ब्यूरो चीफ: बृजेश त्रिवेदी
सवाई माधोपुर। जिला मुख्यालय स्थित सामाजिक वानिकी नर्सरी के पास स्थित श्री परमहंस योगाश्रम के बाहर अवैध रूप से पक्की दुकानों के निर्माण का मामला सामने आया है। इस संबंध में आश्रम ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने कोतवाली थाना पुलिस में लिखित शिकायत देकर अवैध निर्माण को तत्काल तुड़वाने की मांग की है।
परमहंस योगाश्रम ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. एस.सी. गर्ग ने बताया कि आश्रम परिसर एवं उसके आसपास कुछ बाहरी लोगों द्वारा बिना अनुमति दुकानों का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आश्रम में रहने वाले कुछ व्यक्तियों ने “राधे मां” के साथ मिलकर आश्रम की चारदीवारी के अंदर मुख्य सड़क की ओर अवैध निर्माण कार्य शुरू किया था, जिसकी पूर्व में भी कई बार शिकायत की जा चुकी है।
डॉ. गर्ग के अनुसार, 24 नवंबर 2025 को नगर परिषद आयुक्त एवं कोतवाली थानाधिकारी को इस संबंध में शिकायत दी गई थी। इसके बाद 9 दिसंबर 2025 को अतिरिक्त जिला कलेक्टर को भी अवगत कराया गया, जिस पर प्रशासन द्वारा निर्माण कार्य को रुकवाया गया था। हालांकि, आरोप है कि संबंधित लोगों ने प्रशासनिक आदेशों की अनदेखी करते हुए दोबारा निर्माण कार्य शुरू कर दिया।
ट्रस्ट अध्यक्ष ने बताया कि 15 मार्च 2026 को पुनः नगर परिषद एवं पुलिस को शिकायत दी गई, जिस पर कार्रवाई करते हुए निर्माण सामग्री जब्त कर कार्य रुकवाया गया था। इसके बावजूद, निर्माणकर्ता रात-दिन मजदूर लगाकर पक्की दुकानों का निर्माण कर चुके हैं और अब उन पर छत डालने का कार्य भी पूरा कर लिया गया है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आश्रम में रह रही एक महिला “राधे मां” द्वारा सेवकों और शिष्यों के रहने के लिए बने कमरों को तुड़वाकर बिना ट्रस्ट की अनुमति दुकानों का निर्माण कराया जा रहा है। ट्रस्ट सदस्यों द्वारा विरोध करने पर उनके साथ दुर्व्यवहार किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
डॉ. गर्ग ने स्पष्ट किया कि उक्त निर्माण के लिए न तो ट्रस्ट की कोई अनुमति ली गई है और न ही नगर परिषद से कोई स्वीकृति प्राप्त की गई है। साथ ही निर्माण का कोई नक्शा भी संबंधित विभाग में प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे यह निर्माण पूरी तरह अवैध प्रतीत होता है।
आश्रम ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने रविवार को एक बार फिर कोतवाली थाना पुलिस को लिखित रिपोर्ट देकर अवैध निर्माण को तत्काल हटाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
वहीं, इस पूरे मामले को लेकर प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि पूर्व में कई बार शिकायत और कार्रवाई के बावजूद निर्माण कार्य को पूरी तरह नहीं रोका जा सका। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या ठोस कदम उठाता है।




