Monday, May 11, 2026

National

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अरनोद विद्यालय में गूंजा राष्ट्र स्वाभिमान 🇮🇳 सोमनाथ स्वाभिमान महापर्व

ब्यूरो रिपोर्ट: प्रहलाद जणवा

अरनोद। राज्य सरकार के निर्देशानुसार राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय अरनोद में ‘सोमनाथ स्वाभिमान महापर्व’ का आयोजन श्रद्धा एवं उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम भगवान सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया।

विद्यालय के प्रधानाचार्य श्याम लाल गायरी ने बताया कि यह पर्व भारत की सांस्कृतिक चेतना, स्वाभिमान और पुनर्जागरण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि “आज गौतमेश्वर महादेव की धरा से हम केवल एक मंदिर का उत्सव नहीं मना रहे, बल्कि भारत की उस जिजीविषा का उत्सव मना रहे हैं, जिसे न आततायी मिटा सके और न समय की धूल धुंधला सकी।” उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर का भव्य पुनर्निर्माण भारतीय स्वाभिमान के पुनर्जीवन का प्रतीक है।

इस अवसर पर प्राध्यापक कन्हैयालाल मीणा ने कहा कि सोमनाथ केवल पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि भारत की चेतना का केंद्र है। उन्होंने कहा कि आक्रमणों और विनाश के बावजूद सोमनाथ मंदिर हर बार और अधिक भव्यता के साथ उभरकर सामने आया है।

प्राध्यापक राजेंद्र टेलर ने कहा कि ‘स्वाभिमान पर्व’ नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने और राष्ट्र गौरव को समझने का संदेश देता है। वहीं अध्यापक नारायण लाल डाबी ने कहा कि यह आयोजन केवल इतिहास का स्मरण नहीं, बल्कि विकसित भारत के निर्माण के लिए अपनी पहचान पर गर्व करने की प्रेरणा भी है।

कार्यक्रम का संचालन विजय सिंह विद्रोही ने किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने प्रतिदिन पुस्तकालय जाकर भारत के स्वर्णिम इतिहास का अध्ययन करने का संकल्प लिया।

International

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अरनोद विद्यालय में गूंजा राष्ट्र स्वाभिमान 🇮🇳 सोमनाथ स्वाभिमान महापर्व

ब्यूरो रिपोर्ट: प्रहलाद जणवा

अरनोद। राज्य सरकार के निर्देशानुसार राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय अरनोद में ‘सोमनाथ स्वाभिमान महापर्व’ का आयोजन श्रद्धा एवं उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम भगवान सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया।

विद्यालय के प्रधानाचार्य श्याम लाल गायरी ने बताया कि यह पर्व भारत की सांस्कृतिक चेतना, स्वाभिमान और पुनर्जागरण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि “आज गौतमेश्वर महादेव की धरा से हम केवल एक मंदिर का उत्सव नहीं मना रहे, बल्कि भारत की उस जिजीविषा का उत्सव मना रहे हैं, जिसे न आततायी मिटा सके और न समय की धूल धुंधला सकी।” उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर का भव्य पुनर्निर्माण भारतीय स्वाभिमान के पुनर्जीवन का प्रतीक है।

इस अवसर पर प्राध्यापक कन्हैयालाल मीणा ने कहा कि सोमनाथ केवल पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि भारत की चेतना का केंद्र है। उन्होंने कहा कि आक्रमणों और विनाश के बावजूद सोमनाथ मंदिर हर बार और अधिक भव्यता के साथ उभरकर सामने आया है।

प्राध्यापक राजेंद्र टेलर ने कहा कि ‘स्वाभिमान पर्व’ नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने और राष्ट्र गौरव को समझने का संदेश देता है। वहीं अध्यापक नारायण लाल डाबी ने कहा कि यह आयोजन केवल इतिहास का स्मरण नहीं, बल्कि विकसित भारत के निर्माण के लिए अपनी पहचान पर गर्व करने की प्रेरणा भी है।

कार्यक्रम का संचालन विजय सिंह विद्रोही ने किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने प्रतिदिन पुस्तकालय जाकर भारत के स्वर्णिम इतिहास का अध्ययन करने का संकल्प लिया।

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