Sunday, April 5, 2026

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हनुमान जयंती पर अद्भुत घटना खुद उतरा चोला, संगम में हुआ विसर्जन! 

ब्यूरो चीफ: बृजेश त्रिवेदी, सवाई माधोपुर

जिले के खण्डार कस्बे में हनुमान जयंती के अवसर पर एक अनोखा और आस्था से जुड़ा घटनाक्रम सामने आया, जिसने पूरे शहर में चर्चा का विषय बना दिया।

खण्डार स्थित प्राचीन पीपली वाले हनुमान मंदिर में 2 अप्रैल की सुबह लगभग 6 बजे अचानक मूर्ति पर चढ़ा सिंदूर का चोला स्वतः ही भरभराकर नीचे गिर गया। इस घटना के बाद मूर्ति अपने मूल पत्थर स्वरूप में दिखाई देने लगी। इसे लेकर श्रद्धालुओं में आश्चर्य और आस्था का माहौल देखने को मिला।

घटना के बाद मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लग गया। लोग इसे चमत्कार मानते हुए भगवान की विशेष कृपा के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे संयोग बता रहे हैं।

सनातन परंपराओं का पालन करते हुए उतरे हुए चोले का विधिवत विसर्जन रामेश्वर त्रिवेणी संगम पर किया गया। यहां चंबल नदी, बनास नदी और सीप नदी का संगम होता है। श्रद्धालु नाव के माध्यम से संगम स्थल पहुंचे और धार्मिक विधि-विधान से चोले का विसर्जन किया।

विसर्जन के उपरांत सभी भक्तों ने समीप स्थित चतुर्भुज नाथ मंदिर में दर्शन कर पूजा-अर्चना की।

इस धार्मिक कार्यक्रम में श्याम बिहारी मथुरिया, सत्यनारायण मथुरिया, महेंद्र दुबे, अनिल शर्मा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्र में आस्था और श्रद्धा का माहौल बना दिया है, वहीं लोग इसे लंबे समय तक याद रखने वाली घटना के रूप में देख रहे हैं।

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हनुमान जयंती पर अद्भुत घटना खुद उतरा चोला, संगम में हुआ विसर्जन! 

ब्यूरो चीफ: बृजेश त्रिवेदी, सवाई माधोपुर

जिले के खण्डार कस्बे में हनुमान जयंती के अवसर पर एक अनोखा और आस्था से जुड़ा घटनाक्रम सामने आया, जिसने पूरे शहर में चर्चा का विषय बना दिया।

खण्डार स्थित प्राचीन पीपली वाले हनुमान मंदिर में 2 अप्रैल की सुबह लगभग 6 बजे अचानक मूर्ति पर चढ़ा सिंदूर का चोला स्वतः ही भरभराकर नीचे गिर गया। इस घटना के बाद मूर्ति अपने मूल पत्थर स्वरूप में दिखाई देने लगी। इसे लेकर श्रद्धालुओं में आश्चर्य और आस्था का माहौल देखने को मिला।

घटना के बाद मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लग गया। लोग इसे चमत्कार मानते हुए भगवान की विशेष कृपा के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे संयोग बता रहे हैं।

सनातन परंपराओं का पालन करते हुए उतरे हुए चोले का विधिवत विसर्जन रामेश्वर त्रिवेणी संगम पर किया गया। यहां चंबल नदी, बनास नदी और सीप नदी का संगम होता है। श्रद्धालु नाव के माध्यम से संगम स्थल पहुंचे और धार्मिक विधि-विधान से चोले का विसर्जन किया।

विसर्जन के उपरांत सभी भक्तों ने समीप स्थित चतुर्भुज नाथ मंदिर में दर्शन कर पूजा-अर्चना की।

इस धार्मिक कार्यक्रम में श्याम बिहारी मथुरिया, सत्यनारायण मथुरिया, महेंद्र दुबे, अनिल शर्मा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्र में आस्था और श्रद्धा का माहौल बना दिया है, वहीं लोग इसे लंबे समय तक याद रखने वाली घटना के रूप में देख रहे हैं।

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