Friday, April 17, 2026

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नमाज़ के वक्त दो घरों में चोरी, छोटी सादड़ी में कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल

प्रतापगढ़ ब्यूरो

राजस्थान के छोटी सादड़ी कस्बे में लगातार बढ़ रही चोरी की वारदातों ने आमजन की सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर रमज़ान के पवित्र महीने में बोहरा समाज के दो घरों में एक ही सप्ताह के भीतर हुई सेंधमारी से समुदाय में भय और रोष का माहौल है।

सूत्रों के अनुसार पहली चोरी की घटना पोस्ट ऑफिस के पीछे स्थित एक मकान में हुई थी। इस वारदात का अब तक खुलासा नहीं हो पाया था कि दूसरी घटना यादव मोहल्ले में पिपली के पास सामने आ गई। 27 फरवरी 2026 को हुई इस दूसरी वारदात में परिवार के सभी सदस्य मग़रिब की नमाज़ अदा करने मस्जिद गए हुए थे। इसी दौरान अज्ञात चोरों ने घर में घुसकर कीमती सामान और जेवरात पर हाथ साफ कर दिया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि रमज़ान के महीने में बोहरा समाज के अधिकांश परिवार निर्धारित समय पर नमाज़ के लिए मस्जिद जाते हैं। ऐसे में घर खाली होने की आशंका को देखते हुए पुलिस की सतर्कता और बढ़ जानी चाहिए थी। लेकिन लगातार दो घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।

गौरतलब है कि इन घटनाओं से ठीक दो दिन पहले पुलिस द्वारा क्षेत्र में फ्लैग मार्च निकाला गया था। फ्लैग मार्च का उद्देश्य आमजन में सुरक्षा का विश्वास जगाना और असामाजिक तत्वों को चेतावनी देना बताया गया था। किंतु दूसरी चोरी की घटना ने इस प्रयास की प्रभावशीलता पर सवालिया निशान लगा दिया है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पहली घटना के बाद यदि पुलिस ने त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की होती, तो संभवतः दूसरी वारदात रोकी जा सकती थी। लोगों का यह भी कहना है कि लगातार बोहरा समाज के घरों को निशाना बनाया जाना चिंताजनक है और यह किसी संगठित गिरोह की सक्रियता की ओर संकेत करता है।

व्यापारिक और आवासीय क्षेत्र में हुई इन वारदातों के बाद कस्बे में दहशत का माहौल है। कई परिवारों ने रात में अतिरिक्त सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। वहीं पुलिस का कहना है कि दोनों मामलों की जांच की जा रही है और संदिग्धों की पहचान के प्रयास जारी हैं।

अब बड़ा प्रश्न यह है कि क्या पुलिस इन घटनाओं का शीघ्र खुलासा कर पाएगी और चोरी की बढ़ती घटनाओं पर अंकुश लगा सकेगी? या फिर फ्लैग मार्च जैसे कदम केवल औपचारिकता बनकर रह जाएंगे?

रमज़ान जैसे पवित्र महीने में इबादत के दौरान घरों को निशाना बनाया जाना न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि सामाजिक विश्वास पर भी आघात है। कस्बे के नागरिकों की निगाहें अब पुलिस की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।

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नमाज़ के वक्त दो घरों में चोरी, छोटी सादड़ी में कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल

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राजस्थान के छोटी सादड़ी कस्बे में लगातार बढ़ रही चोरी की वारदातों ने आमजन की सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर रमज़ान के पवित्र महीने में बोहरा समाज के दो घरों में एक ही सप्ताह के भीतर हुई सेंधमारी से समुदाय में भय और रोष का माहौल है।

सूत्रों के अनुसार पहली चोरी की घटना पोस्ट ऑफिस के पीछे स्थित एक मकान में हुई थी। इस वारदात का अब तक खुलासा नहीं हो पाया था कि दूसरी घटना यादव मोहल्ले में पिपली के पास सामने आ गई। 27 फरवरी 2026 को हुई इस दूसरी वारदात में परिवार के सभी सदस्य मग़रिब की नमाज़ अदा करने मस्जिद गए हुए थे। इसी दौरान अज्ञात चोरों ने घर में घुसकर कीमती सामान और जेवरात पर हाथ साफ कर दिया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि रमज़ान के महीने में बोहरा समाज के अधिकांश परिवार निर्धारित समय पर नमाज़ के लिए मस्जिद जाते हैं। ऐसे में घर खाली होने की आशंका को देखते हुए पुलिस की सतर्कता और बढ़ जानी चाहिए थी। लेकिन लगातार दो घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।

गौरतलब है कि इन घटनाओं से ठीक दो दिन पहले पुलिस द्वारा क्षेत्र में फ्लैग मार्च निकाला गया था। फ्लैग मार्च का उद्देश्य आमजन में सुरक्षा का विश्वास जगाना और असामाजिक तत्वों को चेतावनी देना बताया गया था। किंतु दूसरी चोरी की घटना ने इस प्रयास की प्रभावशीलता पर सवालिया निशान लगा दिया है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पहली घटना के बाद यदि पुलिस ने त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की होती, तो संभवतः दूसरी वारदात रोकी जा सकती थी। लोगों का यह भी कहना है कि लगातार बोहरा समाज के घरों को निशाना बनाया जाना चिंताजनक है और यह किसी संगठित गिरोह की सक्रियता की ओर संकेत करता है।

व्यापारिक और आवासीय क्षेत्र में हुई इन वारदातों के बाद कस्बे में दहशत का माहौल है। कई परिवारों ने रात में अतिरिक्त सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। वहीं पुलिस का कहना है कि दोनों मामलों की जांच की जा रही है और संदिग्धों की पहचान के प्रयास जारी हैं।

अब बड़ा प्रश्न यह है कि क्या पुलिस इन घटनाओं का शीघ्र खुलासा कर पाएगी और चोरी की बढ़ती घटनाओं पर अंकुश लगा सकेगी? या फिर फ्लैग मार्च जैसे कदम केवल औपचारिकता बनकर रह जाएंगे?

रमज़ान जैसे पवित्र महीने में इबादत के दौरान घरों को निशाना बनाया जाना न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि सामाजिक विश्वास पर भी आघात है। कस्बे के नागरिकों की निगाहें अब पुलिस की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।

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