Friday, May 8, 2026

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झुंझुनूं की श्रीराम कथा में उमड़ा आस्था का सैलाब, महाराज धर्मदास जी ने सुनाया भक्ति और त्याग

ब्यूरो चीफ: सुरेश सैनी

झुंझुनूं, 7 मई। शहर के चूना चौक स्थित रामलीला मैदान में आयोजित श्रीराम कथा के सप्तम दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास धर्मदास जी ने भगवान श्रीराम, माता जानकी, जटायु और हनुमान जी के प्रसंगों का भावपूर्ण एवं ओजस्वी वर्णन कर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

कथा के दौरान महाराज धर्मदास जी ने स्वर्ण मृग प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि माता सीता के आग्रह पर भगवान श्रीराम स्वर्ण मृग के पीछे गए और बाद में लक्ष्मण जी भी उनकी खोज में वन की ओर चले गए। इसी दौरान रावण साधु वेश में आया और माता जानकी का हरण कर पुष्पक विमान से लंका ले गया।

कथा व्यास ने जटायु प्रसंग का मार्मिक वर्णन करते हुए कहा कि धर्म और नारी सम्मान की रक्षा के लिए जटायु ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना रावण से युद्ध किया। रावण द्वारा घायल किए जाने के बाद जब भगवान श्रीराम जटायु के पास पहुंचे तो उसने अंतिम क्षणों में पूरी घटना बताई। भगवान श्रीराम ने जटायु को पिता तुल्य मानकर उसे मोक्ष प्रदान किया। इस प्रसंग को सुनकर कथा पांडाल में मौजूद कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।

आगे के प्रसंग में महाराज धर्मदास जी ने भगवान श्रीराम और हनुमान जी की प्रथम भेंट का वर्णन करते हुए रामभक्ति, सेवा और समर्पण का संदेश दिया। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति गीतों और जयकारों के साथ भक्तिमय वातावरण में डूबे नजर आए।

रामलीला मैदान को आकर्षक विद्युत सज्जा एवं धार्मिक झांकियों से सजाया गया था, जिससे पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत दिखाई दिया। कथा के दौरान देर रात तक “जय श्रीराम” के उद्घोष गूंजते रहे।

इस अवसर पर विनोद पुजारी, पवन शर्मा देरवाला, शिवचरण पुरोहित, बालमुकुंद शर्मा, गोपीराम पुरोहित, मोहन पुरोहित, संजय भार्गव, पूर्व पार्षद विनोद सिंघानिया सहित शहर के अनेक गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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झुंझुनूं की श्रीराम कथा में उमड़ा आस्था का सैलाब, महाराज धर्मदास जी ने सुनाया भक्ति और त्याग

ब्यूरो चीफ: सुरेश सैनी

झुंझुनूं, 7 मई। शहर के चूना चौक स्थित रामलीला मैदान में आयोजित श्रीराम कथा के सप्तम दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास धर्मदास जी ने भगवान श्रीराम, माता जानकी, जटायु और हनुमान जी के प्रसंगों का भावपूर्ण एवं ओजस्वी वर्णन कर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

कथा के दौरान महाराज धर्मदास जी ने स्वर्ण मृग प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि माता सीता के आग्रह पर भगवान श्रीराम स्वर्ण मृग के पीछे गए और बाद में लक्ष्मण जी भी उनकी खोज में वन की ओर चले गए। इसी दौरान रावण साधु वेश में आया और माता जानकी का हरण कर पुष्पक विमान से लंका ले गया।

कथा व्यास ने जटायु प्रसंग का मार्मिक वर्णन करते हुए कहा कि धर्म और नारी सम्मान की रक्षा के लिए जटायु ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना रावण से युद्ध किया। रावण द्वारा घायल किए जाने के बाद जब भगवान श्रीराम जटायु के पास पहुंचे तो उसने अंतिम क्षणों में पूरी घटना बताई। भगवान श्रीराम ने जटायु को पिता तुल्य मानकर उसे मोक्ष प्रदान किया। इस प्रसंग को सुनकर कथा पांडाल में मौजूद कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।

आगे के प्रसंग में महाराज धर्मदास जी ने भगवान श्रीराम और हनुमान जी की प्रथम भेंट का वर्णन करते हुए रामभक्ति, सेवा और समर्पण का संदेश दिया। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति गीतों और जयकारों के साथ भक्तिमय वातावरण में डूबे नजर आए।

रामलीला मैदान को आकर्षक विद्युत सज्जा एवं धार्मिक झांकियों से सजाया गया था, जिससे पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत दिखाई दिया। कथा के दौरान देर रात तक “जय श्रीराम” के उद्घोष गूंजते रहे।

इस अवसर पर विनोद पुजारी, पवन शर्मा देरवाला, शिवचरण पुरोहित, बालमुकुंद शर्मा, गोपीराम पुरोहित, मोहन पुरोहित, संजय भार्गव, पूर्व पार्षद विनोद सिंघानिया सहित शहर के अनेक गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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