Saturday, May 30, 2026

National

spot_img

नर्सिंग कर्मचारियों की आंखों में आंसू, पद बचाने की लड़ाई में सड़कों पर उतरे 83 नर्सेज

ब्यूरो रिपोर्ट: राजेन्द्र खटीक, शाहपुरा

भीलवाड़ा। वर्षों से मरीजों की सेवा में समर्पित नर्सिंग कर्मचारियों के सामने अब अपने पद बचाने का संकट खड़ा हो गया है। राजमेस द्वारा विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग ऑफिसर के पद विलोपित किए जाने के विरोध में शुक्रवार को राजस्थान नर्सेज यूनियन के नेतृत्व में बड़ी संख्या में नर्सिंग कर्मचारियों ने जिला कलेक्टर, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी पीड़ा व्यक्त की।

राजस्थान नर्सेज यूनियन के जिला अध्यक्ष Lucky Byawat के नेतृत्व में 83 नर्सिंग कर्मचारियों ने जिला कलेक्टर Jasmeet Sandhu को ज्ञापन सौंपकर अपने पदों को पुनर्स्थापित करने की मांग की। ज्ञापन के दौरान कई महिला नर्सिंग कर्मचारी भावुक होकर रो पड़ीं और उन्होंने बताया कि करीब नौ वर्ष पूर्व उन्हें स्थानीय सीएचसी एवं पीएचसी से महात्मा गांधी चिकित्सालय के लिए लगाया गया था। वर्तमान में अस्पताल में स्टाफ की कमी होने के बावजूद उनके पद समाप्त किए जा रहे हैं, जिससे उनके भविष्य पर संकट मंडरा रहा है।

नर्सिंग कर्मचारियों ने कहा कि कोरोना काल में उनकी सेवाओं की सराहना करते हुए सम्मान पत्र दिए गए थे, लेकिन आज वही कर्मचारी अपने रोजगार और पदों की सुरक्षा के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। कर्मचारियों की व्यथा सुनने के बाद जिला कलेक्टर ने राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजने का आश्वासन दिया।

इसके बाद नर्सिंग कर्मचारियों ने सांसद जनसुनवाई में पहुंचकर सांसद Damodar Agarwal के समक्ष अपनी समस्या रखी। सांसद ने कर्मचारियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि वे उनके पक्ष में हैं और उन्हें महात्मा गांधी चिकित्सालय में बनाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे। उन्होंने मौके पर ही मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से भी चर्चा की।

नर्सिंग कर्मचारियों का प्रतिनिधिमंडल बाद में मांडलगढ़ विधायक Gopal Lal Khandelwal से मिला। विधायक ने नर्सिंग कर्मचारियों की सेवाओं की सराहना करते हुए चिकित्सा विभाग के अधिकारियों से वार्ता करने का आश्वासन दिया। साथ ही उन्होंने तीन माह से लंबित वेतन का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व विधायक Vitthal Shankar Avasthi तथा भीलवाड़ा विधायक Ashok Kothari से भी मुलाकात कर समर्थन मांगा। दोनों नेताओं ने संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर नर्सिंग कर्मचारियों के हितों की रक्षा का भरोसा दिलाया।

यूनियन जिला अध्यक्ष लक्की ब्यावट ने बताया कि राजमेस द्वारा प्रदेश के सात मेडिकल कॉलेजों में कुल 1267 पद समाप्त किए गए हैं, जिनमें भीलवाड़ा के 83 नर्सिंग ऑफिसर के पद भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये कर्मचारी पिछले नौ वर्षों से महात्मा गांधी चिकित्सालय में गंभीर मरीजों की सेवा कर रहे हैं। ऐसे में उनके अनुभव और सेवाओं को देखते हुए पदों का पुनर्सृजन या जिले में ही समायोजन किया जाना आवश्यक है।

उन्होंने जिले के जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई कि सरकार जल्द ही सकारात्मक निर्णय लेकर नर्सिंग कर्मचारियों को राहत प्रदान करेगी।

ज्ञापन कार्यक्रम में अमित व्यास, गिरिराज लढ़ा, ललित जीनगर, करण सिंह सिसोदिया, दिनेश खटीक, अनीता चौधरी, विमला व्यास, सुनील व्यास, विनोद सोनी, मनोज धाकड़, पिंकी खटीक, जगदीश, गोविंद सिखवाल, मोहम्मद इमरान सहित बड़ी संख्या में नर्सिंग कर्मचारी उपस्थित रहे।

