Sunday, April 5, 2026

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सीतापुर में मौसम का कहर बारिश और आंधी ने किसानों की मेहनत डुबो दी!

ब्यूरो चीफ: विनीत सिंह, सीतापुर


जनपद में अचानक बदले मौसम ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। रविवार को आई तेज बारिश और आंधी ने गल्ला मंडियों से लेकर खेतों तक तबाही का मंजर खड़ा कर दिया। इस प्राकृतिक आपदा के चलते जहां मंडी में खुले में रखा सैकड़ों कुंटल गेहूं भीगकर खराब हो गया, वहीं खेतों में खड़ी फसल को भी भारी नुकसान पहुंचा ह

जानकारी के अनुसार, जिले की विभिन्न गल्ला मंडियों में खरीद के लिए लाया गया गेहूं खुले में ही रखा था। अचानक मौसम खराब होने और तेज बारिश शुरू होने से किसानों को अपना अनाज बचाने का मौका तक नहीं मिला। देखते ही देखते बड़ी मात्रा में गेहूं पानी में भीग गया, जिससे उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो गई है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

हैरानी की बात यह है कि जिलाधिकारी राजा गणपति आर द्वारा पहले ही मंडी प्रशासन को बारिश से बचाव के लिए पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद मंडी प्रशासन की लापरवाही साफ तौर पर सामने आई। मौके पर न तो पर्याप्त तिरपाल की व्यवस्था थी और न ही अनाज को सुरक्षित स्थान पर रखने की कोई ठोस व्यवस्था दिखाई दी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बारिश के दौरान मंडी में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। किसान अपने स्तर पर गेहूं को बचाने की कोशिश करते रहे, लेकिन तेज बारिश और हवाओं के आगे उनकी कोशिशें नाकाफी साबित हुईं। कई जगहों पर गेहूं पानी में तैरता नजर आया, जो प्रशासनिक तैयारियों की पोल खोलता है।

वहीं, इस बारिश और आंधी का असर केवल मंडियों तक सीमित नहीं रहा। ग्रामीण इलाकों में खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को भी तेज हवाओं और बारिश ने काफी नुकसान पहुंचाया है। कई स्थानों पर फसल गिर गई है, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इससे पहले से आर्थिक दबाव झेल रहे किसानों की चिंता और बढ़ गई है।

किसानों का कहना है कि एक ओर सरकार उनकी आय बढ़ाने के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं की कमी उनके लिए संकट खड़ा कर रही है। समय रहते उचित प्रबंधन किया जाता, तो इस नुकसान को काफी हद तक टाला जा सकता था।

अब बड़ा सवाल यह है कि किसानों को हुए इस नुकसान की भरपाई कौन करेगा। क्या प्रशासन जिम्मेदारी तय कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करेगा या फिर यह मामला भी अन्य घटनाओं की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा। फिलहाल किसान मुआवजे और राहत की उम्मीद में प्रशासन की ओर देख रहे हैं।

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सीतापुर में मौसम का कहर बारिश और आंधी ने किसानों की मेहनत डुबो दी!

ब्यूरो चीफ: विनीत सिंह, सीतापुर


जनपद में अचानक बदले मौसम ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। रविवार को आई तेज बारिश और आंधी ने गल्ला मंडियों से लेकर खेतों तक तबाही का मंजर खड़ा कर दिया। इस प्राकृतिक आपदा के चलते जहां मंडी में खुले में रखा सैकड़ों कुंटल गेहूं भीगकर खराब हो गया, वहीं खेतों में खड़ी फसल को भी भारी नुकसान पहुंचा ह

जानकारी के अनुसार, जिले की विभिन्न गल्ला मंडियों में खरीद के लिए लाया गया गेहूं खुले में ही रखा था। अचानक मौसम खराब होने और तेज बारिश शुरू होने से किसानों को अपना अनाज बचाने का मौका तक नहीं मिला। देखते ही देखते बड़ी मात्रा में गेहूं पानी में भीग गया, जिससे उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो गई है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

हैरानी की बात यह है कि जिलाधिकारी राजा गणपति आर द्वारा पहले ही मंडी प्रशासन को बारिश से बचाव के लिए पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद मंडी प्रशासन की लापरवाही साफ तौर पर सामने आई। मौके पर न तो पर्याप्त तिरपाल की व्यवस्था थी और न ही अनाज को सुरक्षित स्थान पर रखने की कोई ठोस व्यवस्था दिखाई दी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बारिश के दौरान मंडी में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। किसान अपने स्तर पर गेहूं को बचाने की कोशिश करते रहे, लेकिन तेज बारिश और हवाओं के आगे उनकी कोशिशें नाकाफी साबित हुईं। कई जगहों पर गेहूं पानी में तैरता नजर आया, जो प्रशासनिक तैयारियों की पोल खोलता है।

वहीं, इस बारिश और आंधी का असर केवल मंडियों तक सीमित नहीं रहा। ग्रामीण इलाकों में खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को भी तेज हवाओं और बारिश ने काफी नुकसान पहुंचाया है। कई स्थानों पर फसल गिर गई है, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इससे पहले से आर्थिक दबाव झेल रहे किसानों की चिंता और बढ़ गई है।

किसानों का कहना है कि एक ओर सरकार उनकी आय बढ़ाने के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं की कमी उनके लिए संकट खड़ा कर रही है। समय रहते उचित प्रबंधन किया जाता, तो इस नुकसान को काफी हद तक टाला जा सकता था।

अब बड़ा सवाल यह है कि किसानों को हुए इस नुकसान की भरपाई कौन करेगा। क्या प्रशासन जिम्मेदारी तय कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करेगा या फिर यह मामला भी अन्य घटनाओं की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा। फिलहाल किसान मुआवजे और राहत की उम्मीद में प्रशासन की ओर देख रहे हैं।

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