Friday, May 8, 2026

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धाखा गांव में भव्य सामूहिक जनेऊ संस्कार! 80 से अधिक बटुकों ने धारण की यज्ञोपवित

जिला ब्यूरों: जोरा सोलंकी

धानेरा। तहसील क्षेत्र के धाखा गांव में समस्त पंच परगणा श्रीमाली ब्रह्म समाज द्वारा भव्य सामूहिक यज्ञोपवित जनेऊ संस्कार समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न गांवों से आए 80 से अधिक बटुकों ने वैदिक विधि-विधान के साथ जनेऊ धारण की।

यह आयोजन धाखा गांव स्थित कीर्ति भाई एन. त्रिवेदी के फार्म हाउस पर विशाल पांडाल में संपन्न हुआ, जिसमें समाज के करीब पांच हजार से अधिक लोगों ने भाग लिया। भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में समाजजन की उपस्थिति ने कार्यक्रम को भव्य स्वरूप प्रदान किया।

समारोह के दौरान वर्षों बाद समाज के लोग एक ही मंडप के नीचे एकत्रित हुए, जिससे भाईचारे और सामाजिक एकता का संदेश देखने को मिला। सामूहिक जनेऊ संस्कार के माध्यम से समाज ने अनावश्यक खर्चों और दिखावे पर रोक लगाने का संदेश भी दिया। अलग-अलग घरों में कार्यक्रम आयोजित करने के बजाय सभी बटुकों का संस्कार एक ही स्थान पर सामूहिक रूप से कराया गया, जिसे समाज के लिए प्रेरणादायक पहल माना गया।

कार्यक्रम में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सभी धार्मिक अनुष्ठान विधिवत संपन्न कराए गए। समाज की ओर से चाय-नाश्ता एवं भोजन की व्यवस्था भी की गई थी।

इस अवसर पर समाज के अनेक सामाजिक एवं राजनीतिक प्रतिनिधियों ने उपस्थिति दर्ज कराई। वक्ताओं ने समाज में शिक्षा के प्रसार, सामाजिक एकता और संस्कारों के संरक्षण पर विशेष जोर देते हुए नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का आह्वान किया।

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धाखा गांव में भव्य सामूहिक जनेऊ संस्कार! 80 से अधिक बटुकों ने धारण की यज्ञोपवित

जिला ब्यूरों: जोरा सोलंकी

धानेरा। तहसील क्षेत्र के धाखा गांव में समस्त पंच परगणा श्रीमाली ब्रह्म समाज द्वारा भव्य सामूहिक यज्ञोपवित जनेऊ संस्कार समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न गांवों से आए 80 से अधिक बटुकों ने वैदिक विधि-विधान के साथ जनेऊ धारण की।

यह आयोजन धाखा गांव स्थित कीर्ति भाई एन. त्रिवेदी के फार्म हाउस पर विशाल पांडाल में संपन्न हुआ, जिसमें समाज के करीब पांच हजार से अधिक लोगों ने भाग लिया। भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में समाजजन की उपस्थिति ने कार्यक्रम को भव्य स्वरूप प्रदान किया।

समारोह के दौरान वर्षों बाद समाज के लोग एक ही मंडप के नीचे एकत्रित हुए, जिससे भाईचारे और सामाजिक एकता का संदेश देखने को मिला। सामूहिक जनेऊ संस्कार के माध्यम से समाज ने अनावश्यक खर्चों और दिखावे पर रोक लगाने का संदेश भी दिया। अलग-अलग घरों में कार्यक्रम आयोजित करने के बजाय सभी बटुकों का संस्कार एक ही स्थान पर सामूहिक रूप से कराया गया, जिसे समाज के लिए प्रेरणादायक पहल माना गया।

कार्यक्रम में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सभी धार्मिक अनुष्ठान विधिवत संपन्न कराए गए। समाज की ओर से चाय-नाश्ता एवं भोजन की व्यवस्था भी की गई थी।

इस अवसर पर समाज के अनेक सामाजिक एवं राजनीतिक प्रतिनिधियों ने उपस्थिति दर्ज कराई। वक्ताओं ने समाज में शिक्षा के प्रसार, सामाजिक एकता और संस्कारों के संरक्षण पर विशेष जोर देते हुए नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का आह्वान किया।

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