Thursday, February 19, 2026

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सिरोही संयम की ओर कदम — हीया कोठारी का दीक्षा महोत्सव कल से


इमरान खान आबू रोड

सिरोही। प्रभु नेमीनाथ का पथ स्वीकार करने वाली कृष्णगंज निवासी हीया कोठारी का भव्य त्रिदिवसीय दीक्षा महोत्सव 20 फरवरी 2026 को कृृष्णगंज में प्रारम्भ होगा। महोत्सव के पहले दिन गुरू भगवंतो का सामैया होगा, संगीत के साथ भव्य स्नात्र महोत्सव, मामा लावे रूडुं मामेरा कार्यक्रम, दोपहर में कर्म केसरिया यानि वस्त्र रंगने का कार्यक्रम एवं रात्रि में बांदोली कार्यक्रम होगा। महोत्सव के दुसरे दिन दीक्षादाता आचार्य भगवंतो का सामैया, राजशाही वर्षीदान शोभायात्रा, मुमुक्षु हीया का अंतिम वायणा (भोजन) व शाम 7 बजे संसारिक जीवन को अलविदा समारोह होगा। तीसरे दिन 22 फरवरी को रत्नत्रयी का प्राप्ति कार्यक्रम में प्रातः 9 बजे चर्तुविद संघ के समक्ष दीक्षा विधि होगी। दीक्षा दिलाने के लिए आचार्य भगवंत रविरत्नसूरीजी, रश्मिरत्नसूरीजी एवं जयेशरत्नसूरीजी अपने समुदाय के अनेको साधु-साध्वियों के साथ 21 फरवरी को कृष्णगंज पहंुचेगे। 21 वर्षीय हीया शांतिदेवी रिखबचंदजी कोठारी की सुपौत्री एवं कलाबेन विनोद कुमार कोठारी की सुपुत्री हैं। हीया ने मास्टर आॅफ साइन्स में इन्ॅफोरमेशन टेक्नोलोजी की पढाई करने के बाद उनमें ’’ संसार के प्रति विरक्त भाव जागे ’’ ओर उन्होने दीक्षा दानेश्वरी आचार्य गुणरत्नसूरीजी के समुदाय में दीक्षा लेने के लिए धार्मिक क्षेत्र में प्रवेश किया। वे 490 से अधिक शिष्याओं की गुरूमैया प्रवर्तिनी साध्वीश्री रेखाश्रीजी म. सा. की शिष्या साध्वीजी श्री हेमलरेखाश्रीजी की शिष्या बनेगी।

प्रभु मुझे रत्नत्रयी की प्राप्ति करवाना: हीया कोठारी

मुमुक्षा हीया कोठारी ने कहा कि वे प्रभु नेम के वात्सल्य के सागर में डुबने के लिए दीक्षा ग्रहण कर रही हैं। प्रभु मुझे रत्नत्रयी की प्राप्ति करवा कर मेरे जीवन को कृतार्थ करो, पावन करो, तेरे पथ पर चलने का सत्व मुझे तेरे से ही मिला है, मात्र इस भव में नही परन्तु नौ भव तक राजुल से आपकी प्रीत थी ओर आखिर मुक्ति सुख की प्राप्ति करवाई ठीक वैसे ही जब तक मुझे मोक्ष की प्राप्ति न हो तब तक मुझे आपका साथ निभाना है, मेरे साथ चलना है यही मेरे अंतर मन के भाव हैं। साबरमती अहमदाबाद में शिक्षित हीया ने बताया कि गुरूमैया साध्वीश्री रेखाश्रीजी के सम्पर्क में आने के बाद मेरे जीवन का परिचय बदल गया। संसार रूपी सरोवर से संयम रूपी समंदर बनने का मुर्हुत आपको देखने के बाद ही आया। शाश्वत सुख को पाने की चाह आपको मिलने के बाद ही जगी हैं।

बेटी तुम शासन की शणगार बनना

दीक्षार्थी के माता-पिता कला बेन-विनोद कुमार कोठारी ने हीया को आर्शीवाद देते हुऐ कहा कि ’’ बेटी तुम शासन की शणगार बनना ओर तेरी संयम यात्रा, समर्पण यात्रा बने ओर यह यात्रा परम पदयात्रा बनकर तुझे सिद्धि की प्राप्ति हो।
दीक्षा महोत्सव में संवेदना एवं संगीत के सुर प्रदान करने के लिए अहमदाबाद के शैल शाह, हार्दिक बागरेचा मुंबई के स्मित कोठारी, भाविक शाह, सुरत के हार्दिक शाह एवं फलौदी के कोमल गुलेच्छा आयेगें। पंच महाजन जैन संघ कृष्णगंज की ओर से दीक्षार्थी का अभिनंदन करने, संयम के लिए विदाई देने के लिए तैयारियां की जा रही हैं। इसके लिए गांव में विशेष सजावट भी की गई हैं। दीक्षा महोत्सव में भाग लेने के लिए दक्षिण भारत में व्यवसायरत प्रवासी जैन बंधु भी कृष्णगंज पहुच रहे हैं।
दीक्षार्थी के श्री पावापुरी तीर्थ में दर्शन आगमन पर तीर्थ संस्थापक के पी संघवी परिवार की प्रमुखा तपस्वीरत्न श्रीमती रतनबेन बाबुलालजी संघवी ने मुमुक्षु हीया बेन एवं उनकी माता कलाबेन एवं पिताश्री विनोद भाई कोठारी का तिलक-माला एवं शाॅल ओढाकर बहुमान किया ओर दीक्षार्थी को संयम जीवन की शुभकामनाएं दी।

