Wednesday, May 6, 2026

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रैतिया पैलेस में साहित्यकार डॉ. कैलाश मण्डेला का भव्य अभिनंदन, धरोहर संरक्षण पर दिया जोर

ब्यूरो रिपोर्ट: राजेन्द्र खटीक

शाहपुरा, 5 मई।
राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साहित्य के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान बना चुके केंद्रीय साहित्य अकादमी से सम्मानित साहित्यकार डॉ. कैलाश मण्डेला का शाहपुरा में भव्य अभिनंदन किया गया। ऐतिहासिक रैतिया पैलेस में आयोजित इस समारोह में गणमान्य नागरिकों एवं राजपरिवार की उपस्थिति में स्वागत एवं सहभोज का आयोजन हुआ। आजादी के बाद यह पहला अवसर रहा जब किसी आम व्यक्ति का रैतिया पैलेस के विशिष्ट हॉल में इस प्रकार सम्मान किया गया।

कार्यक्रम में राजपरिवार के प्रतिनिधि राजाधिराज जयसिंह ने डॉ. मण्डेला को “शाहपुरा का कोहेनूर” बताते हुए उनके साहित्यिक योगदान की सराहना की। उन्होंने घोषणा की कि प्रतिवर्ष एक नवोदित प्रतिभा को डॉ. मण्डेला के नाम पर ट्रॉफी एवं नगद राशि देकर सम्मानित किया जाएगा। साथ ही उनके कृतित्व पर शोध की आवश्यकता भी जताई गई।

समारोह का संचालन प्रसिद्ध हास्य कवि दिनेश बंटी ने किया, जिन्होंने डॉ. मण्डेला के व्यक्तित्व और कृतित्व के विभिन्न पहलुओं को प्रस्तुत किया। आर्य समाज के प्रतिनिधि हीरालाल आर्य, सुनील बेली एवं गोपाल राजगुरु ने ‘सत्यार्थ प्रकाश’ की प्रति भेंट कर उनका स्वागत किया।

इस अवसर पर तैराकी संघ के संरक्षक नरेश बूलिया, वरिष्ठ नागरिक संघ के राजेंद्र बोहरा ललजी, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डॉ. हरमल रेबारी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांतीय प्रतिनिधि डॉ. सत्यनारायण कुमावत, अभिभाषक दुर्गा लाल राजोरा सहित कई वक्ताओं ने डॉ. मण्डेला की साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में दी गई सेवाओं की सराहना की।

साहित्य सृजन कला संगम के अध्यक्ष जयदेव जोशी ने काव्यमय प्रस्तुति से समारोह को भावपूर्ण बना दिया। अपने संबोधन में डॉ. मण्डेला ने शाहपुरा की सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि सार्वजनिक पुस्तकालयों को पुनः सक्रिय किया जाना चाहिए। उन्होंने श्री उम्मेद सार्वजनिक पुस्तकालय में उपेक्षित पड़ी बहुमूल्य पुस्तकों के संरक्षण एवं आमजन के लिए पुनः संचालन की आवश्यकता बताई।

डॉ. मण्डेला ने कहा कि इतिहास को जानना और समझना नई पीढ़ी के लिए बेहद आवश्यक है। उन्होंने अपनी रचनाओं की कविताओं एवं ओजस्वी गीतों की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम को गरिमामय बना दिया। इस अवसर पर उन्होंने अपना एवं लोककवि मोहन मण्डेला का साहित्य राजाधिराज जयसिंह को भेंट किया।

देर शाम तक चले इस आयोजन में समाजसेवी रामस्वरूप काबरा, प्रियकांत शर्मा, अखिल व्यास, कवि शिव प्रकाश जोशी, राधाकृष्ण धाबाई, ज्योतिषाचार्य पं. सुनील भट्ट, सत्यव्रत वैष्णव सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं राजपरिवार के सदस्य उपस्थित रहे।

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रैतिया पैलेस में साहित्यकार डॉ. कैलाश मण्डेला का भव्य अभिनंदन, धरोहर संरक्षण पर दिया जोर

ब्यूरो रिपोर्ट: राजेन्द्र खटीक

शाहपुरा, 5 मई।
राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साहित्य के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान बना चुके केंद्रीय साहित्य अकादमी से सम्मानित साहित्यकार डॉ. कैलाश मण्डेला का शाहपुरा में भव्य अभिनंदन किया गया। ऐतिहासिक रैतिया पैलेस में आयोजित इस समारोह में गणमान्य नागरिकों एवं राजपरिवार की उपस्थिति में स्वागत एवं सहभोज का आयोजन हुआ। आजादी के बाद यह पहला अवसर रहा जब किसी आम व्यक्ति का रैतिया पैलेस के विशिष्ट हॉल में इस प्रकार सम्मान किया गया।

कार्यक्रम में राजपरिवार के प्रतिनिधि राजाधिराज जयसिंह ने डॉ. मण्डेला को “शाहपुरा का कोहेनूर” बताते हुए उनके साहित्यिक योगदान की सराहना की। उन्होंने घोषणा की कि प्रतिवर्ष एक नवोदित प्रतिभा को डॉ. मण्डेला के नाम पर ट्रॉफी एवं नगद राशि देकर सम्मानित किया जाएगा। साथ ही उनके कृतित्व पर शोध की आवश्यकता भी जताई गई।

समारोह का संचालन प्रसिद्ध हास्य कवि दिनेश बंटी ने किया, जिन्होंने डॉ. मण्डेला के व्यक्तित्व और कृतित्व के विभिन्न पहलुओं को प्रस्तुत किया। आर्य समाज के प्रतिनिधि हीरालाल आर्य, सुनील बेली एवं गोपाल राजगुरु ने ‘सत्यार्थ प्रकाश’ की प्रति भेंट कर उनका स्वागत किया।

इस अवसर पर तैराकी संघ के संरक्षक नरेश बूलिया, वरिष्ठ नागरिक संघ के राजेंद्र बोहरा ललजी, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डॉ. हरमल रेबारी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांतीय प्रतिनिधि डॉ. सत्यनारायण कुमावत, अभिभाषक दुर्गा लाल राजोरा सहित कई वक्ताओं ने डॉ. मण्डेला की साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में दी गई सेवाओं की सराहना की।

साहित्य सृजन कला संगम के अध्यक्ष जयदेव जोशी ने काव्यमय प्रस्तुति से समारोह को भावपूर्ण बना दिया। अपने संबोधन में डॉ. मण्डेला ने शाहपुरा की सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि सार्वजनिक पुस्तकालयों को पुनः सक्रिय किया जाना चाहिए। उन्होंने श्री उम्मेद सार्वजनिक पुस्तकालय में उपेक्षित पड़ी बहुमूल्य पुस्तकों के संरक्षण एवं आमजन के लिए पुनः संचालन की आवश्यकता बताई।

डॉ. मण्डेला ने कहा कि इतिहास को जानना और समझना नई पीढ़ी के लिए बेहद आवश्यक है। उन्होंने अपनी रचनाओं की कविताओं एवं ओजस्वी गीतों की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम को गरिमामय बना दिया। इस अवसर पर उन्होंने अपना एवं लोककवि मोहन मण्डेला का साहित्य राजाधिराज जयसिंह को भेंट किया।

देर शाम तक चले इस आयोजन में समाजसेवी रामस्वरूप काबरा, प्रियकांत शर्मा, अखिल व्यास, कवि शिव प्रकाश जोशी, राधाकृष्ण धाबाई, ज्योतिषाचार्य पं. सुनील भट्ट, सत्यव्रत वैष्णव सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं राजपरिवार के सदस्य उपस्थित रहे।

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