Friday, April 10, 2026

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तामिया में स्कूल की छत उड़ी, भ्रष्टाचार की भेंट चढ़े टीन शेड, बड़ा हादसा टला

ब्यूरो रिपोर्ट: ज्ञानेंद्र इंदौरकर

तामिया/छिंदवाड़ा। छिंदवाड़ा जिले के तामिया विकासखंड अंतर्गत शासकीय विद्यालयों में किए गए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम खापासानी के चैतूढाना स्थित एक स्कूल में तेज आंधी और मूसलाधार बारिश के चलते टीन शेड पूरी तरह उड़ गया। इस घटना ने निर्माण कार्य में संभावित लापरवाही और भ्रष्टाचार की आशंकाओं को और गहरा कर दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार दोपहर के समय अचानक मौसम ने करवट ली और तेज हवाओं के साथ भारी बारिश शुरू हो गई। देखते ही देखते तेज तूफान ने स्कूल परिसर में लगे टीन शेड को उखाड़ फेंका। शेड हवा में उड़कर कुछ दूरी पर जा गिरा, जिससे परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश से बचाव के लिए लगाए गए ये टीन शेड पहली ही तेज आंधी में धराशायी हो गए, जो निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है।

गनीमत यह रही कि घटना के समय स्कूल में बच्चे मौजूद नहीं थे, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। यदि उस समय कक्षाएं संचालित हो रही होतीं, तो बच्चों और शिक्षकों की जान को गंभीर खतरा हो सकता था। इस घटना ने स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

टीन शेड उड़ने के कारण स्कूल के महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बारिश में भीगकर खराब हो गए, जिससे शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हुए हैं। घटना के बाद स्कूल भवन की स्थिति भी जर्जर हो गई है, जिससे वहां नियमित पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो गया है। अभिभावकों और ग्रामीणों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में भारी लापरवाही और कमीशनखोरी के चलते घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य गुणवत्ता के मानकों के अनुरूप किया गया होता, तो इतनी आसानी से टीन शेड नहीं उड़ता।

स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से रानीकछार, पोंडीखेड़ा, चैतूढाना सहित आसपास के सभी स्कूलों में लगे टीन शेड की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की है।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेते हुए जांच कराता है और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है। फिलहाल इस घटना ने सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

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तामिया में स्कूल की छत उड़ी, भ्रष्टाचार की भेंट चढ़े टीन शेड, बड़ा हादसा टला

ब्यूरो रिपोर्ट: ज्ञानेंद्र इंदौरकर

तामिया/छिंदवाड़ा। छिंदवाड़ा जिले के तामिया विकासखंड अंतर्गत शासकीय विद्यालयों में किए गए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम खापासानी के चैतूढाना स्थित एक स्कूल में तेज आंधी और मूसलाधार बारिश के चलते टीन शेड पूरी तरह उड़ गया। इस घटना ने निर्माण कार्य में संभावित लापरवाही और भ्रष्टाचार की आशंकाओं को और गहरा कर दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार दोपहर के समय अचानक मौसम ने करवट ली और तेज हवाओं के साथ भारी बारिश शुरू हो गई। देखते ही देखते तेज तूफान ने स्कूल परिसर में लगे टीन शेड को उखाड़ फेंका। शेड हवा में उड़कर कुछ दूरी पर जा गिरा, जिससे परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश से बचाव के लिए लगाए गए ये टीन शेड पहली ही तेज आंधी में धराशायी हो गए, जो निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है।

गनीमत यह रही कि घटना के समय स्कूल में बच्चे मौजूद नहीं थे, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। यदि उस समय कक्षाएं संचालित हो रही होतीं, तो बच्चों और शिक्षकों की जान को गंभीर खतरा हो सकता था। इस घटना ने स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

टीन शेड उड़ने के कारण स्कूल के महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बारिश में भीगकर खराब हो गए, जिससे शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हुए हैं। घटना के बाद स्कूल भवन की स्थिति भी जर्जर हो गई है, जिससे वहां नियमित पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो गया है। अभिभावकों और ग्रामीणों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में भारी लापरवाही और कमीशनखोरी के चलते घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य गुणवत्ता के मानकों के अनुरूप किया गया होता, तो इतनी आसानी से टीन शेड नहीं उड़ता।

स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से रानीकछार, पोंडीखेड़ा, चैतूढाना सहित आसपास के सभी स्कूलों में लगे टीन शेड की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की है।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेते हुए जांच कराता है और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है। फिलहाल इस घटना ने सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

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