Saturday, March 21, 2026

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RBSK की मदद से नन्हीं दिव्यांशी को मिला नया जीवन

ब्यूरो रिपोर्ट: ज्ञानेंद्र इंदौरकर

छिंदवाड़ा। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) एक बार फिर मासूम बच्चों के लिए जीवनदायी साबित हुआ है। जिले के बिछुआ विकासखंड की एक नन्ही बच्ची दिव्यांशी मिनोटे को इस योजना के तहत नया जीवन और मुस्कान मिली है।

दिव्यांशी का जन्म 31 मई 2024 को जिला अस्पताल छिंदवाड़ा में हुआ था। जन्म से ही वह ‘क्लेफ्ट पैलेट’ (कटा हुआ तालू) जैसी गंभीर जन्मजात विकृति से पीड़ित थी, जिसके कारण उसे दूध पीने और सामान्य रूप से विकसित होने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।

स्थिति का पता तब चला जब आंगनवाड़ी केंद्र क्रमांक 01 (इंदिरा आवास, बिछुआ) में आयोजित नियमित टीकाकरण सत्र के दौरान एएनएम श्रीमती अरुणा फरकारे की नजर बच्ची पर पड़ी। उन्होंने तत्परता दिखाते हुए RBSK टीम को सूचित किया। इसके बाद टीम के डॉ. दुर्गेश मराठा एवं एएनएम श्रीमती प्रागवती तुमडाम ने बच्ची का स्वास्थ्य परीक्षण कर उसे जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र (DEIC) छिंदवाड़ा रेफर किया।

कलेक्टर एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के मार्गदर्शन में, आशा कार्यकर्ता श्रीमती रहिशा शेख के सहयोग से दिव्यांशी को पाढर अस्पताल, बैतूल में भर्ती कराया गया। 1 नवंबर 2025 को उसका सफल ऑपरेशन किया गया।

ऑपरेशन के बाद अब दिव्यांशी पूरी तरह स्वस्थ है। उसके चेहरे पर मुस्कान लौट आई है और वह धीरे-धीरे स्पष्ट बोलने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इस सफलता पर परिजनों ने शासन एवं स्वास्थ्य विभाग का आभार व्यक्त किया है।

इस संबंध में डॉ. दुर्गेश मराठा ने आमजन से अपील की है कि कटे होंठ का ऑपरेशन 3 से 6 माह की उम्र एवं 3 किलो से अधिक वजन होने पर तथा कटे तालू का ऑपरेशन 8 से 12 माह की उम्र एवं 10 किलो से अधिक वजन होने पर अवश्य कराना चाहिए। समय पर इलाज से बच्चे का शारीरिक एवं मानसिक विकास बेहतर होता है और वह आत्मविश्वास के साथ समाज में आगे बढ़ सकता है।

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RBSK की मदद से नन्हीं दिव्यांशी को मिला नया जीवन

ब्यूरो रिपोर्ट: ज्ञानेंद्र इंदौरकर

छिंदवाड़ा। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) एक बार फिर मासूम बच्चों के लिए जीवनदायी साबित हुआ है। जिले के बिछुआ विकासखंड की एक नन्ही बच्ची दिव्यांशी मिनोटे को इस योजना के तहत नया जीवन और मुस्कान मिली है।

दिव्यांशी का जन्म 31 मई 2024 को जिला अस्पताल छिंदवाड़ा में हुआ था। जन्म से ही वह ‘क्लेफ्ट पैलेट’ (कटा हुआ तालू) जैसी गंभीर जन्मजात विकृति से पीड़ित थी, जिसके कारण उसे दूध पीने और सामान्य रूप से विकसित होने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।

स्थिति का पता तब चला जब आंगनवाड़ी केंद्र क्रमांक 01 (इंदिरा आवास, बिछुआ) में आयोजित नियमित टीकाकरण सत्र के दौरान एएनएम श्रीमती अरुणा फरकारे की नजर बच्ची पर पड़ी। उन्होंने तत्परता दिखाते हुए RBSK टीम को सूचित किया। इसके बाद टीम के डॉ. दुर्गेश मराठा एवं एएनएम श्रीमती प्रागवती तुमडाम ने बच्ची का स्वास्थ्य परीक्षण कर उसे जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र (DEIC) छिंदवाड़ा रेफर किया।

कलेक्टर एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के मार्गदर्शन में, आशा कार्यकर्ता श्रीमती रहिशा शेख के सहयोग से दिव्यांशी को पाढर अस्पताल, बैतूल में भर्ती कराया गया। 1 नवंबर 2025 को उसका सफल ऑपरेशन किया गया।

ऑपरेशन के बाद अब दिव्यांशी पूरी तरह स्वस्थ है। उसके चेहरे पर मुस्कान लौट आई है और वह धीरे-धीरे स्पष्ट बोलने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इस सफलता पर परिजनों ने शासन एवं स्वास्थ्य विभाग का आभार व्यक्त किया है।

इस संबंध में डॉ. दुर्गेश मराठा ने आमजन से अपील की है कि कटे होंठ का ऑपरेशन 3 से 6 माह की उम्र एवं 3 किलो से अधिक वजन होने पर तथा कटे तालू का ऑपरेशन 8 से 12 माह की उम्र एवं 10 किलो से अधिक वजन होने पर अवश्य कराना चाहिए। समय पर इलाज से बच्चे का शारीरिक एवं मानसिक विकास बेहतर होता है और वह आत्मविश्वास के साथ समाज में आगे बढ़ सकता है।

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