संवाददाता : कमलेश यादव
छोटी सादड़ी — क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों की हालत दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। मरीजों को इलाज के लिए घंटों कतारों में खड़ा रहना पड़ता है, कई बार गंभीर रोगी समय पर उपचार न मिलने से मौत के मुंह तक पहुंच जाते हैं। बावजूद इसके नेताओं को जनता की सेहत की कोई चिंता नहीं है। चुनाव के वक्त बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की सुध लेने वाला कोई नहीं दिखता।
डॉक्टरों की भारी कमी के चलते गरीब और मध्यमवर्गीय मरीज सबसे ज्यादा परेशान हैं। सालों से यह समस्या बनी हुई है, लेकिन नेताओं और जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण हालात सुधारने के बजाय और बिगड़ते जा रहे हैं।
जनता का आरोप है कि नेताओं को केवल वोट चाहिए, जनता की समस्याओं से उन्हें कोई मतलब नहीं। अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो लोग आंदोलन की राह पकड़ने पर मजबूर होंगे।
अब सवाल यह है कि कब तक आमजन नेताओं की लापरवाही की कीमत अपनी जान और जेब से चुकाते रहेंगे?




