Monday, March 2, 2026

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सीतापुर में अंतरराज्यीय जीएसटी चोरी गिरोह का भंडाफोड़, चार आरोपी गिरफ्तार


जिला ब्यूरो: विनीत सिंह, सीतापुर

सीतापुर (उ.प्र.), 2 मार्च 2026
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में जीएसटी (माल एवं सेवा कर) चोरी से जुड़े एक अंतर-राज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई वित्त वर्ष 2025-26 के सबसे बड़े जीएसटी फ्रॉड मामलों में से एक मानी जा रही है। सीतापुर पुलिस, निगरानी सेल तथा SWAT टीम की संयुक्त कार्रवाई में वरिष्ठ राजस्व और साइबर जांच के बाद यह गिरोह पकड़ा गया। चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि गिरोह का मुख्य सरगना फिलहाल फरार बताया जा रहा है।

जांच में अनुमान लगाया गया है कि गिरोह के द्वारा करीब ₹2.75 करोड़ के जीएसटी चोरी और टैक्स चोरी के घोटाले को अंजाम दिया गया। आरोप है कि गिरोह ने फर्जी फर्मों और झूठे दस्तावेजों के सहारे टैक्स क्रेडिट का दुरुपयोग किया, इसमें फर्जी रेंट एग्रीमेंट और नकली व्यवसाय प्रमाण शामिल थे। आरोपियों ने लोगों से उनके आधार, पैन और बैंक विवरण लेकर फर्जी कंपनियाँ पंजीकृत कराई और इनका उपयोग कर इनवॉइस तथा ई-वे बिल जारी किए। गिरोह व्यापारियों को नकद कमीशन (लगभग ₹10,000-₹20,000) देकर उनके विवरण इकट्ठा करता था और उसके बाद इन विवरणों से फर्जी गतिविधियाँ कराता था। पुलिस ने बताया कि यह अंतर-राज्यीय गिरोह नकली कंपनियों और आईडी के दुरुपयोग से सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा रहा था। आगे की जांच जारी है और अन्य संभावित आरोपियों की पहचान की जा रही है।


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सीतापुर में अंतरराज्यीय जीएसटी चोरी गिरोह का भंडाफोड़, चार आरोपी गिरफ्तार


जिला ब्यूरो: विनीत सिंह, सीतापुर

सीतापुर (उ.प्र.), 2 मार्च 2026
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में जीएसटी (माल एवं सेवा कर) चोरी से जुड़े एक अंतर-राज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई वित्त वर्ष 2025-26 के सबसे बड़े जीएसटी फ्रॉड मामलों में से एक मानी जा रही है। सीतापुर पुलिस, निगरानी सेल तथा SWAT टीम की संयुक्त कार्रवाई में वरिष्ठ राजस्व और साइबर जांच के बाद यह गिरोह पकड़ा गया। चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि गिरोह का मुख्य सरगना फिलहाल फरार बताया जा रहा है।

जांच में अनुमान लगाया गया है कि गिरोह के द्वारा करीब ₹2.75 करोड़ के जीएसटी चोरी और टैक्स चोरी के घोटाले को अंजाम दिया गया। आरोप है कि गिरोह ने फर्जी फर्मों और झूठे दस्तावेजों के सहारे टैक्स क्रेडिट का दुरुपयोग किया, इसमें फर्जी रेंट एग्रीमेंट और नकली व्यवसाय प्रमाण शामिल थे। आरोपियों ने लोगों से उनके आधार, पैन और बैंक विवरण लेकर फर्जी कंपनियाँ पंजीकृत कराई और इनका उपयोग कर इनवॉइस तथा ई-वे बिल जारी किए। गिरोह व्यापारियों को नकद कमीशन (लगभग ₹10,000-₹20,000) देकर उनके विवरण इकट्ठा करता था और उसके बाद इन विवरणों से फर्जी गतिविधियाँ कराता था। पुलिस ने बताया कि यह अंतर-राज्यीय गिरोह नकली कंपनियों और आईडी के दुरुपयोग से सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा रहा था। आगे की जांच जारी है और अन्य संभावित आरोपियों की पहचान की जा रही है।


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