Thursday, April 30, 2026

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लोकमाता अहिल्यादेवी की विरासत का भव्य उत्सव: महेश्वर में ‘गोदा से नर्मदा’ जलयात्रा का समापन

ब्यूरो चीफ: आशाराम कुंडले, खरगोन (मध्य प्रदेश)

खरगोन, 29 अप्रैल 2026। मोहन यादव ने कहा कि अहिल्याबाई होलकर ने एक आदर्श योद्धा, सशक्त शासिका और पुण्यश्लोका के रूप में सनातन संस्कृति को गौरवान्वित किया है। वे महेश्वर में ‘गोदा से नर्मदा’ जलयात्रा के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकमाता अहिल्यादेवी की जन्मत्रिशताब्दी के अवसर पर आयोजित यह जलयात्रा उनकी महान विरासत और जल प्रबंधन की परंपरा को दर्शाती है। उन्होंने महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश को साझा सांस्कृतिक विरासत के कारण “जुड़वां भाई” बताते हुए आयोजन के लिए महाराष्ट्र शासन का अभिनंदन किया।

उन्होंने कहा कि लोकमाता के आदर्श मध्यप्रदेश सरकार की प्रेरणा हैं। इसी के तहत महेश्वर और इंदौर में कैबिनेट बैठकों का आयोजन किया गया। साथ ही महेश्वर के अहिल्याघाट पर प्रतिदिन लाइट एंड साउंड शो के माध्यम से उनके गौरवशाली इतिहास का वर्णन किया जा रहा है। सरकार यहां ‘देवी अहिल्यालोक’ के निर्माण के साथ ही फोरलेन हाईवे और धार्मिक स्थलों को हेली सेवा से जोड़ने जैसे कार्य भी कर रही है।

इस अवसर पर राधाकृष्ण विखे-पाटिल ने कहा कि जलयात्रा का उद्देश्य लोकमाता के जल प्रबंधन और लोककल्याण के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाना है। यात्रा में गोदावरी नदी सहित महाराष्ट्र की 130 नदियों का जल और चोंडी की पवित्र मिट्टी महेश्वर लाई गई।

वहीं चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि यह जलयात्रा आध्यात्म, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक समन्वय का अद्भुत उदाहरण है। कार्यक्रम के अंत में जयकुमार रावल ने आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अन्य अतिथियों के साथ अहिल्याघाट पर मां नर्मदा की महाआरती कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान आकर्षक आतिशबाजी और “नमामि देवी नर्मदे” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

कार्यक्रम में यशवंतराव होलकर, केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर, सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल, शंकर लालवानी सहित कई जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

उल्लेखनीय है कि ‘गोदा से नर्मदा’ जलयात्रा का शुभारंभ 25 अप्रैल 2026 को देवेंद्र फडणवीस एवं एकनाथ शिंदे द्वारा किया गया था। यह यात्रा महाराष्ट्र के 5 और मध्यप्रदेश के 3 जिलों से होकर गुजरते हुए महेश्वर में संपन्न हुई, जिसमें करीब 1000 श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

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लोकमाता अहिल्यादेवी की विरासत का भव्य उत्सव: महेश्वर में ‘गोदा से नर्मदा’ जलयात्रा का समापन

ब्यूरो चीफ: आशाराम कुंडले, खरगोन (मध्य प्रदेश)

खरगोन, 29 अप्रैल 2026। मोहन यादव ने कहा कि अहिल्याबाई होलकर ने एक आदर्श योद्धा, सशक्त शासिका और पुण्यश्लोका के रूप में सनातन संस्कृति को गौरवान्वित किया है। वे महेश्वर में ‘गोदा से नर्मदा’ जलयात्रा के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकमाता अहिल्यादेवी की जन्मत्रिशताब्दी के अवसर पर आयोजित यह जलयात्रा उनकी महान विरासत और जल प्रबंधन की परंपरा को दर्शाती है। उन्होंने महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश को साझा सांस्कृतिक विरासत के कारण “जुड़वां भाई” बताते हुए आयोजन के लिए महाराष्ट्र शासन का अभिनंदन किया।

उन्होंने कहा कि लोकमाता के आदर्श मध्यप्रदेश सरकार की प्रेरणा हैं। इसी के तहत महेश्वर और इंदौर में कैबिनेट बैठकों का आयोजन किया गया। साथ ही महेश्वर के अहिल्याघाट पर प्रतिदिन लाइट एंड साउंड शो के माध्यम से उनके गौरवशाली इतिहास का वर्णन किया जा रहा है। सरकार यहां ‘देवी अहिल्यालोक’ के निर्माण के साथ ही फोरलेन हाईवे और धार्मिक स्थलों को हेली सेवा से जोड़ने जैसे कार्य भी कर रही है।

इस अवसर पर राधाकृष्ण विखे-पाटिल ने कहा कि जलयात्रा का उद्देश्य लोकमाता के जल प्रबंधन और लोककल्याण के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाना है। यात्रा में गोदावरी नदी सहित महाराष्ट्र की 130 नदियों का जल और चोंडी की पवित्र मिट्टी महेश्वर लाई गई।

वहीं चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि यह जलयात्रा आध्यात्म, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक समन्वय का अद्भुत उदाहरण है। कार्यक्रम के अंत में जयकुमार रावल ने आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अन्य अतिथियों के साथ अहिल्याघाट पर मां नर्मदा की महाआरती कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान आकर्षक आतिशबाजी और “नमामि देवी नर्मदे” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

कार्यक्रम में यशवंतराव होलकर, केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर, सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल, शंकर लालवानी सहित कई जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

उल्लेखनीय है कि ‘गोदा से नर्मदा’ जलयात्रा का शुभारंभ 25 अप्रैल 2026 को देवेंद्र फडणवीस एवं एकनाथ शिंदे द्वारा किया गया था। यह यात्रा महाराष्ट्र के 5 और मध्यप्रदेश के 3 जिलों से होकर गुजरते हुए महेश्वर में संपन्न हुई, जिसमें करीब 1000 श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

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