ब्यूरो चीफ: विनीत सिंह, सीतापुर
सीतापुर जनपद के विकास खण्ड रेऊसा की विभिन्न ग्राम पंचायतों में वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की ओर से इस संबंध में प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए विस्तृत शिकायत प्रस्तुत की गई है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तैनात ग्राम विकास अधिकारी द्वारा शासन के आदेशों और पंचायत राज विभाग के निर्देशों की अनदेखी करते हुए 15वें एवं राज्य वित्त आयोग की धनराशि का दुरुपयोग किया गया। बताया गया कि बिना बिल-वाउचर और मास्टर रोल के, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लाखों रुपये का भुगतान किया गया।
आरोपों के अनुसार, एक ही व्यक्ति “अशोक कुमार” के नाम पर विभिन्न ग्राम पंचायतों—भिठनाकला, असंईपुर, हुसेनपुर, खुरवलिया, रामीपुर, काशीपुर, मल्लापुर और चहलारी—से कुल ₹2,27,943 का भुगतान किया गया। इसी तरह “बब्लू” के नाम पर ₹1,79,678 और “अरुण कुमार” के नाम पर ₹3,16,854 की धनराशि निकाले जाने का दावा किया गया है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि कई भुगतानों में एक ही बिल-वाउचर का उपयोग किया गया, जबकि कुछ मामलों में बिना सामग्री का विवरण दर्ज किए ही भुगतान कर दिया गया। आरोप है कि ग्राम विकास अधिकारी द्वारा अपने निजी मुंशी के माध्यम से इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया।
इस प्रकरण ने पंचायत स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जिले के अधिकारी नियमित बैठकें और निरीक्षण कर ईमानदारी से कार्य करने के निर्देश देते हैं, इसके बावजूद जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
एनसीपी ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए तथा दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करते हुए शीघ्र एफआईआर दर्ज कराई जाए।
- क्या पंचायत स्तर पर वित्तीय निगरानी कमजोर पड़ रही है?
- बिना बिल-वाउचर भुगतान कैसे संभव हुआ?
- जिम्मेदार अधिकारियों पर कब होगी कार्रवाई?
रेऊसा ब्लॉक की इन ग्राम पंचायतों का मामला सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पर कितनी तेजी और सख्ती से कार्रवाई करता है।




