Saturday, March 7, 2026

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डिग्री आर्थिक बदलाव लाती है, दीक्षा देती है मन की शांति — साध्वी रूपातीत रेखाश्रीजी 

ब्यूरो चीफ: इमरान खान, सिरोही

शिक्षा ग्रहण करने के बाद मिलने वाली डिग्री भले ही आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव ला सकती है, लेकिन संयम जीवन यानी दीक्षा लेने से व्यक्ति को आंतरिक सुख और मन की सच्ची शांति प्राप्त होती है। ये विचार जैन साध्वी रूपातीत रेखाश्रीजी ने हाईवर्ड यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त एक प्रतिनिधिमंडल के समक्ष व्यक्त किए।

आर.के. ट्रस्ट बेंगलुरू के चेयरमैन रमेश कुमार शाह के नेतृत्व में हाईवर्ड यूनिवर्सिटी से शिक्षित प्रतिभाओं का एक प्रतिनिधिमंडल श्री पावापुरी तीर्थ-जीव मैत्रीधाम के अवलोकन के लिए पहुंचा। इस दौरान दल के सदस्यों की नजर वहां विराजित युवा साध्वियों पर पड़ी, जिसके बाद उन्होंने उनसे मिलने और जिज्ञासाओं के समाधान की इच्छा जताई। पावापुरी ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी महावीर जैन ने प्रतिनिधिमंडल की साध्वियों से भेंट करवाई।

प्रतिनिधिमंडल ने साध्वियों के समक्ष अनेक प्रश्न रखे, जिनका साध्वियों ने तार्किक और सरल उत्तर देकर समाधान किया। इससे दल के सदस्य प्रभावित हुए और उन्हें जैन साधु-साध्वियों के अनुशासित और कठिन जीवन के बारे में जानने का अवसर मिला। साध्वी रूपातीत रेखाश्रीजी ने जैन धर्म के सिद्धांतों को सरलता से समझाते हुए उनकी जिज्ञासाओं को शांत किया।

उन्होंने बताया कि आचार्य गुणरत्नसूरीजी के समुदाय की साध्वी रूपातीत रेखाश्रीजी की गुरूमैया साध्वी हेमलरेखाश्रीजी ने मात्र 7 वर्ष की आयु में दीक्षा ग्रहण की थी और वर्तमान में उन्हें दीक्षा लिए 26 वर्ष हो चुके हैं। वहीं इस समुदाय की प्रवर्तनी साध्वी पुण्यरेखाश्रीजी की 490 शिष्याएं हैं।

साध्वीजी ने कहा कि प्रभु महावीर सहित 24 तीर्थंकरों और अनंत सिद्ध भगवंतों के पास अथाह संपत्ति, राजवैभव और मान-सम्मान होते हुए भी उन्होंने आत्मिक सुख प्राप्त करने के लिए संयम मार्ग अपनाया और परिवार व राजवैभव का त्याग कर आत्मा का कल्याण करते हुए सिद्ध गति को प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि शक्ति, त्याग और आत्मकल्याण की साधना प्रभु की कृपा से प्राप्त होती है तथा संयम जीवन की नींव देव और गुरु हैं।

सांसारिक जीवन और संयम जीवन के अंतर के बारे में बताते हुए साध्वीजी ने कहा कि सांसारिक जीवन में चाहे कितना भी सुख हो, व्यक्ति को अधीनता का जीवन जीना पड़ता है, जबकि संयम मार्ग में प्रभु और गुरु के आश्रय में रहकर आत्मकल्याण संभव है।

किसी भी जीव को मेरे कारण दुःख न पहुंचे

साध्वियों ने प्रतिनिधिमंडल को जैन धर्म के मूल सिद्धांत, अहिंसा परमो धर्म और भगवान महावीर के संदेश “जीओ और जीने दो” की महिमा समझाते हुए कहा कि जीवन में व्यक्ति चाहे कोई भी धर्म अपनाए, लेकिन उसे यह भाव अवश्य रखना चाहिए कि उसके कारण किसी भी जीव—चाहे छोटा हो या बड़ा—को दुःख न पहुंचे।

प्रतिनिधिमंडल ने साध्वी समर्पणलीनाश्रीजी से भी भेंट कर उनसे कई जिज्ञासाओं के उत्तर प्राप्त किए।

प्रतिनिधिमंडल ने एम.एस. बिट्टा से भी की मुलाकात

पावापुरी में प्रतिनिधिमंडल ने आतंकवाद विरोधी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एम.एस. बिट्टा से भी मुलाकात की और उनके राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत विचारों को सुना। इस प्रतिनिधिमंडल में रमेश कुमार शाह के अलावा उज्ज्वला शाह, मेघना, प्रतिभा कामत, रेणु, सरोज, उमा और श्रीराम शामिल थे। सभी सदस्य देश के विभिन्न महानगरों में व्यवसाय से जुड़े हुए हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने मंदिर में पार्श्वनाथ भगवान के दर्शन किए, गौशाला में गौपूजन किया तथा आर्ट गैलरी का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि के.पी. संघवी परिवार द्वारा 21वीं सदी में निर्मित यह अद्भुत स्मारक आज भी लोगों में आकर्षण और जिज्ञासा का केंद्र बना हुआ है।

