Tuesday, April 21, 2026

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विकास से कोसों दूर तोरणी गांव: आज भी पानी, सड़क और इलाज के लिए तरस रहे लो

जिला ब्यूरों: चंचलेश इन्दौरकर

बिछुआ (छिंदवाड़ा)

जनपद पंचायत बिछुआ अंतर्गत ग्राम पंचायत चकारा के ग्राम तोरणी में आज भी आदिवासी मवासी समाज के लोग विकास की बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। आजादी के दशकों बाद भी गांव में पेयजल, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हो सकी हैं, जिससे ग्रामीण खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

करीब 500 की आबादी वाले इस गांव में शिक्षा का स्तर भी बेहद कम है। जहां केवल 50 प्रतिशत पुरुष और महज 20 प्रतिशत महिलाएं ही शिक्षित हैं। गांव में पेयजल आपूर्ति, आंगनवाड़ी भवन, प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार के अवसरों का अभाव बना हुआ है।

स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव, मरीजों को दूर ले जाना मजबूरी
गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं होने के कारण गंभीर मरीजों को इलाज के लिए रामाकोना, नागपुर या छिंदवाड़ा के निजी अस्पतालों में ले जाना पड़ता है। इससे समय और आर्थिक दोनों तरह की परेशानियां बढ़ जाती हैं।

खुले में शौच को मजबूर 80 प्रतिशत आबादी
स्वच्छता की स्थिति भी चिंताजनक है। गांव के लगभग 80 प्रतिशत लोग खुले में शौच के लिए मजबूर हैं, जबकि केवल 20 प्रतिशत घरों में ही शौचालय की सुविधा उपलब्ध है। इससे संक्रमण और बीमारियों का खतरा बना रहता है।

सड़क और परिवहन की समस्या, बारिश में हालात बदतर
मुख्य सड़कें पक्की होने के बावजूद गांव की कई आंतरिक सड़कें कच्ची हैं, जो बारिश के समय कीचड़ से भर जाती हैं। बरसात के दिनों में बाढ़ के कारण गांव लगभग दो महीने तक चारों ओर से पानी से घिरा रहता है, जिससे आवागमन बाधित हो जाता है।

ग्रामीणों की मांगें—पानी, शिक्षा और रोजगार प्राथमिकता
ग्रामीणों ने पेयजल आपूर्ति, आंगनवाड़ी भवन, प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय, स्वास्थ्य सुविधाओं और रोजगार के अवसरों की मांग प्रमुखता से उठाई। किसानों ने सिंचाई की समुचित व्यवस्था और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की भी मांग की।

चुनाव के समय ही नजर आते हैं जनप्रतिनिधि
ग्रामीणों का आरोप है कि जनप्रतिनिधि केवल चुनाव के समय गांव में आते हैं और विकास के वादे कर चले जाते हैं, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कार्य नहीं होता।

स्वच्छता अभियान बेअसर, गंदगी से बेहाल गांव
ग्राम पंचायत चकारा में लंबे समय से साफ-सफाई नहीं होने से जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं। नालियां जाम हैं और गंदा पानी सड़कों पर फैल रहा है। इससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है और ग्रामीण बदबू व संक्रमण के खतरे से जूझ रहे हैं।
प्रधानमंत्री द्वारा चलाया गया स्वच्छता अभियान भी यहां बेअसर नजर आ रहा है।

अन्य सुविधाओं का भी अभाव
गांव में सार्वजनिक शौचालय, पेयजल के लिए प्याऊ, खेल मैदान और पार्किंग जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं। इससे ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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विकास से कोसों दूर तोरणी गांव: आज भी पानी, सड़क और इलाज के लिए तरस रहे लो

जिला ब्यूरों: चंचलेश इन्दौरकर

बिछुआ (छिंदवाड़ा)

जनपद पंचायत बिछुआ अंतर्गत ग्राम पंचायत चकारा के ग्राम तोरणी में आज भी आदिवासी मवासी समाज के लोग विकास की बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। आजादी के दशकों बाद भी गांव में पेयजल, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हो सकी हैं, जिससे ग्रामीण खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

करीब 500 की आबादी वाले इस गांव में शिक्षा का स्तर भी बेहद कम है। जहां केवल 50 प्रतिशत पुरुष और महज 20 प्रतिशत महिलाएं ही शिक्षित हैं। गांव में पेयजल आपूर्ति, आंगनवाड़ी भवन, प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार के अवसरों का अभाव बना हुआ है।

स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव, मरीजों को दूर ले जाना मजबूरी
गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं होने के कारण गंभीर मरीजों को इलाज के लिए रामाकोना, नागपुर या छिंदवाड़ा के निजी अस्पतालों में ले जाना पड़ता है। इससे समय और आर्थिक दोनों तरह की परेशानियां बढ़ जाती हैं।

खुले में शौच को मजबूर 80 प्रतिशत आबादी
स्वच्छता की स्थिति भी चिंताजनक है। गांव के लगभग 80 प्रतिशत लोग खुले में शौच के लिए मजबूर हैं, जबकि केवल 20 प्रतिशत घरों में ही शौचालय की सुविधा उपलब्ध है। इससे संक्रमण और बीमारियों का खतरा बना रहता है।

सड़क और परिवहन की समस्या, बारिश में हालात बदतर
मुख्य सड़कें पक्की होने के बावजूद गांव की कई आंतरिक सड़कें कच्ची हैं, जो बारिश के समय कीचड़ से भर जाती हैं। बरसात के दिनों में बाढ़ के कारण गांव लगभग दो महीने तक चारों ओर से पानी से घिरा रहता है, जिससे आवागमन बाधित हो जाता है।

ग्रामीणों की मांगें—पानी, शिक्षा और रोजगार प्राथमिकता
ग्रामीणों ने पेयजल आपूर्ति, आंगनवाड़ी भवन, प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय, स्वास्थ्य सुविधाओं और रोजगार के अवसरों की मांग प्रमुखता से उठाई। किसानों ने सिंचाई की समुचित व्यवस्था और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की भी मांग की।

चुनाव के समय ही नजर आते हैं जनप्रतिनिधि
ग्रामीणों का आरोप है कि जनप्रतिनिधि केवल चुनाव के समय गांव में आते हैं और विकास के वादे कर चले जाते हैं, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कार्य नहीं होता।

स्वच्छता अभियान बेअसर, गंदगी से बेहाल गांव
ग्राम पंचायत चकारा में लंबे समय से साफ-सफाई नहीं होने से जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं। नालियां जाम हैं और गंदा पानी सड़कों पर फैल रहा है। इससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है और ग्रामीण बदबू व संक्रमण के खतरे से जूझ रहे हैं।
प्रधानमंत्री द्वारा चलाया गया स्वच्छता अभियान भी यहां बेअसर नजर आ रहा है।

अन्य सुविधाओं का भी अभाव
गांव में सार्वजनिक शौचालय, पेयजल के लिए प्याऊ, खेल मैदान और पार्किंग जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं। इससे ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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