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सिरोही संयम की ओर कदम — हीया कोठारी का दीक्षा महोत्सव कल से


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सिरोही। प्रभु नेमीनाथ का पथ स्वीकार करने वाली कृष्णगंज निवासी हीया कोठारी का भव्य त्रिदिवसीय दीक्षा महोत्सव 20 फरवरी 2026 को कृृष्णगंज में प्रारम्भ होगा। महोत्सव के पहले दिन गुरू भगवंतो का सामैया होगा, संगीत के साथ भव्य स्नात्र महोत्सव, मामा लावे रूडुं मामेरा कार्यक्रम, दोपहर में कर्म केसरिया यानि वस्त्र रंगने का कार्यक्रम एवं रात्रि में बांदोली कार्यक्रम होगा। महोत्सव के दुसरे दिन दीक्षादाता आचार्य भगवंतो का सामैया, राजशाही वर्षीदान शोभायात्रा, मुमुक्षु हीया का अंतिम वायणा (भोजन) व शाम 7 बजे संसारिक जीवन को अलविदा समारोह होगा। तीसरे दिन 22 फरवरी को रत्नत्रयी का प्राप्ति कार्यक्रम में प्रातः 9 बजे चर्तुविद संघ के समक्ष दीक्षा विधि होगी। दीक्षा दिलाने के लिए आचार्य भगवंत रविरत्नसूरीजी, रश्मिरत्नसूरीजी एवं जयेशरत्नसूरीजी अपने समुदाय के अनेको साधु-साध्वियों के साथ 21 फरवरी को कृष्णगंज पहंुचेगे। 21 वर्षीय हीया शांतिदेवी रिखबचंदजी कोठारी की सुपौत्री एवं कलाबेन विनोद कुमार कोठारी की सुपुत्री हैं। हीया ने मास्टर आॅफ साइन्स में इन्ॅफोरमेशन टेक्नोलोजी की पढाई करने के बाद उनमें ’’ संसार के प्रति विरक्त भाव जागे ’’ ओर उन्होने दीक्षा दानेश्वरी आचार्य गुणरत्नसूरीजी के समुदाय में दीक्षा लेने के लिए धार्मिक क्षेत्र में प्रवेश किया। वे 490 से अधिक शिष्याओं की गुरूमैया प्रवर्तिनी साध्वीश्री रेखाश्रीजी म. सा. की शिष्या साध्वीजी श्री हेमलरेखाश्रीजी की शिष्या बनेगी।

प्रभु मुझे रत्नत्रयी की प्राप्ति करवाना: हीया कोठारी

मुमुक्षा हीया कोठारी ने कहा कि वे प्रभु नेम के वात्सल्य के सागर में डुबने के लिए दीक्षा ग्रहण कर रही हैं। प्रभु मुझे रत्नत्रयी की प्राप्ति करवा कर मेरे जीवन को कृतार्थ करो, पावन करो, तेरे पथ पर चलने का सत्व मुझे तेरे से ही मिला है, मात्र इस भव में नही परन्तु नौ भव तक राजुल से आपकी प्रीत थी ओर आखिर मुक्ति सुख की प्राप्ति करवाई ठीक वैसे ही जब तक मुझे मोक्ष की प्राप्ति न हो तब तक मुझे आपका साथ निभाना है, मेरे साथ चलना है यही मेरे अंतर मन के भाव हैं। साबरमती अहमदाबाद में शिक्षित हीया ने बताया कि गुरूमैया साध्वीश्री रेखाश्रीजी के सम्पर्क में आने के बाद मेरे जीवन का परिचय बदल गया। संसार रूपी सरोवर से संयम रूपी समंदर बनने का मुर्हुत आपको देखने के बाद ही आया। शाश्वत सुख को पाने की चाह आपको मिलने के बाद ही जगी हैं।

बेटी तुम शासन की शणगार बनना

दीक्षार्थी के माता-पिता कला बेन-विनोद कुमार कोठारी ने हीया को आर्शीवाद देते हुऐ कहा कि ’’ बेटी तुम शासन की शणगार बनना ओर तेरी संयम यात्रा, समर्पण यात्रा बने ओर यह यात्रा परम पदयात्रा बनकर तुझे सिद्धि की प्राप्ति हो।
दीक्षा महोत्सव में संवेदना एवं संगीत के सुर प्रदान करने के लिए अहमदाबाद के शैल शाह, हार्दिक बागरेचा मुंबई के स्मित कोठारी, भाविक शाह, सुरत के हार्दिक शाह एवं फलौदी के कोमल गुलेच्छा आयेगें। पंच महाजन जैन संघ कृष्णगंज की ओर से दीक्षार्थी का अभिनंदन करने, संयम के लिए विदाई देने के लिए तैयारियां की जा रही हैं। इसके लिए गांव में विशेष सजावट भी की गई हैं। दीक्षा महोत्सव में भाग लेने के लिए दक्षिण भारत में व्यवसायरत प्रवासी जैन बंधु भी कृष्णगंज पहुच रहे हैं।
दीक्षार्थी के श्री पावापुरी तीर्थ में दर्शन आगमन पर तीर्थ संस्थापक के पी संघवी परिवार की प्रमुखा तपस्वीरत्न श्रीमती रतनबेन बाबुलालजी संघवी ने मुमुक्षु हीया बेन एवं उनकी माता कलाबेन एवं पिताश्री विनोद भाई कोठारी का तिलक-माला एवं शाॅल ओढाकर बहुमान किया ओर दीक्षार्थी को संयम जीवन की शुभकामनाएं दी।

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