ब्यूरो रिपोर्ट: महेश पांडुरंग शेंडे
गडचिरोली। जिला सामान्य अस्पताल में ‘थैलेसीमिया सप्ताह’ कार्यक्रम का जिला स्तरीय उद्घाटन एवं शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिला शल्य चिकित्सक डॉ. वर्षा लहाडे ने कहा कि थैलेसीमिया एक गंभीर अनुवांशिक बीमारी है, लेकिन समय रहते जागरूकता और सावधानी अपनाकर इससे समाज को मुक्त किया जा सकता है।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि भविष्य में थैलेसीमिया मेजर बच्चों के जन्म को रोकने के लिए युवक-युवतियों को विवाह से पहले अपनी जांच करवाना अनिवार्य है। यदि दो थैलेसीमिया वाहक व्यक्तियों के बीच विवाह से बचा जाए, तो इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। कार्यक्रम का नारा “एक कदम थैलेसीमिया मुक्ति की ओर” रखा गया।
कार्यक्रम की शुरुआत में उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों और नागरिकों ने थैलेसीमिया उन्मूलन एवं जन-जागरूकता के लिए सामूहिक शपथ ली।
विशेषज्ञों ने दी महत्वपूर्ण जानकारी
कार्यक्रम में मार्गदर्शन करते हुए डॉ. इंद्रजीत नागदेवते ने थैलेसीमिया की तकनीकी जानकारी विस्तार से दी। मुख्य अतिथि डॉ. बगराज धुर्वे ने बताया कि बीमारी के सटीक निदान के लिए HPLC टेस्ट बेहद आवश्यक है। साथ ही मरीजों को नियमित रूप से LFT, KFT, HB और CBC जैसी जांचें करवाकर उपचार जारी रखना चाहिए।
इस अवसर पर अतिरिक्त जिला शल्य चिकित्सक डॉ. छाया उईके, डॉ. मनीष मेश्राम, डॉ. साखरे (BTO), डॉ. गेडाम सहित अन्य चिकित्सक और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
1 से 40 वर्ष आयु वर्ग पर विशेष फोकस
कार्यक्रम के अंत में डॉ. वर्षा लहाडे ने आह्वान किया कि 1 से 40 वर्ष तक के सभी लोग अपनी थैलेसीमिया जांच अवश्य करवाएं, ताकि गडचिरोली जिले को थैलेसीमिया मुक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाया जा सके।
मुख्य बिंदु:
- थैलेसीमिया एक गंभीर अनुवांशिक बीमारी, जागरूकता से संभव रोकथाम
- विवाह पूर्व स्क्रीनिंग को बताया अनिवार्य
- HPLC टेस्ट से सटीक निदान, नियमित जांच आवश्यक
- 1 से 40 वर्ष आयु वर्ग को जांच के लिए प्रेरित
- ‘एक कदम थैलेसीमिया मुक्ति की ओर’ अभियान का शुभारंभ
गडचिरोली में शुरू हुआ यह अभियान आने वाले समय में जन-जागरूकता बढ़ाकर थैलेसीमिया मुक्त समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।




