जिला ब्यूरो इमरान खान, सिरोही
सिरोही। राजस्थान का शत्रुंजय श्री आबु तीर्थ की प्राचीन तलेटी पर बने ’’ संघवी भेरूतारक धाम तीर्थ ’’ में त्रिदिवसीय रजत महोत्सव शुक्रवार को 26 वीं ध्वजा फहराने के साथ धूमधाम से सम्पन्न हुआ। अर्बुदगिरी पहाडो के नीचे तलेटी में यह तीर्थ धाम संघवी भेरमल हकमाजी बाफना परिवार मालगांव ने 25 वर्ष पूर्व दीक्षा दानेश्वरी आचार्य भगवंत श्री गुणरत्नसूरीजी की प्रेरणा से बनाया था। इस तलेटी से जैन धर्म के अनुयायी एवं साधु-साध्वियां पैदल विहार कर विश्व विख्यात प्राचीन जैन तीर्थ आबू-देलवाडा-अचलगढ की यात्रा करते हैं।
शुक्रवार को सवेरे आचार्य भगवंत रविरत्नसूरीजी, रश्मिरत्नसूरी, उदयवल्लभसूरीजी, ह्रदयवल्लभसूरीजी, संयमरत्नसूरीजी एवं जयेशरत्नसूरीजी एवं 100 से अधिक साधु-साध्वियों के साथ चर्तुविद संघ ने गाजते-बाजते ध्वजा का वरघोडा निकाला गया ओर ध्वजा लेकर भक्तगण मंदिर पहुंचे। भगवान श्री अर्बुदगिरी सहस्त्रफणा पार्श्वनाथ मंदिर में विधि विधान के साथ ध्वजा की पूजा अर्चना एवं सत्तर भेदी पूजा पढाई गई। ध्वजा पर आचार्य भगवंतो ने वाक्षेप डाला ओर फिर ध्वजा फहराने के लिए तीर्थ संस्थापक परिवार के संघवी मोहनभाई, ललितभाई एवं अन्य परिवारजनो ने ध्वजा लेकर 3 प्रदक्षिणा दी। शुभ मुर्हुत में ओमपुण्यांम-पुण्यांम-प्रियमताम-प्रियमताम के मंत्रोचारण व ढोल ढमाको के साथ 26 वीं ध्वजा फहराई गई।
ध्वजारोहण समारोह में सिरोही के पूर्व विधायक संयम लोढा, पावापुरी तीर्थ के संस्थापक कीर्तिभाई संघवी, जीरावला ट्रस्ट के ट्रस्टी दिनेश दोशी, खुशाल भाई, हीराचंद कांकरिया, किशोर गांधी, पावापुरी ट्रस्ट के मेनेजिंग ट्रस्टी महावीर जैन, नवलमल तातेड, रमणलाल एन. संघवी, दिनेश बाफना, दांतराई के प्रकाश भाई एस जैन, विमल जैन, जयंतीलाल कटारिया, भंवरभाई कटारिया सहित आबुगोड समाज के सिरोडी, कृष्णगंज, वैलागंरी, अनादरा, रेवदर, भटाना, मंडार, आबुरोड, दांतराई, निम्बज, मालगांव, पामेरा, पोसिंतरा, आमलारी, मडिया, मारोल एवं सिरोही जैन समाज के अनेक प्रमुख समाज बन्धु उपस्थित थें।
ध्वजारोहण के बाद प्रवचन मंडप में आचार्यश्री उदयवल्लभसूरीजी ने हित शिक्षा देते हुऐ कहा कि हमें विरासत में जो तीर्थ एवं वैभव मिला है उसे हमें परमात्मा के बताये गये मार्ग पर चलते हुऐ संरक्षित करना हैं ओर उन तीर्थो में जाउजलाली बनी रहे उसके लिए समर्पित भाव से कार्य करना हैं। आचार्य रविरत्नसूरीजी ने कहा कि विश्व में जैन धर्म एक विशिष्ठ धर्म हैं, यह धर्म जीओ ओर जीने दो एवं अंहिसा परमोधर्म की भावना के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता हैं। आचार्य रश्मिरत्नसूरी ने कहा कि जैन धर्म में त्याग एवं तपस्या का विशेष स्थान हैं इसी कारण इस धर्म में तपस्या का बडा महत्व हैं। भेरूतारक धाम किन कारणो से बना पर विस्तार से प्रकाश डालते हुऐ कहा कि पूज्य गुरूदेव गुणरत्नसूरीजी की भावना पर इस तीर्थ का निर्माण करवाकर संघवी भेरमलजी हकमाजी बाफना परिवार ने पुण्यबन्दी पुण्य अर्जित किया हैं। इस परिवार ने तीर्थ निर्माण, तीर्थ दर्शन, पैदल संघ, चातुर्मास, उपधान के साथ-साथ संयमग्रहण के क्षेत्र में जो मिसाल कायम की है वो बेमिसाल हैं। आचार्य जयेशरत्नसूरीजी ने बडी शांति का पाठ करवाकर सभी के कल्याण की भावना व्यक्त की।
तीर्थ संस्थापक परिवार के मोहनभाई, ललितभाई एवं धनेशभाई संघवी ने रजत महोत्सव को सफल बनाने एवं बडी संख्या में भक्तजनों के पधारने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुऐ कहा कि इससे उनके परिवार को बडा बल मिला। तीर्थ के सचिव अशोक एस. चौहान ने कहा कि संघवी परिवार की उदारता एवं इच्छाशक्ति के कारण 25 वर्ष की यात्रा को आज ताजा कर दिया। उपस्थित समाज बन्धुओं ने तीर्थ संस्थापक संघवी भेरमल एवं स्व. ताराचंद बी. संघवी की उदारता, सरलता, सहजता एवं अपनत्व को याद करते हुऐ कहा कि भेरमलजी एवं ताराचंदजी आबुगोड समाज के चमकते हुऐ ’’ हीरे ’’ थें।




