Tuesday, April 21, 2026

National

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बदनावर में कथा का अद्भुत समागम, कृष्ण जन्मोत्सव पर झूमे हजारों श्रद्धालु

ब्यूरो रिपोर्ट: विजय द्विवेदी

बदनावर, धार।
समीपस्थ ग्राम पिंजराया में गोहिल परिवार द्वारा आयोजित सात दिवसीय संगीतमय कथा के चौथे दिन श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। मालवी के प्रखर वक्ता एवं लोकप्रिय कथावाचक पंडित कमलकिशोर नागर ने अपने सारगर्भित प्रवचनों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

कथावाचक नागर ने कहा कि आज व्यक्ति डॉक्टर और वकील की बात मानता है, लेकिन महात्माओं की सीख को नजरअंदाज कर देता है। यदि मनुष्य महात्मा की वाणी को भी उतना ही महत्व दे, तो वह सहज ही भवसागर से पार हो सकता है। उन्होंने कहा कि “माँ, महात्मा और परमात्मा – तीनों ने हमें जीवन का मार्ग दिखाया है, लेकिन हम तीनों की बात नहीं मानते, यही हमारी सबसे बड़ी भूल है।”

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे बिना नाम लिए पापड़ नहीं मिलता, वैसे ही बिना प्रभु का नाम लिए परमात्मा की प्राप्ति संभव नहीं है। “घड़ी की दुकान पर घड़ी सुधरती है, समय नहीं; यदि जीवन का समय सुधारना है तो हरि के द्वार जाना होगा,” इस संदेश ने उपस्थित श्रद्धालुओं को गहराई से प्रभावित किया।

नागर ने आगे कहा कि गुरु के वचन ही जीवन का आधार हैं। जीवन के अंतिम समय में हर व्यक्ति राम का ही नाम लेता है, क्योंकि सत्य अंततः वही है। उन्होंने समाज में व्याप्त विडंबना पर कटाक्ष करते हुए कहा कि एक अनपढ़ मजदूर भी अभिवादन में ‘राम-राम’ कहता है, जबकि पढ़ा-लिखा व्यक्ति इससे कतराता है।

उन्होंने मंगलसूत्र का उदाहरण देते हुए समझाया कि उसमें कई रंगों के मोती होते हैं, लेकिन उसकी शोभा एक ही पेंडल से होती है। उसी प्रकार भले ही व्यक्ति किसी भी मार्ग का अनुयायी हो, अंततः सभी का लक्ष्य भगवान राम ही हैं।

निर्दोष जीवन जीने का संदेश
कथावाचक ने कहा कि मनुष्य को जीवन में दुख सहकर भी निर्दोष रहना चाहिए, लेकिन दोषी बनकर नहीं जीना चाहिए। “भगवान के दरबार में जाना है तो निर्दोष होकर जाएं। संतों ने भी जीवन में कष्ट सहे हैं, लेकिन सत्य और भक्ति का मार्ग नहीं छोड़ा,” उन्होंने कहा।
उन्होंने यह भी कहा कि जब पुलिस द्वारा रोकी गई गाड़ी बड़े व्यक्ति का नाम लेने पर छूट सकती है, तो परमात्मा का नाम लेने से मनुष्य का जीवन क्यों नहीं सुधर सकता।

बाल संत गोविन्द नागर ने भी किया प्रेरित
कथा के चौथे दिन बाल संत एवं नागर के पौत्र गोविन्द हाटकेश नागर ने भी लगभग आधे घंटे के प्रवचन में कहा कि पुण्य, भजन और त्याग कभी व्यर्थ नहीं जाते। उन्होंने लकड़ी के उदाहरण से समझाया कि उसका हर रूप – धुआं, अंगारा और राख – किसी न किसी काम आता है, वैसे ही भक्ति का भी हर रूप फलदायी होता है।

उन्होंने कहा कि “व्यक्ति अवगुणों की चोरी करता है, गुणों की नहीं”, इसलिए हमें सद्गुणों को अपनाने का प्रयास करना चाहिए। निरोगी शरीर परमात्मा की भक्ति के लिए मिला है, इसका सदुपयोग करना चाहिए।

कृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया
कथा के दौरान कृष्ण जन्मोत्सव बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर 4 माह के बालक योगेंद्र सिंह बोडानिया को बाल कृष्ण के रूप में सजाकर मंच पर लाया गया। मंच पर आते ही “कृष्ण कन्हैया लाल की जय” के जयकारों से पूरा पांडाल गूंज उठा और श्रद्धालु भजनों की धुन पर झूम उठे। कथावाचक नागर ने भी बाल कृष्ण को स्नेहपूर्वक दुलार किया।

कार्यक्रम की जानकारी गोवर्धन सिंह डोडिया खिलेड़ी एवं महेंद्र सिंह चावड़ा द्वारा दी गई। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर धर्मलाभ ले रहे हैं।