International

spot_img

नर्सिंग कर्मचारियों की आंखों में आंसू, पद बचाने की लड़ाई में सड़कों पर उतरे 83 नर्सेज

ब्यूरो रिपोर्ट: राजेन्द्र खटीक, शाहपुरा

भीलवाड़ा। वर्षों से मरीजों की सेवा में समर्पित नर्सिंग कर्मचारियों के सामने अब अपने पद बचाने का संकट खड़ा हो गया है। राजमेस द्वारा विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग ऑफिसर के पद विलोपित किए जाने के विरोध में शुक्रवार को राजस्थान नर्सेज यूनियन के नेतृत्व में बड़ी संख्या में नर्सिंग कर्मचारियों ने जिला कलेक्टर, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी पीड़ा व्यक्त की।

राजस्थान नर्सेज यूनियन के जिला अध्यक्ष Lucky Byawat के नेतृत्व में 83 नर्सिंग कर्मचारियों ने जिला कलेक्टर Jasmeet Sandhu को ज्ञापन सौंपकर अपने पदों को पुनर्स्थापित करने की मांग की। ज्ञापन के दौरान कई महिला नर्सिंग कर्मचारी भावुक होकर रो पड़ीं और उन्होंने बताया कि करीब नौ वर्ष पूर्व उन्हें स्थानीय सीएचसी एवं पीएचसी से महात्मा गांधी चिकित्सालय के लिए लगाया गया था। वर्तमान में अस्पताल में स्टाफ की कमी होने के बावजूद उनके पद समाप्त किए जा रहे हैं, जिससे उनके भविष्य पर संकट मंडरा रहा है।

नर्सिंग कर्मचारियों ने कहा कि कोरोना काल में उनकी सेवाओं की सराहना करते हुए सम्मान पत्र दिए गए थे, लेकिन आज वही कर्मचारी अपने रोजगार और पदों की सुरक्षा के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। कर्मचारियों की व्यथा सुनने के बाद जिला कलेक्टर ने राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजने का आश्वासन दिया।

इसके बाद नर्सिंग कर्मचारियों ने सांसद जनसुनवाई में पहुंचकर सांसद Damodar Agarwal के समक्ष अपनी समस्या रखी। सांसद ने कर्मचारियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि वे उनके पक्ष में हैं और उन्हें महात्मा गांधी चिकित्सालय में बनाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे। उन्होंने मौके पर ही मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से भी चर्चा की।

नर्सिंग कर्मचारियों का प्रतिनिधिमंडल बाद में मांडलगढ़ विधायक Gopal Lal Khandelwal से मिला। विधायक ने नर्सिंग कर्मचारियों की सेवाओं की सराहना करते हुए चिकित्सा विभाग के अधिकारियों से वार्ता करने का आश्वासन दिया। साथ ही उन्होंने तीन माह से लंबित वेतन का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व विधायक Vitthal Shankar Avasthi तथा भीलवाड़ा विधायक Ashok Kothari से भी मुलाकात कर समर्थन मांगा। दोनों नेताओं ने संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर नर्सिंग कर्मचारियों के हितों की रक्षा का भरोसा दिलाया।

यूनियन जिला अध्यक्ष लक्की ब्यावट ने बताया कि राजमेस द्वारा प्रदेश के सात मेडिकल कॉलेजों में कुल 1267 पद समाप्त किए गए हैं, जिनमें भीलवाड़ा के 83 नर्सिंग ऑफिसर के पद भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये कर्मचारी पिछले नौ वर्षों से महात्मा गांधी चिकित्सालय में गंभीर मरीजों की सेवा कर रहे हैं। ऐसे में उनके अनुभव और सेवाओं को देखते हुए पदों का पुनर्सृजन या जिले में ही समायोजन किया जाना आवश्यक है।

उन्होंने जिले के जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई कि सरकार जल्द ही सकारात्मक निर्णय लेकर नर्सिंग कर्मचारियों को राहत प्रदान करेगी।

ज्ञापन कार्यक्रम में अमित व्यास, गिरिराज लढ़ा, ललित जीनगर, करण सिंह सिसोदिया, दिनेश खटीक, अनीता चौधरी, विमला व्यास, सुनील व्यास, विनोद सोनी, मनोज धाकड़, पिंकी खटीक, जगदीश, गोविंद सिखवाल, मोहम्मद इमरान सहित बड़ी संख्या में नर्सिंग कर्मचारी उपस्थित रहे।

National

spot_img

International

spot_img
RELATED ARTICLES