Friday, April 10, 2026

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रणथम्भोर में बाघ के रास्ते पर ‘घेरा’! सफारी में लापरवाही पर बड़ा एक्शन

ब्यूरो चीफ: बृजेश त्रिवेदी

सवाई माधोपुर। रणथम्भोर टाइगर रिजर्व में सफारी के दौरान टाइगर का रास्ता रोकने के गंभीर मामले में वन विभाग ने कड़ा संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की है। जानकारी के अनुसार, अभयारण्य के जोन-3 में पर्यटकों को सफारी पर ले जा रही गाड़ियों द्वारा टाइगर के रास्ते को अवरुद्ध किए जाने की घटना सामने आई थी।

वन विभाग के अनुसार, संबंधित वाहन चालकों और नेचर गाइड्स ने दोनों ओर गाड़ियां खड़ी कर टाइगर के मूवमेंट को बाधित किया, जिससे न केवल वन्यजीव अधिनियम का उल्लंघन हुआ, बल्कि यह एक अत्यंत जोखिम भरा कृत्य भी था। इस घटना से टाइगर के प्राकृतिक व्यवहार में हस्तक्षेप हुआ, जो नियमों के खिलाफ है।

मामले की जांच के बाद विभाग ने तीन वाहन चालकों—मुरारी लाल, महेंद्र माली और तेजराज सिंह—तथा तीन नेचर गाइड—प्रफुल्ल पाराशर, हंसराज गुर्जर और सय्यैद इरशाद—की टाइगर रिजर्व में एंट्री पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है।

बताया जा रहा है कि यह घटना 2 अप्रैल की है, जिसकी जांच के बाद बुधवार को कार्रवाई की गई। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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रणथम्भोर में बाघ के रास्ते पर ‘घेरा’! सफारी में लापरवाही पर बड़ा एक्शन

ब्यूरो चीफ: बृजेश त्रिवेदी

सवाई माधोपुर। रणथम्भोर टाइगर रिजर्व में सफारी के दौरान टाइगर का रास्ता रोकने के गंभीर मामले में वन विभाग ने कड़ा संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की है। जानकारी के अनुसार, अभयारण्य के जोन-3 में पर्यटकों को सफारी पर ले जा रही गाड़ियों द्वारा टाइगर के रास्ते को अवरुद्ध किए जाने की घटना सामने आई थी।

वन विभाग के अनुसार, संबंधित वाहन चालकों और नेचर गाइड्स ने दोनों ओर गाड़ियां खड़ी कर टाइगर के मूवमेंट को बाधित किया, जिससे न केवल वन्यजीव अधिनियम का उल्लंघन हुआ, बल्कि यह एक अत्यंत जोखिम भरा कृत्य भी था। इस घटना से टाइगर के प्राकृतिक व्यवहार में हस्तक्षेप हुआ, जो नियमों के खिलाफ है।

मामले की जांच के बाद विभाग ने तीन वाहन चालकों—मुरारी लाल, महेंद्र माली और तेजराज सिंह—तथा तीन नेचर गाइड—प्रफुल्ल पाराशर, हंसराज गुर्जर और सय्यैद इरशाद—की टाइगर रिजर्व में एंट्री पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है।

बताया जा रहा है कि यह घटना 2 अप्रैल की है, जिसकी जांच के बाद बुधवार को कार्रवाई की गई। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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