Tuesday, February 24, 2026

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महाराष्ट्र राज्य जिला गडचिरोली कर्तव्यदक्ष SP महोदय श्री निलोउत्पल द्वारा लोगो को समानता का संदेश

महेश पांडुरंग शेंडे, गडचिरोली

हमारे देश में आजादी के लगभग 80 वर्ष बाद भी देश के लोग ज्यादा से ज्यादा जाति धर्म एवं सम्प्रदाय के नाम पर एक दूसरे को आपस में लड़ना, जबकि हमारे संविधान में यह स्पष्ट किया गया है कि आपकी स्वतंत्रता वहीं समाप्त हो जाती है। आपकी स्वतंत्रता से दूसरे को बाधा उत्पन्न होती है। इसके बावजूद भी समाज में जाति एवं धर्म के नाम पर संप्रदायिक वैमनस्य को बढावा देना गलत है तथा जो भी व्यक्ति ऐसा करता है। उसके खिलाफ कार्रवाई होने के साथ हमेशा के लिए उसकी गतिविधियों तथा पर प्रतिबंध लग जाना चाहिए और उसे सज़ा होनी चाहिए। ताकि फिर दूसरे लोग ऐसा करने का साहस न करें SP महोदय ने कहा कि ऐसी गतिविधियां सिस्टम पर सवाल खड़ा करती है कि नियम कानून से बंधे होने के बाद अगर यह गतिविधियां नहीं रूक रही है तो समाज में सभी लोग एक दूसरे से उलझते रहेंगे l यह काम ज्यादा से ज्यादा लोग अपने व्यक्तिगत लाभ या कुछ बिशेष समूह के हित को देखते हुए पूरे समाज में अंधश्रद्धा और अशांति फैलाने का कार्य करते हैं कि उससे समाज में आक्रोश फैलता है तथा एक समुदाय दूसरे समुदाय के आमने-सामने होकर दुर्भावनाओ से ग्रसित होकर विवाद उत्पन्न हो जाता है।

इसलिए समाज में किसी भी व्यक्ति को कोई ऐसा काम नहीं करना चाहिए, जिससे की जब एक समाज के लोग दूसरों से हमेशा तनाव में रहेंगे तो देश व समाज के विकास की बात पीछे छूट जाती है और लोगों का पूरा समय समस्या समाधान में निकलता चला जाता है l ऐसे ज्यादा काम जाति धर्म और संप्रदाय में गंदी नीति से प्रेरित होकर लोग करते हैं और उस पर आरोप प्रत्यारोप चलता रहता है। इसलिए समाज के हर युवा नौजवानों को हमेशा शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, महिला सुरक्षा के लिए सवाल खड़ा करना चाहिए जब तक समाज में जाति धर्म और संप्रदाय का जहर नहीं रूकेगा तब तक समस्याएं और आगे बढती जाएगी बहन बेटियां समाज व पूरे देश का मान सम्मान होती है। इसलिए इनका अपमान बिल्कुल अक्षम्य है। जिस देश में अपनी ही बहन बेटियां सुरक्षित नहीं है वहां दूसरे लोग बिल्कुल नहीं आ सकते हैं। साथ ही लोगो को आपसी भाईचारा और मिलजुलकर रहने का संदेश दिया l

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महाराष्ट्र राज्य जिला गडचिरोली कर्तव्यदक्ष SP महोदय श्री निलोउत्पल द्वारा लोगो को समानता का संदेश

महेश पांडुरंग शेंडे, गडचिरोली

हमारे देश में आजादी के लगभग 80 वर्ष बाद भी देश के लोग ज्यादा से ज्यादा जाति धर्म एवं सम्प्रदाय के नाम पर एक दूसरे को आपस में लड़ना, जबकि हमारे संविधान में यह स्पष्ट किया गया है कि आपकी स्वतंत्रता वहीं समाप्त हो जाती है। आपकी स्वतंत्रता से दूसरे को बाधा उत्पन्न होती है। इसके बावजूद भी समाज में जाति एवं धर्म के नाम पर संप्रदायिक वैमनस्य को बढावा देना गलत है तथा जो भी व्यक्ति ऐसा करता है। उसके खिलाफ कार्रवाई होने के साथ हमेशा के लिए उसकी गतिविधियों तथा पर प्रतिबंध लग जाना चाहिए और उसे सज़ा होनी चाहिए। ताकि फिर दूसरे लोग ऐसा करने का साहस न करें SP महोदय ने कहा कि ऐसी गतिविधियां सिस्टम पर सवाल खड़ा करती है कि नियम कानून से बंधे होने के बाद अगर यह गतिविधियां नहीं रूक रही है तो समाज में सभी लोग एक दूसरे से उलझते रहेंगे l यह काम ज्यादा से ज्यादा लोग अपने व्यक्तिगत लाभ या कुछ बिशेष समूह के हित को देखते हुए पूरे समाज में अंधश्रद्धा और अशांति फैलाने का कार्य करते हैं कि उससे समाज में आक्रोश फैलता है तथा एक समुदाय दूसरे समुदाय के आमने-सामने होकर दुर्भावनाओ से ग्रसित होकर विवाद उत्पन्न हो जाता है।

इसलिए समाज में किसी भी व्यक्ति को कोई ऐसा काम नहीं करना चाहिए, जिससे की जब एक समाज के लोग दूसरों से हमेशा तनाव में रहेंगे तो देश व समाज के विकास की बात पीछे छूट जाती है और लोगों का पूरा समय समस्या समाधान में निकलता चला जाता है l ऐसे ज्यादा काम जाति धर्म और संप्रदाय में गंदी नीति से प्रेरित होकर लोग करते हैं और उस पर आरोप प्रत्यारोप चलता रहता है। इसलिए समाज के हर युवा नौजवानों को हमेशा शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, महिला सुरक्षा के लिए सवाल खड़ा करना चाहिए जब तक समाज में जाति धर्म और संप्रदाय का जहर नहीं रूकेगा तब तक समस्याएं और आगे बढती जाएगी बहन बेटियां समाज व पूरे देश का मान सम्मान होती है। इसलिए इनका अपमान बिल्कुल अक्षम्य है। जिस देश में अपनी ही बहन बेटियां सुरक्षित नहीं है वहां दूसरे लोग बिल्कुल नहीं आ सकते हैं। साथ ही लोगो को आपसी भाईचारा और मिलजुलकर रहने का संदेश दिया l

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