Tuesday, March 10, 2026

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खरगोन जिला जल अभावग्रस्त घोषित, कलेक्टर भव्या मित्तल के सख्त आदेश 

ब्यूरो चीफ: आशाराम कुंडले

खरगोन, 09 मार्च 2026
जिले में लगातार गिरते भू-जल स्तर और आगामी ग्रीष्मकाल में संभावित पेयजल संकट को देखते हुए कलेक्टर सुश्री भव्या मित्तल ने जल संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं। कार्यपालन यंत्री, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी खंड के प्रतिवेदन के आधार पर पेयजल संरक्षण अधिनियम 1986 के अंतर्गत नर्मदा नदी को छोड़कर पूरे जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित कर दिया गया है।

कलेक्टर सुश्री मित्तल ने आदेश में कहा है कि जिले के नागरिकों को पेयजल, घरेलू उपयोग और निस्तार के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से नदियों, तालाबों, कुओं और नलकूप सहित सभी जल स्रोतों में उपलब्ध जल को जनहित में सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं।

जारी आदेश के अनुसार आदेश की तिथि से 15 जुलाई 2026 तक जिले में बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के नलकूप खनन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। केवल शासकीय विभागों को पेयजल व्यवस्था के लिए नलकूप खनन की अनुमति दी जाएगी। अन्य किसी भी प्रयोजन के लिए संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

इसके अलावा कलेक्टर ने नर्मदा नदी को छोड़कर जिले में बहने वाली अन्य नदियों और नालों से पेयजल और निस्तार के अलावा सिंचाई एवं अन्य कार्यों के लिए जल उपयोग पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। बहते जल को रोकने के लिए आवश्यकता अनुसार कृत्रिम शटर लगाने के निर्देश संबंधित विभागों को दिए गए हैं।

यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है तथा नर्मदा नदी इस आदेश से मुक्त रहेगी। आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध अधिनियम की धाराओं के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

कलेक्टर सुश्री भव्या मित्तल ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे जल का विवेकपूर्ण उपयोग करें और जल संरक्षण में प्रशासन का सहयोग दें, ताकि आने वाले ग्रीष्मकाल में संभावित पेयजल संकट से प्रभावी रूप से निपटा जा सके।

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खरगोन जिला जल अभावग्रस्त घोषित, कलेक्टर भव्या मित्तल के सख्त आदेश 

ब्यूरो चीफ: आशाराम कुंडले

खरगोन, 09 मार्च 2026
जिले में लगातार गिरते भू-जल स्तर और आगामी ग्रीष्मकाल में संभावित पेयजल संकट को देखते हुए कलेक्टर सुश्री भव्या मित्तल ने जल संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं। कार्यपालन यंत्री, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी खंड के प्रतिवेदन के आधार पर पेयजल संरक्षण अधिनियम 1986 के अंतर्गत नर्मदा नदी को छोड़कर पूरे जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित कर दिया गया है।

कलेक्टर सुश्री मित्तल ने आदेश में कहा है कि जिले के नागरिकों को पेयजल, घरेलू उपयोग और निस्तार के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से नदियों, तालाबों, कुओं और नलकूप सहित सभी जल स्रोतों में उपलब्ध जल को जनहित में सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं।

जारी आदेश के अनुसार आदेश की तिथि से 15 जुलाई 2026 तक जिले में बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के नलकूप खनन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। केवल शासकीय विभागों को पेयजल व्यवस्था के लिए नलकूप खनन की अनुमति दी जाएगी। अन्य किसी भी प्रयोजन के लिए संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

इसके अलावा कलेक्टर ने नर्मदा नदी को छोड़कर जिले में बहने वाली अन्य नदियों और नालों से पेयजल और निस्तार के अलावा सिंचाई एवं अन्य कार्यों के लिए जल उपयोग पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। बहते जल को रोकने के लिए आवश्यकता अनुसार कृत्रिम शटर लगाने के निर्देश संबंधित विभागों को दिए गए हैं।

यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है तथा नर्मदा नदी इस आदेश से मुक्त रहेगी। आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध अधिनियम की धाराओं के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

कलेक्टर सुश्री भव्या मित्तल ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे जल का विवेकपूर्ण उपयोग करें और जल संरक्षण में प्रशासन का सहयोग दें, ताकि आने वाले ग्रीष्मकाल में संभावित पेयजल संकट से प्रभावी रूप से निपटा जा सके।

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