Saturday, March 7, 2026

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बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत झुंझुनूं में जागरूकता रैली 

ब्यूरो चीफ: सुरेश सैनी, झुंझुनूं

बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के उन्मूलन और समाज में जन-जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से “बाल विवाह मुक्त भारत अभियान” के अंतर्गत शनिवार को झुंझुनूं में जन-जागरूकता रैली का आयोजन किया गया।

रैली को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव डॉ. महेंद्र के सिंह सोलंकी, बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक अरविंद ओला, जिला अल्पसंख्यक अधिकारी नेहा झाझड़िया तथा जिला युवा अधिकारी मधु यादव ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रैली शहीद कर्नल जे.पी. जानू राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से प्रारंभ होकर रोड नंबर 1 से होते हुए जिला कलेक्ट्रेट परिसर तक निकाली गई।

रैली में शामिल छात्र-छात्राओं और अधिकारियों ने बाल विवाह के खिलाफ नारे लगाकर आमजन को जागरूक किया। रैली का समापन सूचना केंद्र सभागार में आयोजित कार्यक्रम के साथ हुआ।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव डॉ. महेंद्र के सिंह सोलंकी ने कहा कि बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक बुराई है, जो बच्चों के अधिकारों का हनन करती है और उनके उज्ज्वल भविष्य को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि कानून द्वारा निर्धारित आयु से कम उम्र में विवाह करना दंडनीय अपराध है तथा समाज के प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह इस कुरीति को रोकने में सक्रिय भूमिका निभाए।

उन्होंने बताया कि बाल विवाह के कारण बच्चों के शारीरिक, मानसिक और शैक्षणिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। विशेष रूप से बालिकाओं के लिए यह समस्या अधिक गंभीर होती है, क्योंकि कम उम्र में विवाह होने से उनकी शिक्षा बाधित होती है और स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने युवाओं से अपने परिवार और समाज में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।

बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक अरविंद ओला ने कहा कि समाज में बाल विवाह को रोकना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि यदि कहीं बाल विवाह की जानकारी मिले तो 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन पर शिकायत की जा सकती है तथा शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाती है। वक्ताओं ने कहा कि बाल विवाह के दुष्परिणाम केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित नहीं रहते, बल्कि इसका प्रभाव समाज और राष्ट्र के विकास पर भी पड़ता है। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों को बाल विवाह रोकथाम की शपथ भी दिलाई गई।

इस अवसर पर जिला अल्पसंख्यक अधिकारी नेहा झाझड़िया, जिला युवा अधिकारी मधु यादव, सहायक जनसंपर्क अधिकारी विकास चाहर, सहायक आचार्य डॉ. विकास मील, राजकीय सम्प्रेक्षण एवं किशोर गृह के अधीक्षक अंकित मील, सामाजिक कार्यकर्ता विकेश सिहाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

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बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत झुंझुनूं में जागरूकता रैली 

ब्यूरो चीफ: सुरेश सैनी, झुंझुनूं

बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के उन्मूलन और समाज में जन-जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से “बाल विवाह मुक्त भारत अभियान” के अंतर्गत शनिवार को झुंझुनूं में जन-जागरूकता रैली का आयोजन किया गया।

रैली को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव डॉ. महेंद्र के सिंह सोलंकी, बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक अरविंद ओला, जिला अल्पसंख्यक अधिकारी नेहा झाझड़िया तथा जिला युवा अधिकारी मधु यादव ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रैली शहीद कर्नल जे.पी. जानू राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से प्रारंभ होकर रोड नंबर 1 से होते हुए जिला कलेक्ट्रेट परिसर तक निकाली गई।

रैली में शामिल छात्र-छात्राओं और अधिकारियों ने बाल विवाह के खिलाफ नारे लगाकर आमजन को जागरूक किया। रैली का समापन सूचना केंद्र सभागार में आयोजित कार्यक्रम के साथ हुआ।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव डॉ. महेंद्र के सिंह सोलंकी ने कहा कि बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक बुराई है, जो बच्चों के अधिकारों का हनन करती है और उनके उज्ज्वल भविष्य को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि कानून द्वारा निर्धारित आयु से कम उम्र में विवाह करना दंडनीय अपराध है तथा समाज के प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह इस कुरीति को रोकने में सक्रिय भूमिका निभाए।

उन्होंने बताया कि बाल विवाह के कारण बच्चों के शारीरिक, मानसिक और शैक्षणिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। विशेष रूप से बालिकाओं के लिए यह समस्या अधिक गंभीर होती है, क्योंकि कम उम्र में विवाह होने से उनकी शिक्षा बाधित होती है और स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने युवाओं से अपने परिवार और समाज में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।

बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक अरविंद ओला ने कहा कि समाज में बाल विवाह को रोकना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि यदि कहीं बाल विवाह की जानकारी मिले तो 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन पर शिकायत की जा सकती है तथा शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाती है। वक्ताओं ने कहा कि बाल विवाह के दुष्परिणाम केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित नहीं रहते, बल्कि इसका प्रभाव समाज और राष्ट्र के विकास पर भी पड़ता है। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों को बाल विवाह रोकथाम की शपथ भी दिलाई गई।

इस अवसर पर जिला अल्पसंख्यक अधिकारी नेहा झाझड़िया, जिला युवा अधिकारी मधु यादव, सहायक जनसंपर्क अधिकारी विकास चाहर, सहायक आचार्य डॉ. विकास मील, राजकीय सम्प्रेक्षण एवं किशोर गृह के अधीक्षक अंकित मील, सामाजिक कार्यकर्ता विकेश सिहाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

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