Friday, April 10, 2026

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रणथंभौर में वन विभाग की बड़ी कामयाबी: रेस्क्यू के बाद पैंथर शावक को नई जिंदगी!

ब्यूरो चीफ: बृजेश त्रिवेदी

सवाई माधोपुर, 5 अप्रैल।
रणथंभौर टाइगर रिजर्व क्षेत्र के कुशालीपुरा रेंज में वन विभाग की रेस्क्यू टीम ने एक मादा पैंथर शावक का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर उपचार के बाद पुनः सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ दिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार करीब 6 माह की मादा पैंथर शावक अपनी मां से बिछड़ गई थी, जिसके चलते वह डिहाइड्रेशन की गंभीर स्थिति में मिली। रेस्क्यू टीम के सदस्य जसकरण मीणा ने तत्परता दिखाते हुए शावक को सुरक्षित रेस्क्यू कर रणथंभौर स्थित वन्यजीव चिकित्सालय पहुंचाया।

उप वन संरक्षक मानस सिंह के निर्देशन में शावक का उपचार किया गया। उप निदेशक (पशु चिकित्सा) डॉ. चंद्र प्रकाश मीणा ने बताया कि शावक को फ्लूड थेरेपी, ऑक्सीजन थेरेपी तथा जीवन रक्षक दवाइयों के माध्यम से उपचारित किया गया, जिससे उसकी स्थिति में तेजी से सुधार हुआ।

स्वास्थ्य लाभ मिलने के बाद मादा शावक को सावधानीपूर्वक उसकी मां के संभावित क्षेत्र (टेरिटरी) में छोड़ दिया गया, ताकि वह प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षित रह सके।

वन विभाग की इस त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई से एक दुर्लभ वन्यजीव का जीवन बचाया जा सका, जो वन्यजीव संरक्षण के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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रणथंभौर में वन विभाग की बड़ी कामयाबी: रेस्क्यू के बाद पैंथर शावक को नई जिंदगी!

ब्यूरो चीफ: बृजेश त्रिवेदी

सवाई माधोपुर, 5 अप्रैल।
रणथंभौर टाइगर रिजर्व क्षेत्र के कुशालीपुरा रेंज में वन विभाग की रेस्क्यू टीम ने एक मादा पैंथर शावक का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर उपचार के बाद पुनः सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ दिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार करीब 6 माह की मादा पैंथर शावक अपनी मां से बिछड़ गई थी, जिसके चलते वह डिहाइड्रेशन की गंभीर स्थिति में मिली। रेस्क्यू टीम के सदस्य जसकरण मीणा ने तत्परता दिखाते हुए शावक को सुरक्षित रेस्क्यू कर रणथंभौर स्थित वन्यजीव चिकित्सालय पहुंचाया।

उप वन संरक्षक मानस सिंह के निर्देशन में शावक का उपचार किया गया। उप निदेशक (पशु चिकित्सा) डॉ. चंद्र प्रकाश मीणा ने बताया कि शावक को फ्लूड थेरेपी, ऑक्सीजन थेरेपी तथा जीवन रक्षक दवाइयों के माध्यम से उपचारित किया गया, जिससे उसकी स्थिति में तेजी से सुधार हुआ।

स्वास्थ्य लाभ मिलने के बाद मादा शावक को सावधानीपूर्वक उसकी मां के संभावित क्षेत्र (टेरिटरी) में छोड़ दिया गया, ताकि वह प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षित रह सके।

वन विभाग की इस त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई से एक दुर्लभ वन्यजीव का जीवन बचाया जा सका, जो वन्यजीव संरक्षण के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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