चलते मरीजों को यह समझ नहीं आ पाता कि किस डॉक्टर को दिखाना है। कई बार ओपीडी में मरीज अपने नंबर का इंतजार करते रहते हैं, जबकि अन्य चेंबर खाली पड़े रहते हैं। इससे मरीजों की कतार लंबी होती जाती है और इलाज में अनावश्यक देरी होती है।
मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि यदि सभी डॉक्टर अपने-अपने चेंबर में बैठकर मरीजों को देखें तो भीड़ कम हो सकती है और मरीजों को समय पर इलाज मिल सकता है। लोगों ने अस्पताल प्रशासन से व्यवस्था सुधारने और ओपीडी संचालन को व्यवस्थित करने की मांग की है।
एक ही डॉक्टर के पास दो-दो जिम्मेदारियां, कैसे सुधरेगी चिकित्सा व्यवस्था
छोटीसादड़ी के जयचंद मोहिल राजकीय उप जिला चिकित्सालय में चिकित्सा व्यवस्थाएं सीमित संसाधनों के बीच चल रही हैं। अस्पताल में बीसीएमओ और सीएचसी प्रभारी दोनों का चार्ज एक ही डॉक्टर, डॉ. विजय गर्ग के पास होने से व्यवस्थाओं पर असर पड़ रहा है। एक साथ दो महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होने के कारण अस्पताल की व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संभालना चुनौती बनता जा रहा है। अस्पताल में वर्तमान में केवल छह डॉक्टर ही कार्यरत हैं, जिनमें डॉ. विजय गर्ग, डॉ. संजय गुप्ता, डॉ. सत्यनारायण पाटीदार, डॉ. अमित शर्मा, डॉ. कुलदीप पचौरी और एक चिकित्सक शामिल हैं। इतने कम चिकित्सकों के भरोसे पूरे उप जिला चिकित्सालय की चिकित्सा व्यवस्था संचालित हो रही है।
यह अस्पताल आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के लिए प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है, जहां दूर-दराज के गांवों से बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। लेकिन डॉक्टरों की कमी की वजह से कई बार मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। स्थिति यह है कि कई बार अस्पताल में मरीजों को डॉक्टर नहीं मिलने से घंटों इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में क्षेत्र के लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से अस्पताल में चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने की मांग की है।