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डिग्री आर्थिक बदलाव लाती है, दीक्षा देती है मन की शांति — साध्वी रूपातीत रेखाश्रीजी 

ब्यूरो चीफ: इमरान खान, सिरोही

शिक्षा ग्रहण करने के बाद मिलने वाली डिग्री भले ही आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव ला सकती है, लेकिन संयम जीवन यानी दीक्षा लेने से व्यक्ति को आंतरिक सुख और मन की सच्ची शांति प्राप्त होती है। ये विचार जैन साध्वी रूपातीत रेखाश्रीजी ने हाईवर्ड यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त एक प्रतिनिधिमंडल के समक्ष व्यक्त किए।

आर.के. ट्रस्ट बेंगलुरू के चेयरमैन रमेश कुमार शाह के नेतृत्व में हाईवर्ड यूनिवर्सिटी से शिक्षित प्रतिभाओं का एक प्रतिनिधिमंडल श्री पावापुरी तीर्थ-जीव मैत्रीधाम के अवलोकन के लिए पहुंचा। इस दौरान दल के सदस्यों की नजर वहां विराजित युवा साध्वियों पर पड़ी, जिसके बाद उन्होंने उनसे मिलने और जिज्ञासाओं के समाधान की इच्छा जताई। पावापुरी ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी महावीर जैन ने प्रतिनिधिमंडल की साध्वियों से भेंट करवाई।

प्रतिनिधिमंडल ने साध्वियों के समक्ष अनेक प्रश्न रखे, जिनका साध्वियों ने तार्किक और सरल उत्तर देकर समाधान किया। इससे दल के सदस्य प्रभावित हुए और उन्हें जैन साधु-साध्वियों के अनुशासित और कठिन जीवन के बारे में जानने का अवसर मिला। साध्वी रूपातीत रेखाश्रीजी ने जैन धर्म के सिद्धांतों को सरलता से समझाते हुए उनकी जिज्ञासाओं को शांत किया।

उन्होंने बताया कि आचार्य गुणरत्नसूरीजी के समुदाय की साध्वी रूपातीत रेखाश्रीजी की गुरूमैया साध्वी हेमलरेखाश्रीजी ने मात्र 7 वर्ष की आयु में दीक्षा ग्रहण की थी और वर्तमान में उन्हें दीक्षा लिए 26 वर्ष हो चुके हैं। वहीं इस समुदाय की प्रवर्तनी साध्वी पुण्यरेखाश्रीजी की 490 शिष्याएं हैं।

साध्वीजी ने कहा कि प्रभु महावीर सहित 24 तीर्थंकरों और अनंत सिद्ध भगवंतों के पास अथाह संपत्ति, राजवैभव और मान-सम्मान होते हुए भी उन्होंने आत्मिक सुख प्राप्त करने के लिए संयम मार्ग अपनाया और परिवार व राजवैभव का त्याग कर आत्मा का कल्याण करते हुए सिद्ध गति को प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि शक्ति, त्याग और आत्मकल्याण की साधना प्रभु की कृपा से प्राप्त होती है तथा संयम जीवन की नींव देव और गुरु हैं।

सांसारिक जीवन और संयम जीवन के अंतर के बारे में बताते हुए साध्वीजी ने कहा कि सांसारिक जीवन में चाहे कितना भी सुख हो, व्यक्ति को अधीनता का जीवन जीना पड़ता है, जबकि संयम मार्ग में प्रभु और गुरु के आश्रय में रहकर आत्मकल्याण संभव है।

किसी भी जीव को मेरे कारण दुःख न पहुंचे

साध्वियों ने प्रतिनिधिमंडल को जैन धर्म के मूल सिद्धांत, अहिंसा परमो धर्म और भगवान महावीर के संदेश “जीओ और जीने दो” की महिमा समझाते हुए कहा कि जीवन में व्यक्ति चाहे कोई भी धर्म अपनाए, लेकिन उसे यह भाव अवश्य रखना चाहिए कि उसके कारण किसी भी जीव—चाहे छोटा हो या बड़ा—को दुःख न पहुंचे।

प्रतिनिधिमंडल ने साध्वी समर्पणलीनाश्रीजी से भी भेंट कर उनसे कई जिज्ञासाओं के उत्तर प्राप्त किए।

प्रतिनिधिमंडल ने एम.एस. बिट्टा से भी की मुलाकात

पावापुरी में प्रतिनिधिमंडल ने आतंकवाद विरोधी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एम.एस. बिट्टा से भी मुलाकात की और उनके राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत विचारों को सुना। इस प्रतिनिधिमंडल में रमेश कुमार शाह के अलावा उज्ज्वला शाह, मेघना, प्रतिभा कामत, रेणु, सरोज, उमा और श्रीराम शामिल थे। सभी सदस्य देश के विभिन्न महानगरों में व्यवसाय से जुड़े हुए हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने मंदिर में पार्श्वनाथ भगवान के दर्शन किए, गौशाला में गौपूजन किया तथा आर्ट गैलरी का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि के.पी. संघवी परिवार द्वारा 21वीं सदी में निर्मित यह अद्भुत स्मारक आज भी लोगों में आकर्षण और जिज्ञासा का केंद्र बना हुआ है।

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