ब्यूरो रिपोर्ट: राजेन्द्र खटीक, शाहपुरा
मथुरा/वृंदावन:
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शुक्रवार को वृंदावन पहुंचीं, जहां उन्होंने प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम में जाकर उनसे भेंट की। इस दौरान राष्ट्रपति ने संतों के साथ आध्यात्मिक चर्चा में भाग लिया और आश्रम के शांत एवं श्रद्धामय वातावरण का अनुभव किया।
आश्रम में राष्ट्रपति का स्वागत सादगी और भक्ति भाव के साथ किया गया। मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति ने भगवान की लीलाओं, भक्ति और भजन के महत्व पर संत प्रेमानंद महाराज से विस्तृत चर्चा की।
संत प्रेमानंद महाराज ने बताया कि मनुष्य जीवन में भगवान के नाम का स्मरण अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सच्चे मन से किया गया नाम जप न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि जीवन को सही दिशा भी देता है। उन्होंने यह भी कहा कि “नाम जप में अद्भुत शक्ति होती है, जिसके सामने बड़े-बड़े संत और विद्वान भी नतमस्तक हो जाते हैं।”
उन्होंने विशेष रूप से ‘राधा’ नाम के जाप का महत्व बताते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति सच्चे मन से राधा नाम का स्मरण करता है, तो भगवान श्रीकृष्ण स्वयं उसकी ओर आकर्षित होते हैं, जो भक्ति की सर्वोच्च शक्ति को दर्शाता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस आध्यात्मिक वातावरण की सराहना करते हुए कहा कि ब्रजभूमि में आकर उन्हें विशेष शांति और आनंद की अनुभूति हुई। उन्होंने कहा कि यहां की भक्ति और भगवान की लीलाओं का वातावरण अद्वितीय है।
राष्ट्रपति ने संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन को अपने लिए सौभाग्य बताया और कहा कि इस यात्रा से उन्हें आत्मिक संतोष प्राप्त हुआ। इस अवसर पर आश्रम में उपस्थित संतों और श्रद्धालुओं ने भी राष्ट्रपति के आगमन पर हर्ष व्यक्त किया।
राष्ट्रपति के दौरे को ध्यान में रखते हुए पूरे क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। आश्रम परिसर के आसपास प्रशासन और पुलिस बल तैनात रहा, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सका। राष्ट्रपति की इस आध्यात्मिक यात्रा ने ब्रजभूमि की भक्ति परंपरा और सांस्कृतिक महत्ता को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर उजागर किया।




