ब्यूरो रिपोर्ट: महेश पांडुरंग शेंडे
गडचिरोली। स्त्री-भ्रूण हत्या पर रोक लगाने, जनजागरूकता बढ़ाने और संबंधित कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला महिला एवं बाल अस्पताल, गडचिरोली में गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (PCPNDT) कानून पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया।
कार्यशाला में स्त्री भ्रूण हत्या निषेध, लिंग अनुपात के सामाजिक महत्व तथा PCPNDT कानून के प्रावधानों और उसके सख्त पालन पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया। इसके साथ ही गर्भपात (चिकित्सकीय समाप्ति) अधिनियम, सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (ART) कानून और सरोगेसी अधिनियम की जानकारी भी प्रतिभागियों को दी गई। कानूनों के उल्लंघन पर होने वाली दंडात्मक कार्रवाई के बारे में भी स्पष्ट रूप से बताया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव ए.पी. खानोरकर, अतिरिक्त जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संतोष कोकड़े एवं सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती सविता गोविंदवार उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में PCPNDT कानून के सामाजिक और कानूनी महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि स्त्री-भ्रूण हत्या एक गंभीर सामाजिक समस्या है, जिसके उन्मूलन के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा।
इस अवसर पर जिला शल्य चिकित्सक डॉ. वर्षा लहाडे ने गर्भपात अधिनियम, ART अधिनियम और सरोगेसी कानून पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए चिकित्सा अधिकारियों और संस्थानों को कानून के पालन में बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में जानकारी दी।
कार्यशाला में डॉ. छाया उईके, डॉ. प्रशांत पेंदाम, डॉ. नीलकंठ मसराम, डॉ. प्रशांत आखड़े, एडवोकेट तृप्ति राउत एवं श्रीमती प्रतिज्ञा रामटेके सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, आशा कार्यकर्ता, सामाजिक कार्यकर्ता, जिला सलाहकार समिति के सदस्य तथा निजी सोनोग्राफी केंद्र संचालक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान PCPNDT अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन, रिकॉर्ड संधारण, पंजीकरण प्रक्रिया और जांच के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर विशेष मार्गदर्शन दिया गया। इससे चिकित्सा पेशेवरों में कानून के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद मिली।
अंत में सभी प्रतिभागियों ने PCPNDT अधिनियम के पालन की शपथ लेते हुए कन्या भ्रूण हत्या रोकने और समाज में लिंग संतुलन बनाए रखने का संकल्प लिया।




