ब्यूरो चीफ: उमेश पाठक
रीवा (मनगवां)।
डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर रीवा जिले के मनगवां क्षेत्र में एक भव्य एवं गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन ने पूरे क्षेत्र में सामाजिक जागरूकता, समानता और एकता का सशक्त संदेश प्रसारित किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ समाजसेवी, पूर्व विधानसभा प्रत्याशी एवं भारतीय सर्व सेवा संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष हाफिज कारी मोहम्मद अली की विशेष उपस्थिति रही।
कार्यक्रम स्थल पर सुबह से ही भारी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों में विशेष उत्साह देखने को मिला। मंच को आकर्षक ढंग से सजाया गया था तथा बाबा साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। पूरे आयोजन स्थल पर “जय भीम” के नारों की गूंज से वातावरण गुंजायमान रहा।
अपने प्रभावशाली संबोधन में हाफिज कारी मोहम्मद अली ने कहा कि डॉ. अंबेडकर का जीवन केवल एक महान व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि करोड़ों वंचितों और शोषितों के संघर्ष की जीवंत प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि बाबा साहब ने अपने ज्ञान, संघर्ष और अदम्य इच्छाशक्ति के बल पर देश को ऐसा संविधान दिया, जो हर नागरिक को समान अधिकार और न्याय की गारंटी प्रदान करता है।
उन्होंने संविधान की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसके माध्यम से सभी वर्गों—चाहे वे किसी भी जाति, धर्म या समाज से हों—को बराबरी का दर्जा मिला है। उन्होंने आरक्षण व्यवस्था को सामाजिक न्याय की रीढ़ बताते हुए कहा कि यह व्यवस्था उन वर्गों के लिए सशक्त आधार बनी, जो वर्षों तक मुख्यधारा से दूर रहे।
युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है कि हम बाबा साहब के विचारों को अपने जीवन में आत्मसात करें और संविधान की रक्षा के लिए सदैव सजग रहें। “शिक्षा, एकता और जागरूकता ही समाज को आगे बढ़ाने का मार्ग है,” उन्होंने कहा।
कार्यक्रम के दौरान अन्य वक्ताओं ने भी बाबा साहब के जीवन, संघर्ष और उनके योगदान पर विस्तृत प्रकाश डाला। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में समाज में भाईचारा, समानता और न्याय को सुदृढ़ करने का संकल्प व्यक्त किया।
इस अवसर पर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों एवं युवाओं ने शानदार प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी लोगों ने संविधान के मूल्यों को अपनाने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का सामूहिक संकल्प लिया।
यह आयोजन केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज को नई दिशा देने वाला प्रेरणादायक संदेश भी बनकर उभरा, जिसने रीवा जिले में नई ऊर्जा और जागरूकता का संचार किया।




