ब्यूरो रिपोर्ट: विजय द्विवेदी
धार, 29 मई। बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के प्रभावी उन्मूलन और रोकथाम के लिए धार जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग के निर्देशों के तहत कलेक्टर Rajiv Ranjan Meena ने जिले में जिला स्तर से लेकर ग्राम स्तर तक विभिन्न प्रशासनिक अधिकारियों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी के रूप में अधिसूचित करते हुए विस्तृत आदेश जारी किए हैं।
जारी आदेश के अनुसार बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 की धारा 16(1) के तहत ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में अधिकारियों की जिम्मेदारियां तय की गई हैं, ताकि बाल विवाह की घटनाओं पर प्रभावी निगरानी रखी जा सके और समय रहते आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
जिला से ग्राम स्तर तक जिम्मेदारी तय
आदेश के तहत जिला स्तर पर कलेक्टर, अपर कलेक्टर एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) को जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं अनुभाग एवं तहसील स्तर पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), तहसीलदार एवं नायब तहसीलदारों को बाल विवाह रोकथाम संबंधी दायित्व दिए गए हैं।
ब्लॉक स्तर पर जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। सेक्टर स्तर पर राजस्व निरीक्षक एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के पर्यवेक्षक तथा ग्राम स्तर पर पटवारियों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है।
नगरीय निकायों में भी विशेष व्यवस्था
नगर निगम क्षेत्रों में जोनल अधिकारी, राजस्व अधिकारी, सहायक राजस्व अधिकारी एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। नगर पालिका परिषद और नगर परिषद क्षेत्रों में मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ), राजस्व निरीक्षक, उप राजस्व निरीक्षक तथा स्वच्छता निरीक्षकों को बाल विवाह रोकथाम की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सतर्कता दल करेंगे निगरानी
कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने सभी अधिसूचित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सतर्कता दल (फ्लाइंग स्क्वॉड) के माध्यम से लगातार निगरानी रखें। बाल विवाह की किसी भी सूचना या शिकायत प्राप्त होने पर तत्काल वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
कलेक्टर ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य जिले में बाल विवाह जैसी कुप्रथा पर पूर्णतः अंकुश लगाना है। इसके लिए सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी, ताकि बच्चों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके और समाज को इस सामाजिक बुराई से मुक्त बनाया जा सके।




