Tuesday, March 24, 2026

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राजगढ़ नगर में गणगौर महोत्सव की धूम गाजे-बाजे के साथ निकला माँ गौरा का भव्य जुलूस

जिला ब्यूरो विजय द्विवेदी

राजगढ़ – आस्था, प्रेम और सुहाग के प्रतीक गणगौर पर्व के अवसर पर राजगढ़ नगर में समाज की महिलाओं के विशेष उत्साह के साथ श्रद्धा और उल्लास का अनूठा संगम देखने को मिला
श्री देववंशीय मालवीय लोहार समाज मंदिर से शाम 6 बजे बैंड-बाजों की गूंज और ढोल की थाप के साथ माँ गणगौर का भव्य जुलूस निकाला गया। इस दौरान पूरा मार्ग ‘ईश्वर-गौरी’ के जयकारों और पारम्परिक लोक गीतों से गुंजायमान हो उठा
जुलूस में बड़ी संख्या में मातृशक्ति सोलह श्रृंगार कर और लाल चुनरी ओढ़कर सम्मिलित हुई, जो उत्सव की गरिमा को चार चाँद लगा रही थी। बैंड की मधुर धुन पर झूमती सखियों और भक्तिभाव में डूबे समाजजनों ने माँ गौरा और ईसर जी का भव्य स्वागत किया गणगौर उत्सव में जवारे (गेहूं के अंकुर) बोना और अंत में उन्हें ‘ठंडा’ (विसर्जन) करना माता पार्वती और शिव की पूजा का अहम हिस्सा है, जो चैत्र माह में अखंड सौभाग्य की कामना से किया जाता है यह परंपरा निमाड़ और राजस्थान में अत्यंत प्रचलित है, जिसके अंतर्गत सोमवार को पूर्ण श्रद्धा और विधि-विधान के साथ इन जवारों को जलाशयों में विसर्जित (ठंडा) किया
इस गौरवमयी आयोजन में समाज की एकता और सांस्कृतिक विरासत की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी, जहाँ उपस्थित जनसमूह ने माँ गणगौर से सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की |

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राजगढ़ नगर में गणगौर महोत्सव की धूम गाजे-बाजे के साथ निकला माँ गौरा का भव्य जुलूस

जिला ब्यूरो विजय द्विवेदी

राजगढ़ – आस्था, प्रेम और सुहाग के प्रतीक गणगौर पर्व के अवसर पर राजगढ़ नगर में समाज की महिलाओं के विशेष उत्साह के साथ श्रद्धा और उल्लास का अनूठा संगम देखने को मिला
श्री देववंशीय मालवीय लोहार समाज मंदिर से शाम 6 बजे बैंड-बाजों की गूंज और ढोल की थाप के साथ माँ गणगौर का भव्य जुलूस निकाला गया। इस दौरान पूरा मार्ग ‘ईश्वर-गौरी’ के जयकारों और पारम्परिक लोक गीतों से गुंजायमान हो उठा
जुलूस में बड़ी संख्या में मातृशक्ति सोलह श्रृंगार कर और लाल चुनरी ओढ़कर सम्मिलित हुई, जो उत्सव की गरिमा को चार चाँद लगा रही थी। बैंड की मधुर धुन पर झूमती सखियों और भक्तिभाव में डूबे समाजजनों ने माँ गौरा और ईसर जी का भव्य स्वागत किया गणगौर उत्सव में जवारे (गेहूं के अंकुर) बोना और अंत में उन्हें ‘ठंडा’ (विसर्जन) करना माता पार्वती और शिव की पूजा का अहम हिस्सा है, जो चैत्र माह में अखंड सौभाग्य की कामना से किया जाता है यह परंपरा निमाड़ और राजस्थान में अत्यंत प्रचलित है, जिसके अंतर्गत सोमवार को पूर्ण श्रद्धा और विधि-विधान के साथ इन जवारों को जलाशयों में विसर्जित (ठंडा) किया
इस गौरवमयी आयोजन में समाज की एकता और सांस्कृतिक विरासत की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी, जहाँ उपस्थित जनसमूह ने माँ गणगौर से सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की |

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