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बदनावर में कथा का अद्भुत समागम, कृष्ण जन्मोत्सव पर झूमे हजारों श्रद्धालु

ब्यूरो रिपोर्ट: विजय द्विवेदी

बदनावर, धार।
समीपस्थ ग्राम पिंजराया में गोहिल परिवार द्वारा आयोजित सात दिवसीय संगीतमय कथा के चौथे दिन श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। मालवी के प्रखर वक्ता एवं लोकप्रिय कथावाचक पंडित कमलकिशोर नागर ने अपने सारगर्भित प्रवचनों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

कथावाचक नागर ने कहा कि आज व्यक्ति डॉक्टर और वकील की बात मानता है, लेकिन महात्माओं की सीख को नजरअंदाज कर देता है। यदि मनुष्य महात्मा की वाणी को भी उतना ही महत्व दे, तो वह सहज ही भवसागर से पार हो सकता है। उन्होंने कहा कि “माँ, महात्मा और परमात्मा – तीनों ने हमें जीवन का मार्ग दिखाया है, लेकिन हम तीनों की बात नहीं मानते, यही हमारी सबसे बड़ी भूल है।”

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे बिना नाम लिए पापड़ नहीं मिलता, वैसे ही बिना प्रभु का नाम लिए परमात्मा की प्राप्ति संभव नहीं है। “घड़ी की दुकान पर घड़ी सुधरती है, समय नहीं; यदि जीवन का समय सुधारना है तो हरि के द्वार जाना होगा,” इस संदेश ने उपस्थित श्रद्धालुओं को गहराई से प्रभावित किया।

नागर ने आगे कहा कि गुरु के वचन ही जीवन का आधार हैं। जीवन के अंतिम समय में हर व्यक्ति राम का ही नाम लेता है, क्योंकि सत्य अंततः वही है। उन्होंने समाज में व्याप्त विडंबना पर कटाक्ष करते हुए कहा कि एक अनपढ़ मजदूर भी अभिवादन में ‘राम-राम’ कहता है, जबकि पढ़ा-लिखा व्यक्ति इससे कतराता है।

उन्होंने मंगलसूत्र का उदाहरण देते हुए समझाया कि उसमें कई रंगों के मोती होते हैं, लेकिन उसकी शोभा एक ही पेंडल से होती है। उसी प्रकार भले ही व्यक्ति किसी भी मार्ग का अनुयायी हो, अंततः सभी का लक्ष्य भगवान राम ही हैं।

निर्दोष जीवन जीने का संदेश
कथावाचक ने कहा कि मनुष्य को जीवन में दुख सहकर भी निर्दोष रहना चाहिए, लेकिन दोषी बनकर नहीं जीना चाहिए। “भगवान के दरबार में जाना है तो निर्दोष होकर जाएं। संतों ने भी जीवन में कष्ट सहे हैं, लेकिन सत्य और भक्ति का मार्ग नहीं छोड़ा,” उन्होंने कहा।
उन्होंने यह भी कहा कि जब पुलिस द्वारा रोकी गई गाड़ी बड़े व्यक्ति का नाम लेने पर छूट सकती है, तो परमात्मा का नाम लेने से मनुष्य का जीवन क्यों नहीं सुधर सकता।

बाल संत गोविन्द नागर ने भी किया प्रेरित
कथा के चौथे दिन बाल संत एवं नागर के पौत्र गोविन्द हाटकेश नागर ने भी लगभग आधे घंटे के प्रवचन में कहा कि पुण्य, भजन और त्याग कभी व्यर्थ नहीं जाते। उन्होंने लकड़ी के उदाहरण से समझाया कि उसका हर रूप – धुआं, अंगारा और राख – किसी न किसी काम आता है, वैसे ही भक्ति का भी हर रूप फलदायी होता है।

उन्होंने कहा कि “व्यक्ति अवगुणों की चोरी करता है, गुणों की नहीं”, इसलिए हमें सद्गुणों को अपनाने का प्रयास करना चाहिए। निरोगी शरीर परमात्मा की भक्ति के लिए मिला है, इसका सदुपयोग करना चाहिए।

कृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया
कथा के दौरान कृष्ण जन्मोत्सव बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर 4 माह के बालक योगेंद्र सिंह बोडानिया को बाल कृष्ण के रूप में सजाकर मंच पर लाया गया। मंच पर आते ही “कृष्ण कन्हैया लाल की जय” के जयकारों से पूरा पांडाल गूंज उठा और श्रद्धालु भजनों की धुन पर झूम उठे। कथावाचक नागर ने भी बाल कृष्ण को स्नेहपूर्वक दुलार किया।

कार्यक्रम की जानकारी गोवर्धन सिंह डोडिया खिलेड़ी एवं महेंद्र सिंह चावड़ा द्वारा दी गई। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर धर्मलाभ ले रहे हैं।

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