Monday, March 23, 2026

National

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भीलवाड़ा के जहाजपुर में पारंपरिक गीत नृत्य के साथ मनाया गया गणगौर पर्व

ब्यूरो रिपोर्ट: राजेन्द्र खटीक, शाहपुरा

भीलवाड़ा जिले के जहाजपुर कस्बे में गणगौर उत्सव को लेकर इस वर्ष विशेष उत्साह और भव्यता देखने को मिली। स्थानीय महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ ईसर-गणगौर की पूजा-अर्चना कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

इस अवसर पर आरती अग्रवाल ने गणगौर का रूप धारण किया, जबकि चीन अग्रवाल ईसर बने। कार्यक्रम में रेखा अग्रवाल, काजल अग्रवाल, चंदा अग्रवाल, मीनाक्षी अग्रवाल, साक्षी और अन्य महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। सभी महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा, आभूषण और मेहंदी से सुसज्जित होकर ईसर-गणगौर की पूजा की तथा लोकगीतों और नृत्य के माध्यम से अपनी आस्था व्यक्त की।

गणगौर उत्सव राजस्थान के प्रमुख पर्वों में से एक है, जिसमें महिलाएं और युवतियां भगवान शिव (ईसर) और माता पार्वती (गौरी) की आराधना करती हैं। यह पर्व वैवाहिक सुख, सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

राजधानी जयपुर में भी इस दिन गणगौर की प्रसिद्ध राजसी सवारी सिटी पैलेस की जनानी ड्योढ़ी से निकाली जाती है, जो पर्यटकों और स्थानीय लोगों के आकर्षण का केंद्र रहती है। इसी तरह प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में भी गणगौर पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है।

जहाजपुर में आयोजित यह कार्यक्रम सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजने का एक सुंदर उदाहरण बनकर सामने आया।

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भीलवाड़ा के जहाजपुर में पारंपरिक गीत नृत्य के साथ मनाया गया गणगौर पर्व

ब्यूरो रिपोर्ट: राजेन्द्र खटीक, शाहपुरा

भीलवाड़ा जिले के जहाजपुर कस्बे में गणगौर उत्सव को लेकर इस वर्ष विशेष उत्साह और भव्यता देखने को मिली। स्थानीय महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ ईसर-गणगौर की पूजा-अर्चना कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

इस अवसर पर आरती अग्रवाल ने गणगौर का रूप धारण किया, जबकि चीन अग्रवाल ईसर बने। कार्यक्रम में रेखा अग्रवाल, काजल अग्रवाल, चंदा अग्रवाल, मीनाक्षी अग्रवाल, साक्षी और अन्य महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। सभी महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा, आभूषण और मेहंदी से सुसज्जित होकर ईसर-गणगौर की पूजा की तथा लोकगीतों और नृत्य के माध्यम से अपनी आस्था व्यक्त की।

गणगौर उत्सव राजस्थान के प्रमुख पर्वों में से एक है, जिसमें महिलाएं और युवतियां भगवान शिव (ईसर) और माता पार्वती (गौरी) की आराधना करती हैं। यह पर्व वैवाहिक सुख, सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

राजधानी जयपुर में भी इस दिन गणगौर की प्रसिद्ध राजसी सवारी सिटी पैलेस की जनानी ड्योढ़ी से निकाली जाती है, जो पर्यटकों और स्थानीय लोगों के आकर्षण का केंद्र रहती है। इसी तरह प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में भी गणगौर पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है।

जहाजपुर में आयोजित यह कार्यक्रम सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजने का एक सुंदर उदाहरण बनकर सामने आया।

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