ब्यूरो रिपोर्ट: रामजनम तिवारी, बलरामपुर
गांव के दुर्गा माता मंदिर परिसर में आयोजित चार दिवसीय यजुर्वेदीय पारायण महायज्ञ का समापन पूर्णाहुति के साथ श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर यज्ञ ब्रह्मा आचार्य अखिलेश मेधावी ने वेद मंत्रों की आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक व्याख्या करते हुए कहा कि सनातन वैदिक धर्म सृष्टि के आरंभ से चला आ रहा शाश्वत धर्म है, जबकि अन्य पंथ और मत समय-समय पर व्यक्तियों द्वारा स्थापित किए गए हैं।
महायज्ञ के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, गायत्री मंत्र और आहुति के माध्यम से विश्व शांति, मानव कल्याण और समृद्धि की कामना की गई। पूरे आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता और भाईचारे की अनूठी मिसाल देखने को मिली। कार्यक्रम में हिंदू समाज के साथ-साथ मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया और सांप्रदायिक भेदभाव से ऊपर उठकर पहले इंसान बनने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर ग्राम झौव्वा के प्रतिष्ठित व्यवसायी जहीर खान ने भी महायज्ञ में भाग लिया। उन्होंने यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार धारण कर वैदिक विधि से गायत्री मंत्र के साथ आहुति दी और समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव और एकता का संदेश दिया। शुद्धि संस्कार के पश्चात उनका नाम ‘जगत आर्य’ रखा गया, जिसे उपस्थित श्रद्धालुओं ने सराहा।
कार्यक्रम में आर्यवीर दल उत्तर प्रदेश के प्रचार मंत्री आर्य अशोक तिवारी ने अस्वस्थता के चलते डिजिटल माध्यम से गीत के जरिए संबोधन दिया। उनके देशभक्ति से ओतप्रोत गीत—“प्यारे जहीर खान का वैदिक धर्म में स्वागत है, घर वापसी का चलाओ अभियान है”—ने उपस्थित लोगों में उत्साह का संचार किया। इसके बाद अपने संदेश में उन्होंने कहा कि आर्यवीर दल देशभर में युवाओं को शस्त्र और शास्त्र दोनों का प्रशिक्षण देकर राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित कर रहा है। साथ ही यज्ञ, भजन और प्रवचन के माध्यम से वैदिक संस्कृति का प्रचार-प्रसार करते हुए ‘घर वापसी’ अभियान को भी आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत बलरामपुर जनपद सहित उत्तर प्रदेश में हजारों लोग वैदिक धर्म को अपना चुके हैं।
कार्यक्रम संयोजक मनोज आर्य ने अपनी टीम के साथ सभी अतिथियों का ओम पगड़ी पहनाकर स्वागत किया। आयोजन के दौरान विभिन्न गांवों से आए श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया और धार्मिक अनुष्ठान में अपनी आस्था व्यक्त की।
आयोजकों ने बताया कि यह चार दिवसीय महायज्ञ क्षेत्र में शांति, समृद्धि और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के सफल आयोजन ने यह संदेश दिया कि धर्म का मूल उद्देश्य मानवता, प्रेम और सद्भाव को बढ़ावा देना है।




